पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में होने वाले जनता के कूच को 21 जुलाई तक टाल दिया गया है. प्रदर्शनकारियों ने विद्रोह के 38वें दिन रावलकोट के ईदगाह मैदान से पाकिस्तानी फौज को ललकारा और 56 लोगों की लाशों का मुद्दा का उठाया. जिन्हें पाकिस्तानी सेना पिछले 38 दिन से परिजनों को नहीं दे रही है. साथ ही विद्रोह के मंच से पाकिस्तानी सेना की बर्बरता की एक बार फिर गवाही दी, जो 7 जून से लगतार निहत्थे पीओके के लोगों पर गोली चला रही है. जिनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने खाने के लिए सस्ता आटा मांगा, दाल मांगी, रहने के लिए सस्ती बिजली मांगी थी. बर्बर पाकिस्तानी फौज ने ना सिर्फ पिछले 38 दिनों में अपनी गोली से मारे गए 73 में से 56 लोगों की लाशों को परिजनों को नहीं सौंपा है बल्कि अब तक रेंजर्स की गोलीबारी में घायल 219 लोगों को अस्पताल से अपनी गाड़ियों में भरकर बिना किसी FIR के लिए गई है.
प्रदर्शन के प्रमुख आयोजक में से एक सरदार अमान खान ने पाकिस्तान की हुकूमत को ललकारते हुए कहा, ‘कई दिनों से हमारे साथियों की लाशें हमारा इंतज़ार रही हैं, हमारे साथियों की लाशें इनके कब्ज़े में हैं, हमारे साथी जेल में हैं. अपने साथियों को लिए बगैर, अपने साथियों को कंधा दिए बगैर कोई नहीं जाएगा.’
अमान खान ने पाकिस्तान की सेना को आतंकी बताते हुए कहा, ‘जो जमाने के दुत्कारे हुए ये दहशतगर्द हैं और इन्हें आपके नारो से डर लगता है. दुनिया की किसी जंग का असूल नहीं है कि अस्पताल से जख़्मियों को उठाकर लेकर जाओ. ये अस्पताल से हमारे जख़्मियों को उठाके ले लिए गए और इन्होंने जख्मियों को जेल में बंद किया.’ अमान खान ने बार-बार दोहराया कि जख्मियों को अस्पताल से उठाने का असूल किसी जंग में नहीं हुआ जैसे पीओके में पाकिस्तानी रेंजर्स ने किया.
पाकिस्तान आर्मी का साथ देने वालों की उल्टी गिनती शुरू: अमान खान
अमान खान ने विद्रोह का भविष्य बताते हुए कहा कि जो डीसी, एसपी, डीएसपी, एसएचओ फ्रंटियर कोर और रेंजर्स का साथ दे रहे थे वो बस गिनती गिनें, उनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. पीओके के बलूच इलाके में जिस तरह रेंजर्स की गोलीबारी में लोगों ने भी गोलियां चलाई थी, वैसे सशस्त्र विद्रोह की चेतावनी देते हुए अमान खान ने कहा कि पाकिस्तान की बर्बर हुकूमत को आखिरी मौका देने के लिए 15 जुलाई के मार्च को टाला गया है. ये पीओके के विद्रोहियो और प्रदर्शनकारियों का शांतिपूर्ण चेहरा है वरना जो कुछ बलूचिस्तान में हुआ था, वो पीओके के लोग पीओके में भी कर सकते हैं. साथ ही अमान ख़ान ने पाकिस्तान की हुकूमत के साथ बातचीत कर रहे अपने साथियों से कहा कि पीओके के लोगों ने अपनी जान हाजिर की है ऐसे में किसी भी कमजोर फैसले पर हामी भरने की जरूरत नहीं है.
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PoK में 27 जुलाई को होना है चुनाव
पीओके में 27 जुलाई को चुनाव भी होना है. सरदार अमान खान ने कहा कि पीओके में चुनाव तभी होने दिए जाएंगे, अगर चुनाव बिना किसी धांधली के होंगे. वरना चुनाव जनता नहीं होने देगी. साथ ही अमान खान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीओके के ISI सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फैक अयूब का बिना नाम लिए कहा कि सेना के जनरल और कर्नल का काम नहीं है चुनाव करवाना और ना ही उन्हें लोगो पर बर्बरता करने का हक है. आसिम मुनीर को बिना नाम लिए घेरते हुए अमान खान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के कर्नल जरनल सिर्फ सारा ध्यान अय्याशी पर लगाते हैं और DHA में मकान पर फिर लोगों की मांग पर कहते हैं कि ‘जनरल साहब नहीं मानेंगे, लेकिन चिंता मत करो मानेंगे जनरल साहब भी मानेंगे. अवाम से बड़ा कोई जनरल नहीं है.’
बिलावल ने पूर्व PM और मुनीर ने अपने खास को भेजा पीओके
बुधवार को पीओके में बिलावल भुट्टो की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा गया था और आसिम मुनीर का खास पाकिस्तान ओवरसीज फाउंडेशन का प्रमुख कमर रजा आया था, जिसने प्रदर्शनकारियों को बताया था कि वो कथित रूप से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तरफ से आया था, लेकिन पाकिस्तान ओवरसीज फाउंडेशन ने बयान जारी करते हुए कहा कि कमर रजा को आसिम मुनीर ने नहीं भेजा था और प्रदर्शनकारियों का ये दावा गलत है. कमर रजा ने हिंसा का जिम्मेदार प्रदर्शनकारियों को ठहरा दिया. ऐसे में देखना होगा कि पाकिस्तानी हुकूमत और सेना से मिल रहे धोखे के बाद अब प्रदर्शनकारियों का क्या रुख होता है और क्या प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद कूच करने के लिए 22 जुलाई तक इंतजार करते हैं या फिर उससे पहले ही पाकिस्तान का गिरेबान पकड़कर पीओके को आजाद करवा देते हैं.
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