अंबिका की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब वह अपने पति के साथ गणतंत्र दिवस की पुलिस परेड देखने पहुंचे थी. उनके पति पुलिस कांस्टेबल थे, परेड के दौरान अंबिका ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को देखा और उनके सम्मान में पुलिसकर्मियों को सलामी देते हुए देखा.

इस नजारे ने उनके मन में आईपीएस अधिकारी बनने की इच्छा पैदा कर दी. उन्होंने अपने पति से कहा कि वह भी ऐसा मुकाम हासिल करना चाहती है जहां लोग उन्हें सम्मान के साथ सलामी दें. उनके पति ने उन्हें समझाया कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं है, इसके लिए सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है और लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है. लेकिन अंबिका ने अपना फैसला नहीं बदला और आईपीएस बनने का टारगेट तय कर लिया.

अंबिका की शादी महज 14 साल की उम्र में हो गई थी. इसके बाद उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारी संभाली और 18 साल की उम्र तक वह दो बच्चों की मां बन गई थी. इस वजह से उनकी स्कूली पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी और उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा. हालांकि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अधूरी रहने को अपने भविष्य की राह में रुकावट नहीं बनने दिया. आईपीएस बनने का लक्ष्य तय करने के बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की.

अंबिका ने डिस्टेंस लर्निंग के जरिए अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाई. उन्होंने पहले कक्षा दसवीं की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद 12वीं की परीक्षा पास की और फिर ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. उनके लिए पढ़ाई दोबारा शुरू करना आसान नहीं था. परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की.

यूपीएससी की तैयारी के दौरान अंबिका असफलताओं का सामना भी करना पड़ा. उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के तीन प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो सकी. इसके बावजूद उन्होंने अपना टारगेट नहीं छोड़ा, तीसरी बार असफल होने के बाद भी अंबिका एक और प्रयास करना चाहते थी. उनके पति ने भी शुरुआत में उन्हें वापस आने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखने का फैसला किया.

वहीं आखिरकार उनका चौथा प्रयास सफल रहा. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू तीनों चरणों को पार किया और ऑल इंडिया रैंक 118 हासिल की. इसके बाद उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ. वहीं साल 2008 की आईपीएस लिस्ट में नाम आने के बाद अंबिका की पहली पोस्टिंग महाराष्ट्र में हुई. पुलिस सेवा में काम करते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई. महाराष्ट्र में सेवा के दौरान उन्हें लेडी सिंघम के नाम से भी जाना गया.

बाद में वह महाराष्ट्र में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर रही. साल 2019 में महाराष्ट्र में डीसीपी के रूप में काम करते हुए, उनका चयन लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर पुरस्कार के लिए भी हुआ.
Published at : 25 Aug 2026 08:40 AM (IST)
