अलीगढ़ में सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति का रंग पूरे अलीगढ़ जिले में दिखाई दे रहा है. जगह-जगह कांवड़िये हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों के साथ शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं. इस बीच अलीगढ़ की कोल तहसील क्षेत्र में एक शिवभक्त की अनोखी और कठिन कांवड़ यात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. थाना हरदुआगंज क्षेत्र के गांव जरौठी निवासी संजय ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए करीब 50 किलोमीटर की दूरी की ऐसी यात्रा की, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और शिवभक्ति की भावना से भावुक भी नजर आ रहे हैं.
संजय ने गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित राजघाट से गंगाजल लेकर अपने गांव जरौठी तक पहुंचने का संकल्प लिया. खास बात यह रही कि उन्होंने यह यात्रा सामान्य तरीके से पैदल चलकर नहीं, बल्कि कीलों से जड़े तख्ते पर दंडवत होकर पूरी की. संजय के इस कठिन संकल्प के पीछे परिवार की सुख-समृद्धि, गांव की खुशहाली और भगवान शिव को प्रसन्न करने की आस्था बताई जा रही है.
कांवड़ यात्रा के बीच मुजफ्फरनगर में हाई अलर्ट, ATS और डॉग स्क्वायड तैनात
कीलों पर दंडवत होकर आगे बढ़ते रहे संजय
संजय की कांवड़ यात्रा का सबसे अलग पहलू उनका दंडवत होकर आगे बढ़ना रहा. सड़क पर कीलों से जड़े तख्ते को रखा जाता है. संजय उस पर लेटकर भगवान शिव का स्मरण करते हुए आगे बढ़ते हैं. इसके बाद तख्ते को आगे किया जाता है और वह फिर दंडवत होकर अपनी यात्रा जारी रखते हैं. इस तरह धीरे-धीरे कदमों की दूरी कम होती जाती है और कठिन रास्ता तय करते हुए वह अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहते हैं.
संजय के इस संकल्प को देखने वाले लोगों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी को इस तरह तय करना आसान नहीं है. शरीर को कष्ट देकर भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने वाले संजय के जज्बे ने आसपास के लोगों को भी प्रभावित किया है. जैसे-जैसे उनकी कांवड़ यात्रा गांव की ओर बढ़ी, वैसे-वैसे उनके साथ चलने वाले और उन्हें देखने वालों की संख्या भी बढ़ती चली गई.
परिवार की सुख-समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना
संजय से जब बातचीत की गई तो उनके द्वारा बताया गया उनकी इस यात्रा का उद्देश्य केवल कांवड़ लाना नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना है. वह अपने परिवार की सुख-समृद्धि, सभी परिजनों के स्वस्थ और खुशहाल जीवन तथा गांव में शांति और खुशहाली की कामना लेकर यह कठिन संकल्प पूरा कर रहे हैं. सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है. श्रद्धालु दूर-दूर से गंगाजल लेकर शिवालयों में पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
इसी आस्था के बीच संजय ने अपने लिए एक कठिन मार्ग चुना और राजघाट से गंगाजल लेकर उसे अपने गांव के शिवालय तक पहुंचाने का संकल्प लिया. उनकी कांवड़ में गंगाजल से भरा मटका भी रखा गया, जिसे वह भगवान शिव को समर्पित करने के उद्देश्य से लेकर चले. रास्ते में दंडवत होकर आगे बढ़ते समय वह शिव का स्मरण करते रहे. उनके साथ मौजूद लोग भी हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगाते हुए उनका उत्साह बढ़ाते रहे.
गांव पहुंचते ही देखने के लिए उमड़ा हुजूम
जब संजय अपनी कील कांवड़ लेकर गांव जरौठी पहुंचे तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और शिवभक्त उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे. संजय के गांव पहुंचते ही लोगों में उत्साह का माहौल बन गया. हर कोई उनकी इस कठिन यात्रा को अपनी आंखों से देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिया. गांव की सड़कों पर लोगों की भीड़ जमा हो गई. बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी संजय की कांवड़ यात्रा को देखने के लिए पहुंचते रहे.
उनके गांव पहुंचने की खबर आसपास के क्षेत्रों में भी फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए. संजय को कीलों पर दंडवत होकर आगे बढ़ते देखकर लोग उनकी शिवभक्ति की चर्चा करते नजर आए.
ग्रामीणों का कहना था कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था और संकल्प ने पूरे गांव में भक्ति का माहौल बना दिया है. संजय के गांव पहुंचने के साथ ही पूरा माहौल शिवमय हो गया. हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने संजय के संकल्प की सराहना की और उनके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.
कांवड़ यात्रा में दिखी जय-वीरू की जोड़ी, शामली पहुंचते ही मचाई चाई धूम
