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16 दिनों में 2 ग्रहण: सत्ता से सीमा तक बढ़ सकती है हलचल, भारत की वर्षकुंडली दे रही बड़े संकट के संकेत


अगस्त का महीना विशेष होने जा रहा है, इस महीने में केवल 16 दिनों के भीतर सूर्य और चंद्रमा दोनों पर ग्रहण की छाया पड़ने वाली है. पहला ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. इसके बाद 28 अगस्त को रक्षाबंधन के मौके पर गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण पड़ेगा.

खगोलीय रूप से एक ग्रहण ऋतु में दो ग्रहण होना सामान्य है. लेकिन ज्योतिष में प्रत्येक ग्रहण का प्रभाव एक जैसा नहीं माना जाता. चिंता तब बढ़ती है, जब ग्रहण किसी देश के जन्मकालीन सूर्य, सत्ता के भाव या वर्षकुंडली के संवेदनशील बिंदुओं के बेहद करीब पड़ता है.

अगस्त में लगने वाले दोनों ग्रहण भारत की कुंडली के ऐसे ही संवेदनशील हिस्सों को सक्रिय कर रहे हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों ग्रहणों के बीच भारत की नई वर्षकुंडली भी शुरू हो जाएगी.

यहीं से कुछ ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जो सत्ता, पड़ोसी देशों, राष्ट्रीय सुरक्षा और शेयर बाजार के लिए अगस्त के दूसरे हिस्से को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं.

अगस्त 2026 में कब लगेंगे दोनों ग्रहण?

12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा. इसकी पूर्णता मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी.

यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. भारतीय समय के अनुसार इसकी मुख्य अवस्था के दौरान देश में रात होगी. इस कारण भारत में इसका प्रत्यक्ष दर्शन और पारंपरिक सूतक मान्य नहीं होगा.

इसके बाद 28 अगस्त की रात गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा. इस दौरान चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाएगा. पूर्ण ग्रहण न होते हुए भी यह लगभग ‘ब्लड मून’ जैसा दिखाई दे सकता है.

इस चंद्र ग्रहण की मुख्य अवस्था भी भारत में दिखाई नहीं देगी. ग्रहण शुरू होने तक देश के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा अस्त हो चुका होगा.

लेकिन किसी देश में ग्रहण दिखाई न देना और उस देश की कुंडली से ग्रहण का संबंध बनना दो अलग ज्योतिषीय विषय हैं. धार्मिक नियमों में दृश्यता महत्वपूर्ण हो सकती है. मेदिनी ज्योतिष में ग्रहण की राशि, अंश, देश की जन्मकुंडली और ताजिक वर्षफल का भी अध्ययन किया जाता है.

यह भी पढ़ें- अगस्त 2026 में बदल सकती है देश की राजनीति? भारत की कुंडली में सरकार और आंदोलन को लेकर बड़े संकेत

भारत की कुंडली क्या कहती है ?

15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि और नई दिल्ली के समय पर आधारित स्वतंत्र भारत की कुंडली में वृषभ लग्न और कर्क राशि है. भारत के जन्मकालीन सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि कर्क राशि के तीसरे भाव में स्थित हैं.

सूर्य कर्क राशि में लगभग 28 अंश पर है. चंद्रमा कर्क में लगभग 4 अंश पर स्थित है. पांच ग्रहों की उपस्थिति के कारण कर्क राशि भारत की कुंडली का अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बन जाती है.

तीसरा भाव पड़ोसी देशों, सीमावर्ती गतिविधियों, सैन्य संचार, मीडिया, सूचना तंत्र, रेल, सड़क और सरकार की रणनीतिक घोषणाओं से जुड़ा माना जाता है.

लेकिन ग्रहण का पूरा फल केवल जन्मकुंडली और गोचर से तय नहीं होगा. इसके लिए ताजिक वर्षफल, मुंथा, मुद्दा दशा और वर्षकुंडली के सक्रिय भावों को भी देखना चाहिए.

