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JP Nadda Angioplasty : जेपी नड्डा की हुई एंजियोप्लास्टी, जानें कब और क्यों पड़ती है जरूरत?


कोरोनरी एंजियोप्लास्टी एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल दिल की ब्लॉक हुई धमनी को खोलने के लिए किया जाता है. इसे Percutaneous Coronary Intervention यानी PCI भी कहा जाता है. धमनियों में प्लाक जमा होने से ब्लड फ्लो कम हो सकता है और सीने में दर्द जैसी समस्या हो सकती है.

एंजियोप्लास्टी में छाती को खोलकर ऑपरेशन नहीं किया जाता है. डॉक्टर कलाई, हाथ या कमर की धमनी से एक पतली ट्यूब यानी कैथेटर को अंदर डालते हैं. एक्स-रे की मदद से इसे प्रभावित कोरोनरी आर्टरी तक पहुंचाया जाता है. इसके बाद एक पतली वायर को ब्लॉकेज वाले हिस्से से आगे ले जाया जाता है. इसके बाद कैथेटर के साथ लगे छोटे बैलून को ब्लॉकेज वाली जगह पर फुलाया जाता है. इससे प्लाक धमनी की दीवार की तरफ दबता है और खून के गुजरने का रास्ता चौड़ा हो जाता है.

एंजियोप्लास्टी में छाती को खोलकर ऑपरेशन नहीं किया जाता है. डॉक्टर कलाई, हाथ या कमर की धमनी से एक पतली ट्यूब यानी कैथेटर को अंदर डालते हैं. एक्स-रे की मदद से इसे प्रभावित कोरोनरी आर्टरी तक पहुंचाया जाता है. इसके बाद एक पतली वायर को ब्लॉकेज वाले हिस्से से आगे ले जाया जाता है. इसके बाद कैथेटर के साथ लगे छोटे बैलून को ब्लॉकेज वाली जगह पर फुलाया जाता है. इससे प्लाक धमनी की दीवार की तरफ दबता है और खून के गुजरने का रास्ता चौड़ा हो जाता है.

कई मामलों में एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंट भी लगाया जाता है. यह एक छोटी जालीदार ट्यूब होती है, जो धमनी को खुला रखने में मदद करती है. बैलून के फुलने के साथ स्टेंट फैल जाता है और बाद में धमनी के अंदर ही रहता है. कई आधुनिक स्टेंट ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट होते हैं, जो समय के साथ दवा छोड़कर धमनी के दोबारा ब्लॉक होने का खतरा कम करने में मदद करते हैं.

कई मामलों में एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंट भी लगाया जाता है. यह एक छोटी जालीदार ट्यूब होती है, जो धमनी को खुला रखने में मदद करती है. बैलून के फुलने के साथ स्टेंट फैल जाता है और बाद में धमनी के अंदर ही रहता है. कई आधुनिक स्टेंट ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट होते हैं, जो समय के साथ दवा छोड़कर धमनी के दोबारा ब्लॉक होने का खतरा कम करने में मदद करते हैं.

इन दोनों प्रक्रियाओं को अक्सर एक साथ सुना जाता है, लेकिन इनका काम अलग है. कोरोनरी एंजियोग्राफी एक जांच है, जिससे डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि दिल की धमनियों में कहां और कितनी रुकावट है. वहीं, एंजियोप्लास्टी उस रुकावट को खोलने की प्रक्रिया है. अगर एंजियोग्राफी में जरूरी ब्लॉकेज मिलती है और इलाज सही माना जाता है, तो उसी दौरान एंजियोप्लास्टी भी की जा सकती है.

इन दोनों प्रक्रियाओं को अक्सर एक साथ सुना जाता है, लेकिन इनका काम अलग है. कोरोनरी एंजियोग्राफी एक जांच है, जिससे डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि दिल की धमनियों में कहां और कितनी रुकावट है. वहीं, एंजियोप्लास्टी उस रुकावट को खोलने की प्रक्रिया है. अगर एंजियोग्राफी में जरूरी ब्लॉकेज मिलती है और इलाज सही माना जाता है, तो उसी दौरान एंजियोप्लास्टी भी की जा सकती है.

जब कोरोनरी आर्टरी काफी ब्लॉक हो जाए और दिल तक खून का प्रवाह प्रभावित होने लगे, तब डॉक्टर एंजियोप्लास्टी पर विचार कर सकते हैं. अगर दवाओं से एंजाइना यानी सीने के दर्द को कंट्रोल नहीं किया जा रहा हो, तब भी इसकी जरूरत पड़ सकती है. कुछ हार्ट अटैक की स्थितियों में ब्लॉक हुई धमनी को जल्दी खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी जरूरी उपचार हो सकती है. हालांकि हर ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी जरूरी नहीं होती है. इसका फैसला ब्लॉकेज की जगह और गंभीरता, लक्षण, मरीज की सेहत और हार्ट संबंधी जोखिम को देखकर किया जाता है.

जब कोरोनरी आर्टरी काफी ब्लॉक हो जाए और दिल तक खून का प्रवाह प्रभावित होने लगे, तब डॉक्टर एंजियोप्लास्टी पर विचार कर सकते हैं. अगर दवाओं से एंजाइना यानी सीने के दर्द को कंट्रोल नहीं किया जा रहा हो, तब भी इसकी जरूरत पड़ सकती है. कुछ हार्ट अटैक की स्थितियों में ब्लॉक हुई धमनी को जल्दी खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी जरूरी उपचार हो सकती है. हालांकि हर ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी जरूरी नहीं होती है. इसका फैसला ब्लॉकेज की जगह और गंभीरता, लक्षण, मरीज की सेहत और हार्ट संबंधी जोखिम को देखकर किया जाता है.

एंजियोप्लास्टी आमतौर पर मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है और इसमें लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है. सामान्य प्रक्रिया में करीब 30 मिनट से 2 घंटे तक लग सकते हैं. कुछ मरीजों को उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है, जबकि हार्ट अटैक के बाद इलाज कराने वाले मरीज को ज्यादा समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है. स्टेंट लगने के बाद आमतौर पर एंटीप्लेटलेट दवाएं दी जाती हैं. डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं को बंद नहीं करना चाहिए. साथ ही रिकवरी के दौरान भारी वजन उठाने और ज्यादा मेहनत से कुछ समय बचने की सलाह दी जा सकती है. इसके साथ ही हार्ट-हेल्दी डाइट, फिजिकल एक्टिविटी, धूम्रपान से बचाव और ब्लड प्रेशर, डायबिटीज साथ ही हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखना भी जरूरी  है.

एंजियोप्लास्टी आमतौर पर मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है और इसमें लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है. सामान्य प्रक्रिया में करीब 30 मिनट से 2 घंटे तक लग सकते हैं. कुछ मरीजों को उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है, जबकि हार्ट अटैक के बाद इलाज कराने वाले मरीज को ज्यादा समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है. स्टेंट लगने के बाद आमतौर पर एंटीप्लेटलेट दवाएं दी जाती हैं. डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं को बंद नहीं करना चाहिए. साथ ही रिकवरी के दौरान भारी वजन उठाने और ज्यादा मेहनत से कुछ समय बचने की सलाह दी जा सकती है. इसके साथ ही हार्ट-हेल्दी डाइट, फिजिकल एक्टिविटी, धूम्रपान से बचाव और ब्लड प्रेशर, डायबिटीज साथ ही हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखना भी जरूरी है.

Published at : 18 Aug 2026 09:38 PM (IST)

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