दुनिया में बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच भारत शनिवार (12 सितंबर 2026) से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उपयोग आर्थिक विकास को गति देने के लिए कर रहा है. भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के विकास से जुड़ी मुख्य प्राथमिकताओं, विशेष रूप से खाद्य, ऊर्जा और सप्लाई चैन की सुरक्षा की वकालत भी कर रहा है. ब्रिक्स के इस मंच पर दुनिया की बड़ी ताकतों को जमावड़ा लगने वाला है, जहां नए वर्ल्ड ऑर्डर को लेकर भी मंथन होगा.
दिल्ली में महाशक्तियों का जमावाड़ा
चीन ने राष्ट्रपति शी चिनपिंग के भारत आने की पुष्टि कर दी है. सात साल के अंतराल के बाद यह भारत की उनकी पहली यात्रा होगी. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और उनके इंडोनेशियाई समकक्ष प्रबोवो सुबियांतो उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जो दिल्ली में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी उपस्थित रहेंगे.
पहले पुतिन फिर जिनपिंग के साथ पीएम की बैठक
प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन के दौरान कई नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. पीएम मोदी शुक्रवार (11 सितंबर 2026) दोपहर 3:30 बजे को पुतिन के साथ तो शाम 6:15 बजे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार (13 सितंबर 2026) शाम 6 बजे पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होगी. पीएम मोदी-जिनपिंग के बीच बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति की समीक्षा की जाएगी. साथी व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने सहित द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आगे के कदमों पर चर्चा होगी.
जिनपिंग के साथ आएंगें 400 अधिकारी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा, जिसमें करीब 400 अधिकारी शामिल होंगे. ये 2019 में उनके साथ आए अधिकारियों की संख्या से दोगुने से भी अधिक है. भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के महत्व पर बार-बार जोर दिया है. भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच अगस्त 2025 और अगस्त 2026 में बनी सहमति और डब्ल्यूएमसीसी के तहत हुई बातचीत के बाद इस महीने की शुरुआत में एलएसी पर पहली सीनियर मिलिट्री कमांडर लेवल की फ्लैग मीटिंग हुई. यह बैठक 6 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा पर वाचा में और 7 सितंबर को चीनी सीमा पर दामाई में आयोजित की गई थी.
ब्रिक्स के संयुक्त बयान को लेकर चुनौती
नयी दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट के कारण होर्मुज की नाकेबंदी और ट्रंप की टैरिफ नीतियों के प्रभावों का सामना कर रही है. शिखर सम्मेलन में अब केवल दो दिन बचे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि समूह के सदस्य देश किसी संयुक्त बयान पर आम सहमति बना पाए हैं या नहीं, क्योंकि मिडिल ईस्ट संकट को लेकर ईरान और यूएई के बीच मतभेद बने हुए हैं. यह समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है. मु्ख्य रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ.

बेलारूस, बॉलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने थे. ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है क्योंकि यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा हैं.
All set for BRICS 2026!@BricsIndia2026 pic.twitter.com/nXqqoBmoAm
— Narendra Modi (@narendramodi) September 10, 2026
पीएम मोदी ने ब्रिक्स तैयारियों का वीडियो शेयर किया
नई दिल्ली दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह से तैयार है और भारत मंडपम को विश्व नेताओं के स्वागत के लिए सजाया गया है. पीएम मोदी ने गुरुवार को एक वीडियो शेयर किया, जिसमें ब्रिक्स समिट के आयोजन स्थल ‘भारत मंडपम’ की सजावट वाली तस्वीरें और तैयारियों की झलक दिख रही है. प्रधानमंत्री ने करीब 30 सेकंड के इस वीडियो को इंस्टाग्राम, एक्स और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर किया. पीएम मोदी ने इस वीडिया के कैप्शन में लिखा, ‘ब्रिक्स 2026 के लिए पूरी तरह तैयार.’