भारत की 2025-26 की ताजिक वर्षकुंडली 14 अगस्त 2025 की रात 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू हुई थी. इसका प्रभाव 15 अगस्त 2026 की सुबह तक रहेगा. सूर्य ग्रहण इसी पुरानी वर्षकुंडली में होगा.

भारत की नई 2026-27 ताजिक वर्षकुंडली 15 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 6 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी. इसके बाद 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण नई वर्षकुंडली के अंतर्गत आएगा.

यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है. सूर्य ग्रहण के समय एक वर्ष का अंतिम और संवेदनशील चरण चल रहा होगा. चंद्र ग्रहण के समय नया ताजिक वर्ष राहु की मुद्दा दशा के साथ शुरू हो चुका होगा.

सूर्य ग्रहण भारत के जन्मकालीन सूर्य के बेहद करीब

वैदिक निरयन गणना (Nirayana System) में 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण कर्क राशि के अंतिम हिस्से में पड़ेगा. भारत का जन्मकालीन सूर्य भी कर्क राशि में 27 अंश 59 कला पर स्थित है. इसका अर्थ है कि ग्रहण भारत के जन्मकालीन सूर्य के काफी निकट बन रहा है.

मेदिनी ज्योतिष में सूर्य सरकार, राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल, प्रशासन और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का कारक होता है. जन्मकालीन सूर्य के निकट ग्रहण को सत्ता के लिए संवेदनशील माना जाता है.

यह ग्रहण भारत की कुंडली के तीसरे भाव में पड़ रहा है. इसलिए सरकार पर आने वाला दबाव पड़ोसी देशों, सीमा, संचार व्यवस्था, मीडिया या किसी रणनीतिक सूचना से जुड़ा हो सकता है.

किसी पड़ोसी देश की गतिविधि अचानक तनाव बढ़ा सकती है. सीमा पर सैन्य सतर्कता बढ़ानी पड़ सकती है. किसी गोपनीय दस्तावेज, सुरक्षा चूक, साइबर गतिविधि या गलत सूचना से जुड़ा मामला सरकार को असहज कर सकता है.

किसी वरिष्ठ नेता या अधिकारी का बयान भी कूटनीतिक विवाद पैदा कर सकता है. सरकार को अचानक अपना पक्ष स्पष्ट करने या किसी आरोप का उत्तर देने की जरूरत पड़ सकती है.

यह स्थिति सीधे बड़े संकट की घोषणा तो नहीं करती. लेकिन ग्रहण भारत के जन्मकालीन सूर्य के जितना निकट है, उसे केवल सामान्य खगोलीय घटना मानकर छोड़ना भी उचित नहीं होगा.

सातवें भाव की मुंथा क्यों बढ़ा रही चिंता?

12 अगस्त के सूर्य ग्रहण के समय लागू 2025-26 की ताजिक वर्षकुंडली में वृषभ लग्न है. इस वर्ष मुंथा सातवें भाव में स्थित है. मेदिनी ज्योतिष में सातवां भाव पड़ोसी राष्ट्रों, खुले शत्रुओं, विदेशी संबंधों, युद्ध, संधि और अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जुड़ा होता है. यह भाव विपक्ष का भी है.

सातवें भाव की मुंथा को सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है. यह सहयोगियों के साथ मतभेद, विरोधियों की सक्रियता और समझौतों में बाधा का संकेत दे सकती है.

राष्ट्रीय कुंडली में इसका अर्थ किसी पड़ोसी देश से तनाव, कूटनीतिक विश्वास की कमी या विदेशी साझेदार के बदलते रुख के रूप में सामने आ सकता है.

