Headlines

बेल वाली सब्जियां उगाने पर मिलेगी सरकारी मदद


सब्जियों की खेती में अगर थोड़ी सरकारी मदद मिल जाए तो कम जमीन से भी किसान अच्छी कमाई निकाल सकते हैं. खासकर लौकी, तोरी, खीरा, करेला और टिंडा जैसी बेल वाली सब्जियों में किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बेलें अगर जमीन पर फैली रहें तो फल मिट्टी के संपर्क में आने से खराब होने लगते हैं. नमी की वजह से सड़न का खतरा बढ़ता है कीट और रोग भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसका असर सब्जी की क्वालिटी और मंडी में मिलने वाले भाव पर भी पड़ता है.

ऐसी परेशानी से बचने के लिए माॅर्डन मचान यानी सपोर्ट सिस्टम काफी काम आता है. इसमें लोहे के तार, बांस, खंभे और जाली की मदद से बेलों को जमीन से ऊपर चढ़ाया जाता है. हालांकि पूरा ढांचा तैयार करने में शुरुआत में अच्छा खासा खर्च आता है. किसानों की इसी लागत को कम करने के लिए राजस्थान सरकार के उद्यान विभाग ने पहल की है. अब बेल वाली सब्जियां उगाने वाले पात्र किसानों को मचान और ट्रेलिस सिस्टम लगाने पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है.

मचान लगाने पर कितना मिलेगा पैसा?

राजस्थान सरकार की इस योजना के तहत बेल वाली सब्जियों के लिए सपोर्ट सिस्टम तैयार करने पर लागत का 50 फीसदी हिस्सा सरकार सीधे सब्सिडी के तौर पर देती है. इसमें बांस-तार वाला ढांचा यानी ट्रेलिस सिस्टम तैयार करने पर प्रति हेक्टेयर तय की गई यूनिट लागत पर सब्सिडी तय होती है. आमतौर पर प्रति किसान को अधिकतम तय एरिया के लिए यह आर्थिक मदद मिलती है. जिससे किसान पर शुरुआती सेटअप का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता.

यह पैसा किसान के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए भेजा जाता है. जब खेत में मचान लग जाता है तो बेलें जमीन की जगह ऊपर चढ़ती हैं. इससे फलों में फंगस और मिट्टी लगने की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाती है. फल हवा में सीधे और चमकदार तैयार होते हैं, जिन्हें मंडी में बिना किसी झंझट के ए-ग्रेड का सबसे बढ़िया भाव मिल जाता है.

जमीन से ऊपर बेल चढ़ाने का सीधा फायदा

पारंपरिक तरीके से जब किसान जमीन पर बेल फैलाकर खेती करते हैं. तो सिंचाई के पानी और नमी की वजह से 25 से 30 फीसदी फल सड़कर खराब हो जाते हैं. इसके अलावा जमीन पर छिपी होने के चलते कीटनाशकों का छिड़काव भी सही से नहीं हो पाता और तुड़ाई में बहुत ज्यादा मजदूरी लगती है. वहीं जब खेत में तार और बांस का मचान सिस्टम लग जाता है. 

तो धूप और हवा हर पौधे को बराबर मिलती है. इससे पौधों में फूलों और फलों की संख्या में 40 फीसदी तक का भारी इजाफा देखने को मिलता है. इसके साथ ही जमीन पर खाली बची जगह में किसान धनिया, पालक या मेथी जैसी छोटी सब्जियां उगाकर एक्स्ट्रा कमाई भी कर सकते हैं. यानी एक ही खेत और एक ही लागत में किसान को डबल पैदावार और तगड़ा मुनाफा हासिल होता है.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में ही सबसे ज्यादा प्याज क्यों उगता है, यहां की मिट्टी कितनी खास?

कैसे करें योजना में आवेदन? 

अगर आप राजस्थान के किसान हैं और इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं. तो प्रोसेस बेहद काफी आसान है. इसके लिए आपको ऑनलाइन है. आवेदन करने के लिए आपको सबसे पहले राजस्थान सरकार के राज किसान साथी पोर्टल के आधिकारिक लिंक https://rajkisan.rajasthan.gov.in/ पर जाना होगा बता दें इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास खुद के नाम की खेती योग्य जमीन, जमाबंदी की ताजा नकल, जन आधार कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते की पासबुक होनी चाहिए.

बेल वाली सब्जियां उगाने पर मिलेगी सरकारी मदद

जिन किसानों को ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करने में कोई तकनीकी दिक्कत आ रही है वह अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र जाकर भी इस फाॅर्म को ऑनलाइन भरवा सकते हैं. आवेदन के बाद उद्यान विभाग की टीम मौके पर आकर फिजिकल वेरिफिकेशन करती है. वेरिफिकेशन पूरी होने और ढांचा तैयार होने के बाद सब्सिडी की स्वीकृत राशि सीधे किसान के लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है. बता दें योजना पहले आओ-पहले पाओ का सिस्टम चलता है. इसलिए समय रहते आवेदन करने में ही फायदा है.

यह भी पढ़ें: कृषि मशीन पर सब्सिडी चाहिए? आवेदन से पहले जान लें कौन-कौन से कागज लगेंगे



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *