इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिजाब को लेकर देशभर में एक बार फिर बहस तेज हो गई है. मुद्दे पर सियासत भी गर्म है. कोई हिजाब के समर्थन में है तो कोई इसके खिलाफ अपनी दलील दे रहा है. लेकिन इन तमाम राजनीतिक बहसों के बीच हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं की अपनी सोच क्या है? इसे जानने के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम जयपुर के रामगंज इलाके में पहुंची.
रामगंज में उन मुस्लिम महिलाओं से बातचीत की, जो हिजाब पहनती हैं और कामकाजी हैं. यानी रोजाना घर से बाहर निकलती हैं, अपने काम के लिए शहर में घूमती हैं और समाज के अलग-अलग लोगों के बीच रहती हैं. इन महिलाओं ने हिजाब को लेकर अपनी बात खुलकर रखी.
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हिजाब विवाद पर महिलाओं ने क्या कहा?
ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि वे हिजाब अपनी मर्जी से पहनती हैं. उन पर परिवार या समाज की तरफ से इसे थोपा नहीं गया है. उनका कहना है कि हिजाब उनके लिए सिर्फ धार्मिक पहचान का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत पसंद भी है. कई महिलाओं ने कहा कि हिजाब पहनकर उन्हें खुद को ज्यादा सुरक्षित और सहज महसूस होता है.
महिलाओं का कहना है कि धार्मिक मान्यताएं अपनी जगह हैं, लेकिन हिजाब को लेकर बार-बार विवाद खड़ा करना सही नहीं है. उनका आरोप है कि मुसलमानों को टारगेट करने के लिए इस मुद्दे को बार-बार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया जाता है. महिलाओं का कहना है कि हिजाब के नाम पर सियासत करने के बजाय उनकी पसंद और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए.
आखिर हिजाब पहनने को लेकर विवाद क्यों?
इन महिलाओं के मुताबिक, भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत आजादी के तहत जीवन जीने का अधिकार देता है. ऐसे में उनका सवाल है कि जब वे अपनी इच्छा से हिजाब पहन रही हैं और अपने रोजमर्रा के काम कर रही हैं, तो आखिर उनके पहनावे को लेकर इतना विवाद क्यों? जयपुर की इन कामकाजी मुस्लिम महिलाओं की बात साफ है कि हिजाब उनकी पसंद है, इसे सियासत का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.
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