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‘मिस्टर सिंह’ एड पर अमेरिका का यू-टर्न, क्या ट्रंप को सता रहा है ये डर?


अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग के उस विज्ञापन पर विवाद बढ़ गया है जिसमें ‘मिस्टर सिंह’ को खुद देश छोड़ने के लिए कहते हुए संदेश लिखा गया है. अधिकार समूहों ने इस विज्ञापन को ‘‘नस्लवादी’’ और ‘‘अमेरिका-विरोधी’’ करार दिया है. गृह सुरक्षा विभाग ने बिना लाइसेंस वाले वाणिज्यिक चालकों के खिलाफ अपने अभियान के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एआई से तैयार तस्वीरों का इस्तेमाल किया.  ये विज्ञापन ऐसे समय में आया है जब मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं. इस विज्ञापन की दुनियाभर में आलोचना हो रही है. निशाने पर आने के बाद  होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इस विज्ञापन को हटा दिया है.

डर से हटाया एड

इस एआई वीडियो में एक सिख को ट्रक चलाते हुए दिखाया गया था. इसे शेयर करते हुए लिखा था, ‘हमारी सड़कों से दफा हो जाओ, ‘मिस्टर सिंह’ आपको वाहन चलाना नहीं आता.’ गुरुवार को ये एड हटा दिया गया है. जिसका भारतीय समुदाय ने स्वागत किया है. मध्यवधि चुनाव की वजह से इस विज्ञापन के मुद्दे को डेमोक्रेटिक पार्टी उठा रही है.

सिख संगठन को आया गुस्सा

सिख संगठन ने कहा, ‘‘अमेरिका में रहने वाले लाखों सिखों का उपनाम ‘सिंह’ है, जिसका अर्थ शेर होता है. हम सिख के रूप में अपनी पहचान जाहिर करने से नहीं डरते-भले ही हमारी अपनी सरकार हमें दुश्मन के रूप में पेश करे.’’ यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब गृह सुरक्षा विभाग अपने ‘सीबीपी होम’ कार्यक्रम के प्रचार अभियान में जुटा है. इस कार्यक्रम के तहत वे प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका से जाने के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं. गृह सुरक्षा विभाग के मुताबिक, स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को यात्रा की व्यवस्था में सहायता के साथ 2,600 अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन राशि भी दी जा सकती है.

एचएएफ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”सिंह हिंदू हैं, वे सिख हैं, वे अमेरिकी हैं और वे गाड़ी चलाते हैं. गृह सुरक्षा विभाग की ओर से की जा रही नस्लीय और भारतीय-विरोधी पहचान के आधार पर निशाना बनाने और उपहास की इस कोशिश के खिलाफ देश को एक साथ खड़े होना चाहिए और आवाज उठानी चाहिए.” एचएएफ ने सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को सलंग्न करते हुए कहा, ”यह एक संघीय एजेंसी की ओर से की गई भेदभावपूर्ण पोस्ट है, जो महज राजनीतिक संदेशबाजी से कहीं आगे की बात है. हम चाहते हैं कि इस मामले की जांच की जाए.” सिख कोएलिशन’ ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ”9/11 के 25 साल बाद भी, सिखों को उनके पहनावे और रूप-रंग के कारण निशाना बनाया जा रहा है.”

किस तरफ है भारतीयों का रुख

चुनाव के समय में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के फैसले उल्टे पड़ सकते हैं. चुनावों में भारतीय-अमेरिकी लोगों का रुझान डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की तरफ है. अमेरिका में रहने वाले एशियाई और प्रशांत द्वीपसमूह मूल के समुदायों के बीच किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि 90 प्रतिशत से अधिक रजिस्टर्ड एशियाई अमेरिकी और एएपीआई मतदाता चुनाव में मतदान करने की योजना बना रहे हैं, हालांकि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से अपेक्षित स्तर पर उनसे संपर्क नहीं किया गया है.

अमेरिकी-भारतीय देने चाहते हैं डेमोक्रेट्स का साथ
सर्वे में शामिल 42 परसेंट एएपीआई वोटर्स ने कहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया. जबकि 58 परसेंट ने कहा है कि रिपब्लिकन पार्टी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया. भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में 66 परसेंट ने कहा कि वे प्रतिनिधि सभी और सीनेट दोनों के चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को देंगे.

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