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खौफनाक मंजर! तिब्बत-नेपाल बॉर्डर पर फ्लैश फ्लड से भारी तबाही के बाद पहला VIDEO


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  • नेपाल में बाढ़ से 1,344 लोगों की मौत, 5,000 लापता।
  • नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ से भारी तबाही हुई है।
  • चीन-नेपाल के दफ्तर, इमारतें अब मलबे में बदल गईं।
  • बाढ़ के 11 दिन बाद भी बचाव कार्य जारी है।

नेपाल में पिछले महीने 26 अगस्त, 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ की वजह से मची तबाही के 11 दिन बीत जाने के बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है. नेपाल पुलिस ने बताया कि इस त्रासदी के कारण देश में अब तक 1,344 की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं.

वहीं, दूसरी तरफ, नेपाल और तिब्बत के बॉर्डर पर बाढ़ से मची तबाही के बाद का पहला दृश्य भी सामने आया है. जहां पहले चीन और नेपाल के अधिकारियों के ऑफिस और इमारतें हुआ करते थे, सैकड़ों लोगों का रोजाना आवागमन होता था, वो स्थान आज पूरी तरह से मची और मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है.

बाढ़ की तबाही में बड़ी-बड़ी इमारतें लापता- अधिकारी

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने नेपाल-तिब्बत के बॉर्डर से भारी तबाही के बाद के दृश्य साझा किए. वीडियो में बाढ़ की वजह से इलाके में फैले मिट्टी और मलबे के ढेर को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. वहीं, एक अधिकारी ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘ये बहुत ही अनोखा स्थान हुआ करता था, लेकिन इस भयानक त्रासदी के बाद आप नहीं बता सकते कि नेपाल और चीन के बीच सीमा कहां है. मैं चीन के सीमा क्षेत्र के भीतर खड़ा हूं, लेकिन इमारतें कहां हैं?’ 

उन्होंने कहा, ‘जिन इमारतों में विस्तृत मुद्दों पर काम होते थे, चीनी अधिकारियों के दफ्तर हुआ करते थे और सैकड़ों की संख्या में लोग इस जगह का इस्तेमाल चीन में प्रवेश करने और यहां से बाहर निकलने के लिए करते थे, लेकिन अब वे सब पूरी तरह से लापता हो गए हैं. मलबे के ढ़ेर में बदल चुके हैं.’

यह त्रासदी लोगों के मन में बुरी याद बनकर रह गई- अधिकारी

अधिकारी ने कहा, ‘बाढ़ की वजह से मची तबाही को साफ तौर पर देखा जा सकता है. यह वही जगह है, जहां से भीषण बाढ़ होते हुए आई थी और इस जगह पर जो भी ढ़ांचे बने थे, उन सब को तबाह कर दिया. निश्चित रूप से नेपाल को बहुत ही ज्यादा नुकसान हुआ है, इसके साथ ही, चीन को भी नुकसान हुआ है.’

उन्होंने कहा, ‘यह नुकसान मामूली नहीं है. 26 अगस्त के बाद से सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी इस इलाके को साफ करने में जुटे हुए हैं, लेकिन काम अभी तक खत्म नहीं हुआ है. दुनिया भर के लोगों की यादों में यह त्रासदी एक बेहद गहरी और बुरी याद बनकर रह गई है, जिन्होंने इस जगह को ताश के पत्तों की तरह ढहते हुए देखा.’ 

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