- रेलवे 20 हजार रुपये, 6% ब्याज सहित चुकाएगा।
ट्रेन को किराए से लेकर सुविधा के मामले में भी एक बेहतर साधन के रूप में देखा जाता है. रोजाना ट्रेन से सफर करने के लिए बड़ी संख्या में यात्री टिकट बुक करते हैं. ऐसे में किसी यात्री के पास कन्फर्म टिकट हो और ट्रेन में सफर के दौरान उसके साथ किसी तरह की लूटपाट हो जाती है तो ऐसे में सवाल उठाता है कि ट्रेन के अंदर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें ट्रेन में सफर कर रहे यात्री के साथ लूटपाट हुई. मामले में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन यानी NCDRC ने रेलवे को यात्रियों को मुआवजा देना का आदेश दिया.
यात्रियों ने मुआवजे की मांग की
इस मामले में यात्रियों ने अपने लूट गए सामान के लिए 59,725 रुपये का दावा किया था, लेकिन उन्होंने आयोग के सामने लूटे गए सामानों की सही कीमत सबूत के तौर पर पेश नहीं की, जिसके चलते आयोग ने इस रकम को मंजूरी नहीं दी. जिसके बाद सभी चीजों को ध्यान में रखकर आयोग ने फैसला सुनाया.
आखिर ट्रेन में लूट कैसे हुई?
दरअसल, एक यात्री अपनी बेटी के साथ ट्रेन में सफर कर रहा था और उस दौरान ही कुछ लुटेरे रिजर्व्ड कोच में घुस गए. यात्रियों के मुताबिक, उनके पास कुछ हथियार भी थे और उन्होंने यात्रियों को लूट लिया. इस मामले पर रेलवे ने अपनी तरफ से कुछ सफाई भी दी.
रेलवे ने क्या कहा?
रेलवे का कहना था कि ये घटना एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और इसके लिए मुआवजे के दावे की सुनवाई Railway Claims Tribunal में होनी चाहिए न कि Consumer Commission में होनी चाहिए. लेकिन रेलवे की इस बात पर NCDRC ने सहमति नहीं जताई.
NCDRC ने क्या कहा?
मामले पर NCDRC ने कहा कि इस मामले की शिकायत का मुद्दा ट्रेन में हुई लूट था और यात्रियों के लिए रिजवर्ड कोच में सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई.
कितना मिला मुआवजा?
मामले पर आयोग ने रेलवे की सेवा पर कमी माना और रेलवे को यात्रियों को 20 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. इतना ही नहीं, बल्कि इस रकम पर 6 प्रतिशत ब्याज भी देने को कहा.
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किस ट्रेन में हुई थी लूट?
जानकारी के मुताबिक, ये घटना अवध-असम एक्सप्रेस की है. इसी ट्रेन में यात्री और उनकी बेटी सफर कर रहे थे, जब अचानक हथियार लेकर लुटेरे ट्रेन में घुस आए और उन्होने लूट को अंजाम दिया. हालांकि, मामला अगस्त 2004 का है. मामले पर यात्रियों का आरोप था कि लूट के दौरान ट्रेन में कोच अटेंडेंट या सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं थे.
रेलवे की क्या-क्या जिम्मेदारी होती है?
- रिजर्व्ड कोच में यात्रियों को उनकी बुक की गई सीट मिलना.
- ऐसे यात्री जिनके पास जनरल या फिर टिकट नहीं है,उन्हें कोच में प्रवेश न करने देना.
- इसके अलावा सफर के दौरान कोच में यात्रियों की और उनके सामान की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था करना जरूरी है.
- वहीं वॉशरूम, पानी,साफ-सफाई और लाइट जैसी सुविधाओं को उपलब्ध करवाना.
- लापरवाही करने पर रेलवे को मुआवजा तक देना पड़ सकता है.
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