Gold Price Prediction September 2026: सोने की कीमत ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है. कुछ ही कारोबारी सत्रों में आई तेज बढ़त के बाद सोना तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. अब सबसे बड़ा सवाल सितंबर को लेकर है.
क्या तेजी का यह सिलसिला जारी रहेगा या ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली लौट सकती है? बाजार की परिस्थितियां और ग्रहों के संकेत एकतरफा तेजी नहीं, बल्कि तेज उतार-चढ़ाव वाला महीना दिखा रहे हैं.
सोना अभी किस स्तर पर है?
24 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,650 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंचा. यह मई के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था. पिछले सप्ताह ही सोने में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई.
भारत में भी इसका असर साफ दिखा. 24 अगस्त को MCX पर सोना करीब 1,63,870 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था. वहीं, IBJA के अनुसार 999 शुद्धता वाले सोने का सुबह का भाव 1,62,603 रुपये प्रति 10 ग्राम था. शाम का भाव 1,62,154 रुपये रहा. इसमें जीएसटी और ज्वेलरी का मेकिंग चार्ज शामिल नहीं है.
हालांकि 25 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे स्तर से हल्की गिरावट भी दिखी. सोना करीब 0.2 प्रतिशत फिसलकर 4,640 डॉलर के आसपास आ गया. यानी तेजी मजबूत है, लेकिन ऊपरी स्तर पर बाजार में हिचक भी दिखाई देने लगी है.
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अचानक इतनी तेजी क्यों आई?
इस तेजी के पीछे केवल त्योहारों की मांग नहीं है. इसका बड़ा कारण वैश्विक बाजार में डॉलर की कमजोरी है. डॉलर गिरता है तो दूसरी मुद्राओं में सोना तुलनात्मक रूप से सस्ता पड़ता है. इससे उसकी मांग बढ़ सकती है.
अमेरिकी सरकार की लंबी अवधि वाले बॉन्ड की खरीद बढ़ाने की योजना ने भी डॉलर और सरकारी कर्ज को लेकर चिंता बढ़ाई है. इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव और नए प्रतिबंधों की आशंका ने सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की मांग बढ़ाई.
अब बाजार की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के रुख पर है. यदि महंगाई बढ़ी और ब्याज दरें ऊंची रखने के संकेत मिले तो सोने की तेजी को झटका लग सकता है. सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता. इसलिए बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर इसकी चमक कुछ समय के लिए फीकी पड़ सकती है.
भारत में रुपये और डॉलर का भाव भी महत्वपूर्ण रहेगा. अंतरराष्ट्रीय सोना स्थिर रहने पर भी रुपया कमजोर हुआ तो घरेलू कीमत ऊपर जा सकती है.
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सर्राफा विशेषज्ञ क्या देख रहे हैं?
मीडिया और मार्केट रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंकों की मांग, अमेरिकी कर्ज को लेकर चिंता, कमजोर डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव सोने को सहारा दे सकते हैं. उनका मानना है कि 4,700 डॉलर के ऊपर टिकने पर तेजी का अगला रास्ता खुल सकता है.
दूसरी ओर TD Securities का आकलन ज्यादा सावधान करने वाला है. उसके मुताबिक सोना महंगाई से बचाव का माध्यम बना हुआ है, लेकिन ब्याज दरों में बढ़ोतरी इसकी तेजी रोक सकती है. संस्था फिलहाल बहुत ऊंचे लक्ष्य तक तुरंत पहुंचने की उम्मीद को जल्दबाजी मान रही है.
इसका सीधा अर्थ है कि विशेषज्ञों की राय में तेजी का आधार मौजूद है, लेकिन मौजूदा ऊंचाई पर बड़ी गिरावट से ज्यादा पहले मुनाफावसूली और फिर नई दिशा बनने की संभावना देखी जा रही है.
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मेदिनी ज्योतिष क्या संकेत देता है?
मेदिनी ज्योतिष में सोने का संबंध मुख्य रूप से सूर्य और बृहस्पति से देखा जाता है. शुक्र बाजार की मांग, विलासिता और आभूषण कारोबार का संकेत देता है. बुध व्यापार और रोज बदलने वाले भाव से जुड़ा माना जाता है.
भारत की स्वतंत्रता कुंडली में वृषभ लग्न है. इसके दूसरे भाव यानी धन और बाजार मूल्य के स्वामी बुध हैं. सोने के कारक बृहस्पति की भूमिका भी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है.
15 अगस्त 2026 से बने वर्षफल में सिंह लग्न है. लग्न के स्वामी सूर्य हैं और वर्ष कुंडली में बृहस्पति कर्क राशि में उच्च स्थिति में है. यह कीमती धातुओं के भाव को नीचे मजबूत सहारा मिलने का संकेत देता है. लेकिन धन भाव में कन्या राशि का शुक्र और 15 अगस्त से 9 अक्टूबर तक चलने वाली राहु की मुद्दा दशा तस्वीर को अस्थिर बनाती है.
राहु बाजार में अचानक उछाल, अफवाह, डर और तेज मुनाफावसूली से जुड़ा है. इसलिए सितंबर में सोना लगातार सीधी रेखा में बढ़े, ऐसा संकेत नहीं है.
28 अगस्त के चंद्र ग्रहण के बाद शुरुआती सितंबर में बाजार की चाल असामान्य रह सकती है. पहले सप्ताह में ऊंचे स्तर से गिरावट या भाव में तेज बदलाव संभव है. महीने के मध्य तक सूर्य के मजबूत प्रभाव से सोने को फिर सहारा मिल सकता है. 17 सितंबर के आसपास सूर्य के कन्या राशि में जाने के बाद बाजार का जोर तेजी से हटकर आंकड़ों, डॉलर और ब्याज दरों पर आ सकता है.
सितंबर का पूरा संकेत
सितंबर में सोने की बड़ी तेजी पूरी तरह समाप्त होती नहीं दिख रही. फिर भी अगस्त जैसी एकतरफा चाल दोहराना कठिन हो सकता है. महीने की शुरुआत और अंतिम हिस्से में मुनाफावसूली का दबाव बन सकता है, जबकि बीच के दिनों में दोबारा मजबूती दिखाई दे सकती है.
कुल मिलाकर सितंबर का संकेत है, ऊंचे भाव बने रह सकते हैं, लेकिन रास्ते में तेज गिरावट और वापसी दोनों देखने को मिलेंगी. वास्तविक दिशा अमेरिकी महंगाई, फेड का रुख, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक घटनाओं और रुपये की चाल से तय होगी.
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