पटना हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में दायर अपील वाद पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार, पुलिस और जेल प्रशासन पर तीखी टिप्पणी की है. हत्या के मामले में 16 सालों से जेल में बंद आरोपी को निर्दोष पाए जाने पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई. यह मामला समस्तीपुर का है. रंजीत कुमार झा नाम के शख्स को हत्या के आरोप से बरी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सिस्टम की लापरवाही के कारण एक निर्दोष व्यक्ति इतने वर्षों से जेल में सड़ता रहा.
डीजीपी को इस मामले में संलिप्त पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई शुरू करने और इससे कोर्ट को अवगत कराने का भी आदेश दिया गया है. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की.
पुलिस की मिलीभगत से बनाया गया मनगढ़ंत केस- HC
कोर्ट ने जांच एजेंसियों को फटकार लगाते हुए कहा, ”यह पुलिस की घोर लापरवाही और मिलीभगत से बनाया गया मनगढ़ंत केस है. थाना प्रभारी और अनुसंधानकर्ता ने एक निर्दोष नागरिक को फंसाने के लिए शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाया और झूठा केस गढ़ कर एक निर्दोष आदमी को लंबे समय तक जेल में सड़ा दिया.” कोर्ट ने ये भी कहा कि घटनास्थल पर रोशनी का कोई विश्वसनीय स्रोत साबित नहीं हुआ. गवाहों के बयानों में भी गंभीर विरोधाभास थे.
HC ने सरकार और जेल प्रशासन को भी कठघरे में किया खड़ा
इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जेल प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा किया है. अदालत ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में भी काफी लापरवाही बरती गई. इस मामले के आरोपी ने 16 साल वास्तविक हिरासत और छूट सहित 20 साल की सजा पूरी कर ली, फिर भी उसकी समयपूर्व रिहाई का प्रस्ताव 11 महीने तक लंबित रखा गया.
बिहार के DGP को भी दिया कार्रवाई का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बिहार के डीजीपी को भी कार्रवाई का आदेश दिया है. आदेश में कहा गया है कि एक निर्दोष आदमी को फंसाने और इतने दिनों तक उसके जेल में रखे जाने के दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर रिपोर्ट डीजीपी कोर्ट में पेश करें.
रंजीत झा पर क्या लगा था आरोप?
रंजीत झा को हत्या मामले में 302 आईपीसी और आर्म्स एक्ट की धाराओं में दोषी ठहराया गया था. आरोप था कि 5 अक्टूबर 2000 की रात पवन कुमार झा की गोली मारकर हत्या की गई और रंजीत को मौके से भागते देखा गया. ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
कोर्ट के आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप
बहरहाल कोर्ट के आदेश से बिहार पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. अदालत के फैसले से आम आवाम में चर्चा हो रही है कि कैसे पुलिस किसी को फंसाकर उसका जीवन बर्वाद कर देती है. रिहाई से रंजीत झा के परिवार के लोग काफी खुश हैं.
