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सर्दियों के लिए इन पांच फसलों की कर लें तैयारी, खूब बरसेगा पैसा


सर्दी का मौसम शुरू होते ही किसानों के लिए नई फसलों की तैयारी का समय भी आ जाता है. इस सीजन को रबी सीजन कहा जाता है और इसकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर के महीने में की जाती है. अगर सही समय पर सही फसल चुनी जाए, तो किसान भाई कम लागत में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसी पांच फसलों के बारे में, जो सर्दियों में किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती हैं. 

अनाज और दलहन वाली मुख्य फसलें

सर्दियों की सबसे प्रमुख फसलों में गेहूं, चना और सरसों का नाम सबसे ऊपर आता है. ये फसलें सर्दी के मौसम में यानी अक्टूबर से मार्च के बीच उगाई जाती हैं. इसके अलावा मसूर और मटर भी इसी मौसम की खास फसलें मानी जाती हैं. इन सभी फसलों की बुवाई अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जाती है, जब मानसून खत्म हो चुका होता है और तापमान गिरना शुरू हो जाता है. सरसों की खासियत यह है कि इसकी खली पशुओं के चारे में इस्तेमाल होती है और इसका तेल भी घर-घर में इस्तेमाल होता है, जिससे किसान को दोहरा फायदा मिलता है. 

अनाज के साथ-साथ सर्दियों में सब्जियों की खेती भी किसानों को अच्छा मुनाफा दे सकती है. इनमें गाजर एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि गाजर की खेती के लिए 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा माना जाता है और इसकी बुवाई अगस्त से अक्टूबर के बीच की जा सकती है, साथ ही नवंबर-दिसंबर में भी इसे बोया जा सकता है. यह फसल बुवाई के करीब 90 से 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके अलावा धनिया, मूली, पालक और मेथी जैसी फसलें भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती हैं, क्योंकि इनमें प्रति एकड़ केवल 10 से 12 हजार रुपये का ही खर्च आता है और ये मात्र 25 से 40 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं, जिससे किसान कम समय में डेढ़ से ढाई लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. 

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फसल चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान

अच्छी कमाई के लिए सिर्फ फसल चुनना ही काफी नहीं है, बल्कि सही तरीके से खेती करना भी उतना ही जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को सिर्फ बाजार के मौजूदा भाव देखकर फसल का चुनाव नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने इलाके की पानी की उपलब्धता, मिट्टी की गुणवत्ता, मौसम की स्थिति और लागत का भी ध्यान रखना चाहिए. इसके अलावा फसल चक्र अपनाना भी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे कीट-बीमारियों का असर कम होता है, खरपतवार की समस्या घटती है और मिट्टी की सेहत भी बेहतर बनी रहती है, जिससे आगे भी अच्छा उत्पादन मिलता रहता है. 

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