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बॉडी नंबर 1003…तीन दावेदार, दर्दनाक है नेपाल बाढ़ की ये कहानी


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  • शव की डीएनए रिपोर्ट आने में लगभग डेढ़ महीना लगेगा।

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में कुछ दिन पहले आई भयानक बाढ़ अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों की जिंदगियों को अपनी खौफनाफ तेज बहाव में बहाकर ले जा चुकी है. अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है और 4,000 से ज्यादा लोग ऐसे भी हैं, जो अभी तक लापता हैं, जिनके जिंदा होने या मृत होने की पुष्टि तक नहीं हो पाई है और न हीं उनके शव बरामद हुए हैं, लेकिन इस भयानक त्रासदी से मची तबाही के बीच काफी संख्या में लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जिनकी पहचान की पुष्टि के बाद उनके परिजनों को उनके शव सौंप दिए जा रहे हैं, लेकिन इस बीच नेपाल के पोखरा स्थित एक सरकारी अस्पताल में रखे एक शव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

परिवारों के बीच पहचान को लेकर असमंजस की स्थिति

दरअसल, पोखरा स्थित सरकारी अस्पताल में रखे गए बॉडी नंबर 1003 पर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग परिवारों ने अपना दावा किया है. प्रत्येक परिवार को लग रहा है कि इस विनाशकारी बाढ़ के बाद उन्हें अपने लापता परिजन का शव मिल गया है. शव को लेकर दावा करने वाले परिवारों में बर्दिया के हाइड्रोपावर वर्कर गोपल दहित और रुपनदेही के टूरिस्ट गाइड दामोदर बस्याल का परिवार शामिल है. इसके अलावा, एक अन्य परिवार ने भी रविवार (30 अगस्त, 2026) को इस शव पर सबसे पहले अपने दावा किया था.

नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दहित और बस्याल परिवार सोमवार (31 अगस्त) तक शव की पहचान को लेकर असमंजस में फंसे थे, जबकि तीसरे परिवार ने अपना दावा वापस ले लिया है. यह मामला अपनों को खो चुके उन परिवारों और अधिकारियों की उन परेशानियों को दर्शाता है, जिनका सामना वे शवों की पहचान के दौरान कर रहे हैं. बाढ़ की अत्यंत तेज धार में बहकर काफी दूर तक पहुंचे शवों को निकालकर अस्पतालों में लाया जा रहा है, जहां लोग अपने परिजनों की तस्वीरों, शारीरिक बनावट या किसी निजी सामान के जरिए उनकी पहचान कर रहे हैं और पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज में रखा गया बॉडी नंबर 1003 भी इन्हीं शवों में से एक है, जिसकी पहचान के लिए अब डीएनए टेस्टिंग का सहारा लिया जाएगा.

दोनों परिवारों के बीच पहचान को लेकर फंसा पेंच

द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, दहित परिवार के लिए यह तलाश तब शुरू हुई, जब हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने के लिए गोपाल दहित रसुवा गया था और बाढ़ में लापता हो गया. तब उसकी बहन मांजी थारू और अन्य परिवार के लोग बर्दिया से गैडाकोट पहुंचे. वहां उन्हें बरामद किए गए सभी शवों की तस्वीर दिखाई और उन्होंने बॉडी नंबर की पहचान गोपाल के तौर पर की. इसके बाद जब दहित परिवार गोपाल के शव को अपने घर ले जाने की उम्मीद में पोखरा पहुंचे, लेकिन वहां बस्याल परिवार पहले पहुंच गया और शव पर अपना दावा कर दिया. 

बस्याल परिवार ने कहा कि शव की कई शारीरिक निशान उनके लापता हुए परिजन से मेल खाती हैं, जबकि दहित परिवार ने शव के दांत, माथा, होंठ, हाथ, छाती और चेहरे की बनावट की शारीरिक बनावट से मेल खाती है.

डीएनए टेस्टिंग पर सहमत हुए दोनों परिवार

अब दोनों परिवार इस परेशानी के समाधान के लिए शव के डीएनए जांच कराने पर सहमत हुए. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि शव का डीएनए सैंपल पहले ही लिया जा चुका है. हालांकि, डीएनए सैंपल की टेस्टिंग और रिपोर्ट आने एक से डेढ़ महीने का लंबा समय लग सकता है. इसके पीछे यह कारण बताया गया कि नेपाल पुलिस के लैब और नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की लैब में भारी संख्या में डीएनए सैंपलों की जांच की जा रही है. 

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