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विदेश नीति, युवा आबादी और शिक्षित महिलाएं- राष्ट्रपति के संबोधन की 10 बातें


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  • विदेश नीति, डिजिटल प्रगति, पर्यावरण संरक्षण को प्रमुख बताया।

देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार (14 अगस्त, 2026) को देश के नाम अपना संबोधन दिया. अपने संबोधन की शुरुआत राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी देशवासियों को राष्ट्रीय पर्व की बधाई देकर की. उन्होंने कहा कि कुछ ही घंटों के बाद हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा और हमारा तिरंगा हमारी स्वाधीनता का प्रतीक है. इस दौरान उन्होंने देश की विदेश नीति, युवा आबादी, शिक्षि महिलाओं समेत कई अन्य विषयों पर अपनी बात रखी है. जानें राष्ट्रपति के संबोधन की 10 बड़ी बातें-

युवा आबादी पर बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘देश की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोगों की आयु 35 वर्ष से कम है. यह युवा आबादी हमारी सबसे मूल्यवान संपदा है. केवल 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम द्वारा हाल ही में रॉकेट का सफल प्रक्षेपण करके अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए चरण का शुभारंभ किया गया है. हमारे देश के युवा टैलेंटेड हैं, कमिटेड हैं और स्किल्ड हैं. जमीनी स्तर पर युवाओं द्वारा किए गए विभिन्न समस्याओं के इनोवेटिव और प्रैक्टिकल समाधान को देखकर मुझे समाज और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है.’

शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बेटियों का प्रदर्शन प्रभावशाली- राष्ट्रपति मुर्मू

उन्होंने कहा, ‘मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती है कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बेटियां प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं. महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है. स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ से अधिक महिला सदस्य हैं. मुद्रा योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले उद्यमियों में लगभग दो तिहाई लाभार्थी महिलाएं हैं. कृषि उत्पादकता बढ़ाने में योगदान देने वाली ड्रोन दीदी से लेकर वायु सेना में फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने तक विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया गया था. इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है. अब हमारा देश 3 करोड़ महिलाओं को नई लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की तरफ अग्रसर है.’

भारत की विदेश नीति पर राष्ट्रपति का संबोधन

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘हमारी विदेश नीति, देश हित पर आधारित है. आर्थिक सहयोग बढ़ाने तथा पारस्परिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए हमने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements) किए हैं. ग्लोबल साउथ के देशों में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. विश्व पटल पर हमारे देश का सम्मान बढ़ा है. शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श हमारी विदेश नीति के स्तंभ हैं.’ 

भारत की आधुनिक विकास पर राष्ट्रपति की कथन

उन्होंने कहा, ‘आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर अग्रणी योगदान दे रहा है. रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के विकास को पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है. सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल्स 2030 के कुछ लक्ष्यों को हमारे देश ने समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है.’

देश की अर्थव्यवस्था पर बोलीं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘हमारे देश की अर्थव्यवस्था, सबसे तेज गति से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है. आत्मनिर्भर भारत अभियान से हमारी आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है.’

भावी पीढ़ियों के लिए नहीं होनी चाहिए कोई कमी- राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसी भी कार्य से आने वाली पीढ़ियों द्वारा इस अधिकार के प्रयोग में तनिक भी कमी न हो. हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम उनको और अधिक समृद्ध प्राकृतिक संपदाएं प्रदान करें. पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी आस्था हमारी परंपरा का हिस्सा है. प्राकृतिक संपदाओं पर हमारी भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है, जितना हमारा है.’

आज का व्यक्ति सपने देखने और पूरा करने में सक्षम- राष्ट्रपति

उन्होंने कहा, ‘आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग अनेक क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं. इससे मेरा यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है. पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है, विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है और विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है.

देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रपति ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) विकसित किया गया है. गांवों की छोटी-छोटी दुकानों में और रेहड़ी-पटरी पर भी डिजिटल पेमेंट्स हो रहे हैं. विश्व में आधे से अधिक रियल टाइम डिजिटल ट्रांसजैक्शन (Real Time Digital Transactions) भारत में हो रहे हैं. तकनीक का उपयोग करके सरकार ने जनकल्याण की सुविधाओं को पारदर्शी तरीके से जन-जन तक पहुंचाया है.’  

विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कर्तव्य पर राष्ट्रपति के विचार

द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें. कार्यपालिका का कर्तव्य है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप दे. न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे.’

गरीबी उन्मूलन और बैंकिंग व्यवस्था से लोगों को जोड़ने पर बोलीं द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि पिछले कई सालों में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है. विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेश की योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं. उनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं. 80 करोड़ लोगों के लिए निःशुल्क राशन की व्यवस्था द्वारा उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है.

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