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Parivartini Ekadashi 2026: आज रात से एकादशी तिथि होगी शुरू, जानें अन्न-नमक छोड़ने का सही नियम


Parivartini Ekadashi 2026 Niyam: परिवर्तिनी एकादशी की तिथि आज रात करीब 8 बजे शुरू हो रही है. ऐसे में व्रत रखने वाले लोगों के मन में सवाल है कि क्या रात 8 बजे के बाद रसोई में रखा अन्न और नमक भी घर से हटा देना चाहिए? जानिए एकादशी शुरू होने से पहले क्या करना जरूरी है और कौन-सी बातें केवल लोकमान्यता हैं.

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी. सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहने के कारण व्रत 22 सितंबर को मान्य होगा.

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एकादशी तिथि आज रात से शुरू होने के कारण कई घरों में शाम से ही भोजन और रसोई से जुड़े नियमों का पालन शुरू कर दिया जाएगा. लेकिन क्या इसके लिए घर में रखा सारा अन्न और नमक बाहर निकालना जरूरी है?

क्या रात 8 बजे के बाद घर से अन्न हटा देना चाहिए?

नहीं. एकादशी पर घर से गेहूं, चावल, दाल या दूसरा अन्न निकाल देने का कोई सामान्य शास्त्रीय नियम नहीं है. नियम अन्न के भंडारण पर नहीं, बल्कि व्रती द्वारा उसके सेवन पर लागू होता है.

घर में अन्न रखा रह सकता है. यदि परिवार के दूसरे सदस्य व्रत नहीं रखते तो उनके लिए भोजन बनाया जा सकता है. हालांकि व्रती को अन्न पकाने, परोसने या बार-बार उसके संपर्क में आने से बचना चाहिए, विशेषकर जब वह कठोर नियम वाला व्रत कर रहा हो.

कुछ वैष्णव परिवार एकादशी के दिन सामान्य भोजन नहीं बनाते और रसोई को पूरी तरह फलाहारी रखते हैं. यह उनकी पारिवारिक या संप्रदायगत परंपरा हो सकती है, लेकिन इसे सभी गृहस्थों के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जा सकता.

क्या सामान्य नमक भी घर से निकालना होगा?

नमक को भी घर से हटाने की आवश्यकता नहीं है. एकादशी के फलाहार में सामान्यतः साधारण सफेद नमक के स्थान पर सेंधा नमक प्रयोग किया जाता है. जो लोग निर्लवण व्रत रखते हैं, वे सेंधा नमक भी नहीं खाते.

यहां भी नियम साफ है, नमक का सेवन नहीं करना और घर में नमक न रखना, दोनों अलग बातें हैं. नमक का डिब्बा रसोई में रहने से व्रत खंडित नहीं होता.

रात 8 बजे तिथि लगते ही भोजन बंद करना होगा?

सिर्फ तिथि रात 8 बजे शुरू होने के कारण उसी क्षण से सभी लोगों के लिए अन्न खाना निषिद्ध मान लेना सही नहीं है. एकादशी व्रत का मुख्य पालन 22 सितंबर को सूर्योदय से किया जाएगा.

फिर भी व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए आज दशमी के दिन सूर्यास्त से पहले हल्का और सात्त्विक भोजन कर लेना उत्तम माना जाता है. यदि ऐसा संभव न हो तो रात में बहुत देर से, अधिक मसालेदार या भारी भोजन करने से बचें. इसका उद्देश्य अगले दिन उपवास के लिए शरीर और मन को तैयार करना है.

शाम के बाद क्या सावधानी रखें?

व्रती आज रात से इन बातों का ध्यान रख सकता है,

  • भोजन हल्का, सात्त्विक और सुपाच्य रखें.
  • मांसाहार, मदिरा, प्याज और लहसुन से दूर रहें.
  • चावल, दाल और बहुत भारी भोजन न लें.
  • क्रोध, कटु वचन और देर रात तक जागने से बचें.
  • सोने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें.
  • अगले दिन फलाहार में फल, दूध, मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना और सेंधा नमक लिया जा सकता है.

चावल को लेकर क्यों बरती जाती है विशेष सावधानी?

एकादशी के दिन सभी प्रकार के अन्न से परहेज किया जाता है, लेकिन धार्मिक परंपरा में चावल न खाने पर विशेष जोर दिया गया है. इसलिए बेहतर होगा कि व्रती के फलाहार के बर्तन, चम्मच और पकाने की जगह को साफ रखा जाए, ताकि उसमें अन्न या चावल का अंश न मिल जाए.

परिवर्तिनी एकादशी का पारण कब होगा?

पंचांग की गणना के अनुसार व्रत का पारण 23 सितंबर 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा. उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार पारण का समय सुबह लगभग 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट के बीच बताया गया है. स्थान बदलने पर सूर्योदय और पारण के समय में कुछ अंतर हो सकता है.

आज रात एकादशी तिथि लगने के बाद घर से अन्न या नमक बाहर फेंकने की जरूरत नहीं है. व्रत का संबंध त्याग, संयम और सेवन के नियमों से है, घर की रसोई खाली करने से नहीं. परिवार की परंपरा अलग हो तो उसका पालन किया जा सकता है, लेकिन लोकमान्यता को सभी के लिए अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं बताना चाहिए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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