आज के समय में पशुपालन करना पहले के मुकाबले महंगा हो गया है. पशुओं के लिए चारा और दाना खरीदने से लेकर दवा, शेड और दूसरी जरूरतों पर हर महीने पैसा खर्च होता है. छोटे किसानों और पशुपालकों के पास कई बार इतना पैसा नहीं होता कि वे इन सभी खर्चों को एक साथ संभाल सकें. ऐसे में उन्हें मजबूरी में बाहर से ज्यादा ब्याज पर पैसा उधार लेना पड़ता है.
पशुपालकों की इसी परेशानी को कम करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा को पशुपालन से भी जोड़ा गया है. इसके जरिए पात्र पशुपालक बैंक से अपनी रोजमर्रा की पशुपालन जरूरतों के लिए लोन ले सकते हैं. खास बात यह है कि तय सीमा तक लोन के लिए जमीन या कोई दूसरी कीमती संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती. चलिए आपको बताते हैं कि यह सुविधा कैसे काम करती है और पशुपालकों को इससे क्या फायदा मिल सकता है.
बिना गारंटी मिलता है 2 लाख रुपये तक का लोन
इस सुविधा की सबसे खास बात यह है कि तय नियमों के तहत 2 लाख रुपये तक के कृषि लोन पर बैंक को अलग से कोई संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती. यानी पात्र पशुपालक को छोटी रकम की जरूरत है तो उसे केवल लोन के बदले अपनी जमीन, घर या दूसरी कीमती चीज बैंक के पास गिरवी रखने की चिंता नहीं करनी पड़ती.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि आवेदन करते ही हर पशुपालक को पूरे 2 लाख रुपये मिल जाएंगे. बैंक यह देखता है कि आवेदक किस तरह का पशुपालन कर रहा है. उसके पास कितने पशु हैं और काम चलाने के लिए कितनी रकम की जरूरत है. इसी आधार पर लोन की लिमिट तय की जाती है.
इस पैसे का इस्तेमाल पशुओं के लिए चारा और दाना खरीदने, दवा और देखभाल जैसे रोजमर्रा के जरूरी खर्चों में किया जा सकता है. यानी अगर किसी किसान के पास गाय, भैंस, बकरी या दूसरे पशु हैं और उनके रखरखाव के लिए समय पर पैसे की जरूरत पड़ती है तो यह क्रेडिट सुविधा उसके काम आ सकती है.
ब्याज दर पर सरकार की तरफ से छूट
अक्सर जब किसान बाहर से लोन लेते हैं. तो उन्हें बहुत ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है. लेकिन इस पशु किसान क्रेडिट कार्ड में उन्हें काफी कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है. वैसे तो इस तरह के लोन पर बैंकों की सामान्य ब्याज दर करीब 7 फीसदी होती है. लेकिन अगर किसान समय पर अपने कर्ज की किस्त चुका देते हैं. तो उन्हें सरकार की तरफ से तगड़ी छूट मिल जाती है. समय पर भुगतान करने पर 3 प्रतिशत तक की एक्सट्रा सब्सिडी मिलती है.
जिससे देने वाली ब्याज दर घटकर महज 4 प्रतिशत ही रह जाती है. इतनी कम ब्याज दर पर किसानों को पशुपालम लिए पैसा मिलना उनके आर्थिक बोझ को बहुत हद तक कम कर देता है. इसके जरिए किसान बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने काम को लगातार आगे बढ़ा सकते हैं और समय पर पैसा चुकाकर इस सुविधा का बार-बार फायदा उठा सकते हैं.
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कौन उठा सकता है इस योजना में फायदा?
इस योजना में वह किसान फायदा उठा सकता है जो पशुपालन और मत्स्य पालन इन दोनों में से कोई काम कर रहा है. और इन कामों में लगाने के लिए उसे पैसे चाहिए या फिर वह किसानों जो इन कामों को शुरू करना चाहता है. पशुपालन और मत्स्य पालन दोनों में ही कई कामों को शामिल किया गया है.
- पशुपालन: इसमें सिर्फ दूध देने वाले दुधारू पशु ही नहीं बल्कि पोल्ट्री लेयर फार्मिंग, पोल्ट्री ब्रॉयलर फार्मिंग, भेड़ पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, ऊन के लिए खरगोश पालन, काम करने वाले जानवर और राज्य के हिसाब से किसी भी दूसरे खास पशु पालन के लिए आसानी से कर्ज मिल जाता है.
- मत्स्य पालन: इसमें ताजे पानी की मछली या झींगा पालन ठंडे पानी सहित, खारे पानी में झींगा, मछली या केकड़ा पालन, मछली और झींगा का बीज पालन, ताजे, राकिश और समुद्री पानी में फिश फार्मिंग के अलावा राज्य के हिसाब से मछली पालन की अन्य गतिविधियों के लिए भी बैंक से तगड़ा लोन मिल जाता है.
कैसे करें आवेदन?
आप अपने नजदीकी किसी भी कमर्शियल बैंक या ग्रामीण बैंक में जाकर पशु किसान क्रेडिट कार्ड का फॉर्म भरकर आसानी से आवेदन कर सकते हैं. बैंक अधिकारी दस्तावेजों और पशुओं की टैगिंग की जांच करने के बाद बहुत कम समय में लोन अप्रूव कर देते हैं. इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके कोई भी पशुपालक इस सरकारी योजना का पूरा फायदा उठा सकता है.
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