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EXPLAINED: क्या RLD इस सीट से मोहम्मद शमी को बनाएगी उम्मीदवार? कितने मुस्लिम मतदाता, जानिए सबकुछ


राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के साथ एक तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर के सामने आने के बाद से ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है. नई दिल्ली में हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि शमी या उनके परिवार का कोई सदस्य 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए राजनीति में कदम रख सकता है.

हालांकि, किसी भी पक्ष ने राजनीति में औपचारिक रूप से शामिल होने की पुष्टि करते हुए कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक रणनीतिकार इस मुलाकात को महज एक शिष्टाचार भेंट से कहीं ज्यादा अहम मान रहे हैं.

हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद कयास

जयंत चौधरी की पोस्ट की गई तस्वीर तेजी से न्यूज आउटलेट्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे नई दिल्ली से लेकर शमी के होमटाउन अमरोहा तक जबरदस्त बहस छिड़ गई. यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पार्टियां राज्य विधानसभा चुनावों से पहले वोट बैंक मजबूत करने के लिए प्रभावशाली स्थानीय हस्तियों की तलाश कर रही हैं. चर्चा का केंद्र अमरोहा सदर विधानसभा क्षेत्र है, जो शमी का घरेलू इलाका है. RLD के अब NDA गठबंधन का हिस्सा होने के कारण, शमी जैसे राष्ट्रीय स्पोर्ट्स आइकन को मैदान में उतारने से स्थानीय राजनीतिक समीकरण काफी बदल सकते हैं.

मोहम्मद शमी राजनीति में आने पर क्यों विचार कर सकते हैं
हर किसी के मन में एक ही सवाल है और वो ये कि भारत के बेहतरीन तेज गेंदबाज़ों में से एक, राजनीति के मैदान में उतरने के बारे में क्यों सोचेंगे? आइए इसके पीछे के कुछ कारण जानते हैं.

इंटरनेशनल क्रिकेट में अहम मोड़
शमी एक साल से ज्यादा समय से नेशनल टीम से बाहर हैं. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद, जिसमें उन्होंने रणजी ट्रॉफी, विजय हज़ारे और सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट में कुल 67 विकेट लिए सिलेक्टरों ने बार-बार उन्हें नजरअंदाज़ किया है. जो खिलाड़ी अपने इंटरनेशनल करियर के आखिरी दौर में होते हैं, उनके लिए पब्लिक सर्विस, स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन या राजनीति में आना एक स्वाभाविक रास्ता है. गौतम गंभीर, नवजोत सिंह सिद्धू, कीर्ति आजाद और हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ियों ने पहले ऐसा किया है.

लोकल क्रिकेट मैनेजमेंट से पुरानी निराशा
शमी ने पहले भी उत्तर प्रदेश में स्टेट-लेवल क्रिकेट सिलेक्शन के दौरान शुरुआती संघर्षों के बारे में खुलकर बात की है. उन्होंने बताया था कि कैसे सिस्टम में मौजूद भेदभाव के कारण उन्हें प्रोफेशनल क्रिकेट खेलने के लिए बंगाल जाना पड़ा था. पब्लिक लाइफ में आने से उन्हें वेस्टर्न यूपी में जमीनी स्तर पर खेलों के विकास, क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं के लिए मौकों पर काम करने का मंच मिल सकता है.

पब्लिक लाइफ में आने की संभावना
जब 2026 की शुरुआत में उनसे राजनीति में आने के बारे में पूछा गया, तो शमी ने इससे इनकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि हालांकि क्रिकेट उनकी प्राथमिकता है, लेकिन वे भविष्य के लिए सभी विकल्प खुले रखेंगे. जयंत चौधरी के साथ हुई मुलाकात से संकेत मिलता है कि इन विकल्पों पर अब गंभीरता से विचार किया जा रहा है.

अमरोहा और पश्चिमी यूपी का चुनावी गणित
यह समझने के लिए कि RLD और NDA गठबंधन शमी को क्यों अपने साथ लाना चाहते हैं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल को देखना जरूरी है.

अमरोहा सदर निर्वाचन क्षेत्र की जनसांख्यिकी पर एक नजर डालिए

कुल मतदाता– 3.25 लाख
मुस्लिम मतदाता- 2 लाख
तुर्क समुदाय– 70,000 (शमी का समुदाय)
मौजूदा प्रतिनिधि: समाजवादी पार्टी (महबूब अली – लगातार 5 बार)

RLD और NDA के लिए रणनीतिक फायदे

SP के गढ़ में सेंध लगाना: अमरोहा सदर सीट पर समाजवादी पार्टी के नेता महबूब अली लगातार पांच बार से जीतते आ रहे हैं. शमी की स्थानीय जड़ें, अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रमुख तुर्क समुदाय से जुड़ाव उन्हें एक मज़बूत उम्मीदवार बनाता है, जो पारंपरिक वोट बैंक के समीकरण को बदल सकते हैं.

समुदायों के बीच की खाई को पाटना: एक मुस्लिम स्पोर्ट्स स्टार के तौर पर RLD जो जाट किसानों के मज़बूत समर्थन वाला NDA का सहयोगी दल है, के साथ जुड़ने से, शमी की उम्मीदवारी पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम सामाजिक गठबंधन को बढ़ावा दे सकती है.

परिवार का विकल्प: राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर शमी अपने क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रमों के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ पाते हैं, तो उनके बड़े भाई हसीब अहमद जिनके पहले से स्थानीय राजनीतिक संबंध हैं, उनको शमी के स्टार समर्थन के साथ RLD उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा जा सकता है.



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