सूर्य ग्रहण का तीसरे भाव में पड़ना और वर्षकुंडली की मुंथा का सातवें भाव में होना एक ही दिशा की ओर संकेत करता है. दोनों स्थितियों में पड़ोसी देश, सीमाएं और अंतरराष्ट्रीय संबंध सक्रिय हो रहे हैं. विपक्ष भी कम नहीं पड़ेगा. यही वह योग है, जो 12 अगस्त के ग्रहण को भारत के लिए अधिक संवेदनशील बनाता है.

चंद्र की मुद्दा दशा में लगेगा सूर्य ग्रहण

2025-26 की वर्षकुंडली में 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक चंद्रमा की दशा चलेगी. 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण इसी दशा में पड़ेगा. वर्षकुंडली में चंद्रमा बारहवें भाव में स्थित है.

बारहवां भाव विदेश, गुप्त गतिविधियों, बड़े व्यय, अस्पताल, बंदीगृह, हानि और पर्दे के पीछे होने वाली योजनाओं से जुड़ा माना जाता है. चंद्रमा जनता और जनभावना का प्रतिनिधित्व करता है.

इस कारण ग्रहण के आसपास किसी गुप्त कूटनीतिक गतिविधि, सुरक्षा संबंधी खर्च या विदेशी मामले को लेकर जनता में बेचैनी बढ़ सकती है. किसी ऐसी सूचना के सामने आने की आशंका भी बनती है, जिसे पहले सार्वजनिक नहीं किया गया हो. मीडिया में अटकलें और विरोधी दावे तेजी से फैल सकते हैं.

सरकार को किसी मुद्दे पर सूचना नियंत्रित करने, स्पष्टीकरण देने या राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर सीमित जानकारी साझा करने की जरूरत पड़ सकती है.

क्या सत्ता के सामने अचानक खड़ा होगा बड़ा संकट?

जन्मकालीन सूर्य पर ग्रहण, सातवें भाव की मुंथा और बारहवें भाव के चंद्रमा की मुद्दा दशा, ये तीनों संकेत एक साथ सरकार पर बाहरी दबाव की संभावना बढ़ाते हैं.

यह दबाव किसी पड़ोसी देश, विदेशी सरकार, रक्षा समझौते, सीमा विवाद या संवेदनशील संचार से जुड़ा हो सकता है.

विपक्ष इस मामले को सरकार की नीति अथवा राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ सकता है. संसद के बाहर और सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो सकते हैं.

किसी मंत्री, राजदूत, सैन्य अधिकारी या शीर्ष प्रशासनिक व्यक्ति से जुड़ा घटनाक्रम भी चर्चा में आ सकता है. अगस्त के मध्य में सत्ता को अचानक रक्षात्मक स्थिति में आना पड़ सकता है.

15 अगस्त के बाद क्या बदलेगा ?

सूर्य ग्रहण के केवल तीन दिन बाद भारत की नई 2026-27 ताजिक वर्षकुंडली शुरू हो जाएगी. इस वर्षकुंडली में सिंह लग्न है. सूर्य लग्न का स्वामी बनता है. राहु कुंभ राशि के सातवें भाव में और केतु सिंह राशि के लग्न में स्थित है.

इससे वर्षकुंडली का पहला और सातवां भाव राहु-केतु अक्ष से सक्रिय हो जाता है. पहला भाव स्वयं राष्ट्र, उसकी पहचान, नेतृत्व और समग्र स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है. सातवां भाव पड़ोसी देशों, विदेशी शक्तियों, संधियों, खुले विरोधियों और विपक्ष का होता है.

जब राहु-केतु इस अक्ष पर स्थित हों, तो देश और विदेशी शक्तियों के बीच अविश्वास, भ्रम, छिपी रणनीति या अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आ सकता है.

28 अगस्त के चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा. भारत की वृषभ लग्न जन्मकुंडली में कुंभ दसवां भाव है. यह केंद्र सरकार, शीर्ष नेतृत्व, शासन, प्रशासन और विश्व स्तर पर देश की प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करता है.

