Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा. व्रत रखने वाले नौकरीपेशा लोगों के सामने इस बार समय को लेकर एक व्यावहारिक सवाल है. सुबह ऑफिस भी पहुंचना है और दिल्ली के पंचांग के अनुसार राहुकाल सुबह 7:36 से 9:10 बजे तक रहेगा. ऐसे में भगवान विष्णु की पूजा राहुकाल से पहले करनी चाहिए या समय न मिलने पर बाद में भी पूजा की जा सकती है?
पंचांग के अनुसार अजा एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे शुरू होकर 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे तक रहेगी. इसलिए व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा. अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन व्रत, विष्णु पूजा, मंत्र-जप और व्रत कथा पढ़ने की परंपरा है.
ऑफिस जाने वाले कब करें अजा एकादशी की पूजा?
दिल्ली और आसपास रहने वाले नौकरीपेशा भक्तों के लिए सुबह 6:10 से 7:16 बजे के बीच पूजा करना सुविधाजनक रहेगा. 7 सितंबर को प्रातः संध्या का समय सुबह 6:10 से 7:16 बजे तक बताया गया है. यह समय राहुकाल शुरू होने से पहले समाप्त हो जाएगा.
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भक्त सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जला सकते हैं. इसके बाद जल, पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करके अजा एकादशी व्रत का संकल्प लें. विष्णु मंत्र का जाप करें और संभव हो तो संक्षिप्त रूप में अजा एकादशी व्रत कथा पढ़ें. इस तरह लगभग 15 से 20 मिनट में सुबह की पूजा पूरी की जा सकती है.
ऑफिस जाने से पहले ऐसे कर लें पूजा:
- सुबह 5:45 से 6:05 बजे तक स्नान और पूजा की तैयारी.
- सुबह 6:10 बजे भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं.
- जल, फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें.
- अजा एकादशी व्रत का संकल्प लें.
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
- सुबह 7:16 बजे से पहले पूजा पूर्ण कर लें.
क्या राहुकाल में भगवान विष्णु की पूजा नहीं कर सकते?
राहुकाल को सामान्यतः नया और मांगलिक कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. विवाह, गृह प्रवेश, नया कारोबार, संपत्ति की खरीद या किसी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत करते समय राहुकाल से बचने की परंपरा है.
लेकिन नित्य पूजा, पहले से चल रहा व्रत, नाम-जप और भगवान का स्मरण बंद नहीं किया जाता. इसलिए किसी कारण से सुबह 7:36 बजे से पहले पूजा नहीं हो पाए तो भक्त केवल राहुकाल के डर से भगवान विष्णु की उपासना न छोड़ें. घर में की जाने वाली नियमित पूजा, मंत्र-जप और व्रत का संकल्प श्रद्धा के साथ किया जा सकता है.
हालांकि परिवार की परंपरा में राहुकाल के दौरान विशेष पूजा न करने का नियम हो तो सुबह 7:36 बजे से पहले पूजा कर लें या राहुकाल समाप्त होने के बाद सुबह 9:10 बजे पूजा करें.
सुबह जल्दी समय न मिले तो क्या करें?
ऑफिस के कारण सुबह विस्तृत पूजा संभव न हो तो भक्त संक्षिप्त पूजा कर सकते हैं. स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं, तुलसी दल और फल अर्पित करें तथा व्रत का संकल्प लें. इसके बाद दिन में समय मिलने पर विष्णु सहस्रनाम, अजा एकादशी की कथा या भगवान विष्णु के मंत्र का पाठ किया जा सकता है.
सुबह घर से निकलने से पहले पूजा का संकल्प करना महत्वपूर्ण है. व्रत कथा और विस्तृत आरती शाम को घर लौटने के बाद भी की जा सकती है. एकादशी तिथि 7 सितंबर को शाम 5:03 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन तिथि समाप्त हो जाने से व्रत उसी समय नहीं खोला जाएगा.
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क्या शाम 5:03 बजे के बाद व्रत खोल सकते हैं?
नहीं, एकादशी तिथि शाम 5:03 बजे समाप्त होने के बावजूद अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर को द्वादशी तिथि में किया जाएगा. एकादशी तिथि समाप्त होना और व्रत का पारण करना दो अलग बातें हैं.
पंचांग के अनुसार एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर किया जाता है. दिल्ली के लिए अजा एकादशी पारण का निर्धारित समय 8 सितंबर की सुबह लगभग 6:02 से 8:33 बजे तक बताया गया है. स्थान बदलने पर सूर्योदय और पारण के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.
शाम की पूजा किस समय करें?
ऑफिस से लौटने के बाद भक्त भगवान विष्णु की सामान्य संध्या आरती कर सकते हैं. यदि संभव हो तो एकादशी तिथि समाप्त होने से पहले यानी शाम 5:03 बजे तक व्रत कथा या विशेष पूजा पूरी कर लें. ऐसा संभव न हो तो तिथि समाप्त होने के बाद भी भगवान का स्मरण, मंत्र-जप और आरती करने में कोई बाधा नहीं है.
रात में जागरण करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है. भक्त अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भजन, मंत्र-जप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं.
अजा एकादशी की पूजा में क्या अर्पित करें?
भगवान विष्णु की पूजा में पीले फूल, फल, चंदन, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित किए जा सकते हैं. धार्मिक परंपरा में भगवान विष्णु के भोग में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है. यदि तुलसी का पौधा घर में है तो एकादशी के दिन पत्ते तोड़ने के बजाय पहले से रखे गए स्वच्छ तुलसी दल का प्रयोग किया जा सकता है.
भोग में फल, मखाना, दूध या व्रत में इस्तेमाल होने वाली सात्विक सामग्री रखी जा सकती है. व्रत की पद्धति परिवार, संप्रदाय और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए फलाहार या निर्जल व्रत का निर्णय अपनी क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए.
अजा एकादशी पर ऑफिस जाने वालों के लिए सीधा जवाब
यदि सुबह ऑफिस जाना है तो 6:10 से 7:16 बजे के बीच पूजा पूरी कर लें. इस समय पूजा संभव न हो तो नियमित विष्णु पूजा छोड़ने की आवश्यकता नहीं है. राहुकाल मुख्य रूप से नए शुभ कार्य आरंभ करने के संदर्भ में देखा जाता है. सुबह संक्षिप्त पूजा करके व्रत का संकल्प लिया जा सकता है और विस्तृत कथा एवं आरती शाम को की जा सकती है.
ध्यान रखें कि दिए गए राहुकाल और पूजा के समय दिल्ली के अनुसार हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय के कारण समय बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा.
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