Headlines

जर्मन पुलिस के रवैये ने जीता भारतीयों का दिल, वीडियो देख कहेंगे वाह


विदेश यात्रा के दौरान किसी देश की खूबसूरती, खान-पान और ऐतिहासिक जगहें तो पर्यटकों का ध्यान खींचती ही हैं, लेकिन कई बार वहां का कोई छोटा-सा अनुभव लंबे समय तक याद रह जाता है. ऐसा ही एक अनुभव पूर्व दिल्ली पुलिस एसीपी राजिंदर पथानिया ने जर्मनी की यात्रा के दौरान महसूस किया. एक सुरक्षा जांच के दौरान भारतीय यात्रियों के सामान की जांच करने वाले पुलिसकर्मियों के व्यवहार ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इस घटना को अपनी यादों में खास जगह दी.

सामान की जांच हुई

जर्मनी में सुरक्षा जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने भारतीय यात्रियों के बैग्स की जांच की. सामान की तलाशी लेना सुरक्षा व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है, लेकिन पथानिया के लिए खास बात तलाशी की प्रक्रिया से ज्यादा उसका तरीका था. जर्मनी पुलिस ने भारतीय यात्रियों के बैग की जांच की, इसके बाद पूरे बैग को खुद ही व्यवस्थित किया और वापस उनकी बस तक पहुंचाया. कई दशकों तक पुलिस सेवा में रहने वाले पथानिया ने इस घटना को केवल एक यात्री के अनुभव के तौर पर नहीं देखा. उनके लिए यह पुलिस और आम नागरिक के बीच व्यवहार तथा पेशेवर रवैये को समझने का अवसर भी था. उन्होंने महसूस किया कि सुरक्षा जांच जैसी औपचारिक प्रक्रिया भी सम्मानजनक तरीके से की जा सकती है.

यह भी पढ़ें: ऑनलाइन Grocery खरीदते हैं? अब हर सामान पर दिखेगी ‘Best Before’ डेट

पुलिस सेवा के बाद भी मिली नई सीख

पथानिया का पुलिस सेवा में लंबा अनुभव रहा है. इसके बावजूद विदेश में हुई यह छोटी-सी घटना उन्हें सोचने पर मजबूर कर गई. उनके मुताबिक, वर्दी केवल अधिकार और कानून लागू करने का प्रतीक नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसके साथ व्यवहार और जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी होती है. यही वजह है कि जर्मन पुलिसकर्मियों के व्यवहार ने उन्हें प्रभावित किया. उन्होंने इस अनुभव को भारत की पुलिस व्यवस्था के संदर्भ में भी देखा और बताया कि विदेश में देखी गई कुछ व्यवस्थाएं व्यक्ति को अपने देश की कार्यप्रणाली पर दोबारा विचार करने का मौका देती हैं.

नागरिक जिम्मेदारी की भी चर्चा

जर्मनी में पथानिया ने केवल पुलिस के काम करने के तरीके पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने वहां सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई और नागरिकों के व्यवहार को भी करीब से देखा. साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थानों को उन्होंने केवल प्रशासन की सफलता नहीं माना, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी से भी जोड़ा. यह पहलू खास इसलिए है क्योंकि किसी भी शहर को साफ रखना केवल सफाई कर्मचारियों या स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होती. लोग सार्वजनिक स्थानों पर किस तरह व्यवहार करते हैं, कचरा कहां डालते हैं और नियमों का कितना पालन करते हैं, इसका सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ता है.

यह भी पढ़ें: Fridge Water Leakage: फ्रिज में बार-बार जमा हो रहा है पानी? मैकेनिक बुलाने से पहले करें ये काम





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *