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हूतियों के खिलाफ सऊदी ने मांगी मदद, उलझन में ट्रंप, अब क्या करेगा अमेरिका?


ईरान और अमेरिका की जंग में क्षेत्रीय देश जबरन पिस रहे हैं. अगर अमेरिका की मदद करें तो आफत, न करें तो आफत. इधर, हूति विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब की टेंशन बढ़ा रखी है. वहीं, अब सऊदी ने सैन्य मदद की अपील अमेरिकी राष्ट्रपति से की तो इससे ट्रंप काफी उलझन में नजर आ रहे हैं.

हालांकि, एक बार में तबाह करने की धमकी ईरान को ट्रंप कई दफा दे चुके हैं. वहीं, ईरान भी लगातार वॉशिंगटन को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. 

खबर है कि पिछले दो हफ्तों से ट्रंप इस बात को लेकर उलझन में हैं कि क्या सऊदी अरब की अपील को मानकर अमेरिकी सेना को यमन में ईरान समर्थित हूति विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला करने का आदेश दिया जाए या नहीं दिया जाए? मीडिल ईस्ट की जंग में सऊदी ईरान के खिलाफ वॉशिंगटन के साथ ही खड़ा नजर आया है. अगर इस दिशा में ट्रंप किसी तरह का फैसला लेते हैं, तो ईरान के खिलाफ चल रही जंग में एक और मोर्चा खुल सकता है.

दुनियाभर में मची आर्थिक उथल-पुथल

यह जंग ट्रंप ने शुरू तो की थी, लेकिन वह इसे खत्म नहीं कर पाए. जबकि इसके कारण दुनिया भर में आर्थिक उथल-पुथल मची हुई है. राष्ट्रपति कई हफ्तों तक सऊदी अरब की मदद की अपील पर सोच विचार करते रहे. सऊदी अरब हूति विद्रोहियों से लड़ रहा है. इन्होंने मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का फायदा उठाकर इस गर्मी में अरब के साथ एक बार फिर जंग छेड़ दी थी. लेकिन गुरुवार को स्थिति गंभीर हो गई.

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जो देश के असल नेता है, ईरान के खिलाफ जंग में अहम सहयोगी हैं. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन किया और उनसे गुजारिश की कि वे तेजी से आगे बढ़ रहे इस विद्रोही गुट को रोकने में मदद करें. प्रशासन के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. 

इधर, खबरों के मुताबिक, ट्रंप ने एक दिन पहले ही अपने सलाहकारों से मुलाकात की थी. उनसे कहा था कि वे हमलों के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन सऊदी क्राउन प्रिंस से बात करने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया. पेंटागन से हूति विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमलों की तैयारी करने को कहा है. 

रविवार दोपहर को अमेरिकी राष्ट्रपति का फैसला फिर बदलता हुआ दिखा. प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, हूति विद्रोहियों के खिलाफ कोई अमेरिकी हवाई हमला नहीं होगा, कम से कम अभी तो नहीं. व्हाइट हाउस के प्रेस ऑफिस ने ट्रंप की सोच विचार की प्रक्रिया पर आधिकारिक तौर पर बात करने से इनकार कर दिया है. प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने बस इतना कहा है कि सऊदी अरब के साथ अमेरिका का रक्षा समझौता है. हम हमेशा अपने सहयोगियों की रक्षा करेंगे. 

आखिर क्यों ट्रंप नहीं कर रहे हूति विद्रोहियों पर हमला

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति के करीबी लोगों में से ज्यादातर लोग सऊदी अरब की हूति विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने को लेकर या तो बहुत ज्यादा शक में थे, या फिर पूरी तरह से इसके खिलाफ थे. ट्रंप का हूति विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला न करने या कम से कम उसे टालने का फैसला ऐसे वक्त आया है, जब कमांडर टारगेट लिस्ट को मंजूरी दे चुके थे.

सैनिक मिशन के लिए चुने गए अमेरिकी लड़ाकू विमानों में बम लोड कर रहे थे. हमलों का सिलसिला बस शुरू होने ही वाला था. ऑपरेशन की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने यह बात बताई है. एक तरफ क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान राष्ट्रपति ट्रंप की ओर हाथ उठाकर इशारा कर रहे हैं, जबकि दोनों ओवल ऑफिस में एक-दूसरे के बगल में पीली कुर्सियों पर बैठे हैं. मिस्टर ट्रंप ने सऊदी अरब के नेता से ओवल ऑफिस में मुलाकात की थी. क्राउन प्रिंस ने हूति विद्रोहियों को आगे बढ़ने से रोकने की मदद करने का आग्रह किया है.



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