नई ताजिक वर्षकुंडली में सिंह लग्न होने के कारण कुंभ सातवां भाव बनता है. यह पड़ोसी देशों, विदेशी समझौतों और विरोधी शक्तियों से जुड़ा है.

अर्थात एक ही चंद्र ग्रहण जन्मकुंडली में सरकार के दसवें भाव और वर्षकुंडली में विदेशी संबंधों के सातवें भाव को सक्रिय करेगा. इसका स्पष्ट संकेत है कि किसी विदेशी या पड़ोसी देश से जुड़ा घटनाक्रम केंद्र सरकार पर सीधा राजनीतिक और रणनीतिक दबाव पैदा कर सकता है.

राहु की मुद्दा दशा में राहु के साथ ग्रहण

2026-27 की वर्षकुंडली में 15 अगस्त से 9 अक्टूबर तक राहु की लघु दशा चलेगी. 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण इसी राहु की लघु या सूक्ष्म दशा में पड़ेगा.

वर्षकुंडली में राहु स्वयं कुंभ राशि के सातवें भाव में स्थित है. चंद्र ग्रहण भी इसी राशि क्षेत्र को सक्रिय करेगा. इस प्रकार ग्रहण के समय राहु का प्रभाव कई स्तरों पर काम करेगा.

राहु भ्रम, गुप्त रणनीति, छल, दुष्प्रचार, विदेशी तत्व, साइबर गतिविधि और अचानक बदलती परिस्थितियों का कारक माना जाता है. इस अवधि में किसी पड़ोसी देश की मंशा पर संदेह बढ़ सकता है. पहले से चल रही वार्ता अचानक रुक सकती है. कोई समझौता अंतिम समय पर विवाद में फंस सकता है.

किसी विदेशी शक्ति का ऐसा बयान सामने आ सकता है, जो भारत के लिए कूटनीतिक असहजता पैदा करे. साइबर हमले, डेटा लीक या गलत सूचना का अभियान भी चिंता बढ़ा सकता है.

सोशल मीडिया पर किसी अपुष्ट सूचना के तेजी से फैलने के कारण जनभावना भड़क सकती है. सरकार को तथ्य सामने लाने और स्थिति नियंत्रित करने में समय लग सकता है.

जनता और सरकार के बीच बढ़ सकती है दूरी!

चंद्रमा जनता के मन, भावनाओं और सार्वजनिक प्रतिक्रिया का प्रतिनिधित्व करता है. राहु के साथ ग्रहणग्रस्त चंद्रमा तथ्यों और धारणाओं के बीच अंतर पैदा कर सकता है.

किसी सरकारी फैसले को लेकर भ्रम फैल सकता है. जनता के एक हिस्से को लग सकता है कि पूरी जानकारी साझा नहीं की जा रही. विपक्ष इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है.

विरोध, ऑनलाइन अभियान या प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि असंतोष पूरे देश में समान रूप से दिखाई दे. ग्रहण का प्रभाव किसी एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर जनता की भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में भी सामने आ सकता है.

क्या युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है?

सातवें भाव की मुंथा, राहु की सातवें भाव में स्थिति और पड़ोसी देशों से जुड़े भावों पर ग्रहण युद्ध अथवा खुले संघर्ष का भय पैदा कर सकते हैं. अगस्त में सीमा, रक्षा या कूटनीति से जुड़ा तनाव अचानक बढ़ सकता है.

सैन्य सतर्कता, कठोर बयान अथवा सीमित टकराव की खबरें वातावरण को गंभीर बना सकती हैं. स्थिति वास्तविक युद्ध में बदलेगी या बातचीत से नियंत्रित हो जाएगी, इसका निर्णय अन्य ग्रह-योगों और तत्कालीन वास्तविक घटनाओं से होगा.

युवा करेंगे आंदोलन!

