शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार (19 जुलाई) को केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला. उन्होंने पेपर लीक विवाद, छात्र संगठनों के आंदोलन, बाधित मानसून सत्र, प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन और राम मंदिर चंदा मामले को लेकर सरकार की मंशा और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए. प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि सरकार देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही तय करने से भाग रही है और युवाओं की चिंताओं को पूरी तरह अनदेखा कर रही है.
‘राम मंदिर को आस्था नहीं, चुनावी अवसर माना’
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए प्रियंका ने मौजूदा एसआईटी (SIT) की जांच पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “जब वर्तमान जांच पर ही प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, तो नई एसआईटी की बात क्यों हो रही है? इस पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में क्यों नहीं कराई जा रही?”
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने राम मंदिर को आस्था से अधिक राजनीतिक और चुनावी अवसर के रूप में इस्तेमाल किया. जिन लोगों पर अनियमितताओं के आरोप हैं, उन्हें कथित राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण निष्पक्ष जांच नहीं हो पा रही है.
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‘शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा’
दिल्ली में सीजेपी (CJP) और छात्र संगठनों के प्रदर्शन पर बात करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह आंदोलन अचानक नहीं हुआ है. विपक्ष, कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI) और राहुल गांधी लंबे समय से छात्रों की आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने कहा, “सभी संगठनों की मूल मांग एक ही है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय हो और वे इस्तीफा दें. युवाओं को यह भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित होगी.”
‘सरकार के अहंकार के कारण बाधित हुआ मानसून सत्र’
संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार रहने का ठीकरा प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार पर फोड़ा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार समय रहते जवाबदेही तय करती और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा ले लेती, तो संसद सुचारु रूप से चल सकती थी. उन्होंने महाराष्ट्र में हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक का भी जिक्र किया और कहा कि इसके तार भी उसी कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है. सरकार ने संवाद के बजाय अहंकार का रास्ता चुना, जिसके कारण विपक्ष को सड़क पर उतरना पड़ा.
PM आवास के बाहर प्रदर्शन: ‘लोकतंत्र के लिए असाधारण स्थिति’
दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करते हुए प्रियंका ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्ष के धरने को जायज ठहराया. उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र के लिए एक असाधारण स्थिति है जब दो मौजूदा मुख्यमंत्री और विपक्ष के बड़े नेता (राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे) प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे हैं. सरकार तक छात्रों की आवाज नहीं पहुंच रही है, इसलिए उन्हें जगाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा.”
प्रियंका चतुर्वेदी ने अंत में कहा कि पेपर लीक मामले को दो महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. छात्र पढ़ाई छोड़ रहे हैं, हताश हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज को लगातार अनदेखा कर रही है.
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