दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के इतिहास विभाग के पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम के नए सिलेबस को लेकर विवाद शुरू हो गया है. 2026-27 सत्र से लागू होने वाले MA हिस्ट्री के Semester III के नए सिलेबस में इतिहास के कई अहम प्रस्तावित पेपरों को जगह नहीं मिली है. इनमें मध्यकालीन भारत के इतिहास से जुड़ा चर्चित पेपर “द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर ऑफ अथॉरिटी इन मिडिबल नॉर्थ इंडिया(13th–14th Centuries)” भी शामिल है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 7 अगस्त को MA हिस्ट्री के PGCF 2024 के तहत सेमेस्टर III का सिलेबस जारी किया है.
नए सिलेबस के मुताबिक सेमेस्टरIII में दो डिसिपिलिन स्पेसिफिक कोर यानी DSC पेपर शामिल किए गए हैं. इनमें “Themes in Ancient Indian Culture and Society” और ‘Socio-Cultural History of India C. 700–1700” शामिल हैं. इसके अलावा 16 Discipline Specific Elective यानी DSE पेपर फाइनल सिलेबस में रखे गए हैं. यह सिलेबस PGCF 2024 के तहत NEP-2020 आधारित है और जुलाई 2026 से प्रभावी है.
कैसा है फाइनल सिलेबस?
फाइनल सिलेबस में शामिल 16 DSE पेपरों में प्राचीन भारत से जुड़े “Prehistory of India”, “History of Early Indian Art and Architecture (up to c. 600 CE)”, “Theories, Methods and Practices in Archaeology”, “Historiography of Ancient India”, “Historical Geography of Ancient India” और “Perspectives on Nature in Ancient India” शामिल हैं.
नए सिलेबस में मध्यकालीन भारत का अध्ययन पूरी तरह खत्म नहीं
मध्यकालीन भारत से जुड़े फाइनल DSE पेपरों में “History, Sources and Narratives in Medieval India”, “History of an Idea: Rajasthan, c 1200-1800”, “Socio-Economic History of India: 1200-1700” और “Sovereignty and Court Culture in South Asia, 1400–1700” शामिल हैं. यानी नए सिलेबस में मध्यकालीन भारत का अध्ययन पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, लेकिन पहले पढ़ाया जाने वाला “The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India (13th–14th Centuries)” पेपर फाइनल सूची में नहीं है.
आधुनिक भारतीय इतिहास के लिए फाइनल सिलेबस में “The Rise of British Imperial and Colonial Power in India, 1707-1857”, “Some Aspects of the Cultural Histories of Colonial India: The Visual and the Aural”, “Revolutionaries in India’s Struggle for Freedom”, “The Colonial Economy in India: 1757-1857”, “Strategies of Imperial Control, 1857–1939” और “Artisans, Skill, and Knowledge in Modern Indian History (c.1857-1947)” शामिल किए गए हैं.
इन प्रस्तावित पेपरों को Semester III के फाइनल सिलेबस में नहीं मिली जगह
वहीं, जिन प्रस्तावित पेपरों को Semester III के फाइनल सिलेबस में जगह नहीं मिली है, उनमें “The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India (13th–14th Centuries)”, “History of North India, c. 1400–1550”, “Gender and Women in Early India: 1500 BCE–1000 CE”, “Political Processes and Structure of Polities in Ancient India” और “Religion and Society in Ancient Indian Literature” शामिल हैं. इन विषयों में मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता और शासन व्यवस्था से लेकर प्राचीन भारत में महिलाओं, जेंडर, राजनीतिक संस्थाओं तथा धर्म और समाज जैसे विषय शामिल थे.
“The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India” पेपर के जरिए तुर्क और ग़ुलाम वंश के दौरान उत्तर भारत में सत्ता के स्वरूप, शासन व्यवस्था, राज्य संरचना और राजनीतिक-सामाजिक बदलावों का अध्ययन कराया जाता था. दिल्ली सल्तनत भारतीय इतिहास के उस महत्वपूर्ण दौर से जुड़ी है जिसमें 11 वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में विभिन्न सल्तनती राजवंशों का शासन रहा.
DU में एम ए इतिहास के छात्र शुभ के मुताबिक इस तरह का फैसला इतिहास के छात्रों के साथ खिलवाड़ है. किसी भी राजवंश ने अपने समय पर काम अच्छा किया या फिर गलत किया इसका फ़ैसला तभी होगा जब उसे पढ़ा जाएगा.
विवाद पर क्या बोले भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक?
इतिहासकार और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ ओमजी उपाध्याय हालांकि चैप्टर हटाए जाने के पक्ष में तर्क दे रहे हैं कि सेमेस्टर-3 में जो पेपर पढ़ाए जा रहे हैं, उनमे सुल्तान डायनेस्टी के कालखंड की अन्य चीजें पढ़ाई जा रही हैं और बताई जा रही हैं, ऐसे में ये कह देना कि सुल्तान डायनेस्टी पूरा पूरा गायब है, ये आधा अधूरा तर्क दिया जा रहा है.
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफ़ेसर डॉ अली नदीम रिजवी इस तरफ से पेपर के हटाने का विरोध कर रहे हैं. डॉ अली नदीम रिज़वी के मुताबिक ये सिलसिला एनसीईआरटी से शुरू हुआ था जो आज पीजी तक पहुंच गया है कि जब इतिहास बदल ना पाओ तो उसे हटा दो.
जानकारी के अनुसार, विभाग की ओर से बड़ी संख्या में DSE पेपर प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन अंतिम सिलेबस में सीमित संख्या में पेपर शामिल किए गए. फाइनल दस्तावेज में 16 DSE पेपर दर्ज हैं. उपलब्ध सिलेबस दस्तावेज यह भी दिखाता है कि अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों को कवर करने वाले पेपरों को अंतिम सूची में शामिल किया गया है, जिसमें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय इतिहास तीनों शामिल हैं.
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