2026-27 की नई वर्षकुंडली में मुंथा पांचवें भाव में स्थित है. मुंथा की यह स्थिति सामान्यतः अनुकूल मानी जाती है. राष्ट्रीय वर्षफल में पांचवां भाव संसद, नीति-निर्माण, रणनीतिक बुद्धि, शिक्षा, युवा (Gen-Z), खेल और शेयर बाजार से जुड़ा हो सकता है.

इस स्थिति से संकेत मिलता है कि राहु और ग्रहण गंभीर दबाव पैदा करेंगे, लेकिन सरकार के पास रणनीतिक निर्णय के माध्यम से स्थिति संभालने की क्षमता भी रहेगी.

किसी संकट के बाद तेज नीति-निर्णय लिया जा सकता है. संसद, सुरक्षा परिषद या शीर्ष अधिकारियों की बैठक से समाधान निकालने का प्रयास हो सकता है.

सरकार दबाव में अवश्य आएगी, लेकिन पांचवें भाव की मुंथा संकट को पूरी तरह नियंत्रण से बाहर जाने से रोक सकती है. इसलिए ग्रहण का परिणाम केवल हानि नहीं होगा. यह सरकार को रणनीतिक बदलाव, नई नीति या कठोर निर्णय लेने के लिए भी मजबूर कर सकता है.

शेयर बाजार में क्यों बढ़ सकता है उतार-चढ़ाव?

मेदिनी ज्योतिष में पांचवां भाव सट्टा, निवेशक मनोविज्ञान और शेयर बाजार से भी संबंध रखता है. नई वर्षकुंडली की मुंथा इसी भाव में है. राहु की मुद्दा दशा में चंद्र ग्रहण बाजार में भ्रम और भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है. किसी विदेशी समाचार, सीमा तनाव अथवा सरकारी घोषणा से अचानक बिकवाली देखने को मिल सकती है.

अगस्त के अंतिम सप्ताह से सितंबर के शुरुआती दिनों तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव की आशंका रह सकती है. विदेशी निवेशकों की प्रतिक्रिया भी बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है. अपुष्ट खबरों के कारण किसी एक दिन बड़ी हलचल संभव है.

लेकिन पांचवें भाव की अनुकूल मुंथा संकेत देती है कि गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की क्षमता भी रह सकती है.

क्या ग्रहण से डरने की आवश्यकता है?

दो ग्रहणों का होना अपने आप में किसी बड़े संकट का संकेत नहीं है. दोनों ग्रहण भारत में दिखाई भी नहीं देंगे. लेकिन वर्षफल और भारत की जन्मकुंडली को एक साथ देखने पर अगस्त 2026 का दूसरा हिस्सा राजनीतिक तथा कूटनीतिक रूप से संवेदनशील दिखाई देता है.

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत के जन्मकालीन सूर्य के निकट पड़ रहा है. उस समय सातवें भाव की मुंथा और बारहवें भाव के चंद्रमा की सूक्ष्म दशा सक्रिय होगी.

28 अगस्त का चंद्र ग्रहण नई वर्षकुंडली के सातवें भाव में राहु के प्रभाव वाले क्षेत्र में पड़ेगा. उस समय राहु की ही लघु दशा चल रही होगी. जन्मकुंडली में यह ग्रहण सत्ता के दसवें भाव को सक्रिय करेगा.

इन योगों से पड़ोसी देशों, सीमा सुरक्षा, विदेश नीति, साइबर गतिविधि, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आने की आशंका बढ़ती है.

हालांकि नई वर्षकुंडली में पांचवें भाव की मुंथा संकट से निकलने की रणनीतिक क्षमता भी प्रदान करती है.

ग्रहण काल में क्या कर सकते हैं?

भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण सामान्यतः सूतक और ग्रहण संबंधी कठोर धार्मिक नियम लागू नहीं होंगे.

फिर भी श्रद्धालु मानसिक शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का जप कर सकते हैं. सावन का महीना चल रहा है तो भगवान शिव की उपासना और जरूरतमंद लोगों को अन्न, चावल या वस्त्र का दान किया जा सकता है.

गोपनीय गतिविधियां बढ़ा सकती हैं परेशानी

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत के जन्मकालीन सूर्य और तीसरे भाव को सक्रिय करेगा. उस समय सातवें भाव की मुंथा तथा बारहवें भाव के चंद्रमा की मुद्दा दशा विदेशी मामलों और गोपनीय गतिविधियों से जुड़े दबाव की आशंका बढ़ाती है.

28 अगस्त का चंद्र ग्रहण जन्मकुंडली के दसवें और नई वर्षकुंडली के सातवें भाव को सक्रिय करेगा. राहु की मुद्दा दशा में राहु के प्रभाव वाले क्षेत्र पर पड़ रहा यह ग्रहण विदेशी संबंधों, सत्ता और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत है.

अगस्त के मध्य से सितंबर के शुरुआती दिनों तक किसी पड़ोसी देश, सीमा, साइबर सुरक्षा या कूटनीतिक समझौते से जुड़ा घटनाक्रम केंद्र सरकार पर अचानक दबाव बना सकता है.

संकट गंभीर हो सकता है, लेकिन पांचवें भाव की मुंथा संकेत देती है कि भारत रणनीतिक निर्णय और कूटनीतिक कौशल के माध्यम से स्थिति को संभालने की क्षमता भी रखेगा.

ग्रहण खतरे का संकेत अवश्य दे रहे हैं, लेकिन परिणाम केवल संकट नहीं, एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में भी सामने आ सकता है.

FAQ 

अगस्त 2026 में कौन-कौन से ग्रहण लगेंगे?

12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा.

क्या अगस्त 2026 के ग्रहण भारत में दिखाई देंगे?

दोनों ग्रहणों की मुख्य अवस्था भारत में दिखाई नहीं देगी. इसलिए सामान्यतः भारत में इनका सूतक मान्य नहीं होगा.

सूर्य ग्रहण भारत की कुंडली के किस भाव में लगेगा?

वैदिक निरयन गणना में सूर्य ग्रहण कर्क राशि में पड़ेगा. भारत की वृषभ लग्न कुंडली में यह तीसरा भाव है.

सूर्य ग्रहण को भारत के लिए संवेदनशील क्यों माना जा रहा है?

भारत का जन्मकालीन सूर्य कर्क राशि में लगभग 28 अंश पर है. 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण इसी क्षेत्र के निकट बनने के कारण सत्ता, नेतृत्व और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को सक्रिय कर सकता है.

चंद्र ग्रहण भारत की कुंडली के किस भाव में पड़ेगा?

निरयन गणना में चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में होगा. यह भारत की जन्मकुंडली का दसवां और 2026-27 की ताजिक वर्षकुंडली का सातवां भाव है.

मुंथा क्या संकेत दे रही है?

सूर्य ग्रहण के समय लागू वर्षकुंडली में मुंथा सातवें भाव में है. यह पड़ोसी देशों और विदेशी संबंधों में दबाव दिखाती है. नई वर्षकुंडली में मुंथा पांचवें भाव में होगी, जो रणनीतिक निर्णय और संकट से उबरने की क्षमता का संकेत देती है.

राहु की मुद्दा दशा में चंद्र ग्रहण का क्या प्रभाव होगा?

राहु की मुद्दा दशा में राहु के प्रभाव वाले सातवें भाव पर ग्रहण विदेशी संबंधों, दुष्प्रचार, साइबर सुरक्षा और अप्रत्याशित कूटनीतिक घटनाओं की आशंका बढ़ा सकता है.

क्या ग्रहण से शेयर बाजार में गिरावट आएगी?

ग्रहण के आसपास विदेशी या राजनीतिक खबरों के कारण बाजार में अस्थिरता संभव है. लेकिन केवल ग्रहण के आधार पर बड़ी गिरावट की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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