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ब्रिटेन में त्वचा के रंग के आधार पर नागरिकता! पूर्व PM सुनक ने दी चेतावनी


यूके के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक बार फिर रेसिज्म पर बहस छेड़ दी है. उन्होंने देश की नागरिकता हासिल करने के लिए स्कीन के कलर को आधार बनाने और इसका टेस्ट करने को लेकर लेकर चेतावनी दी है. साथ ही अपनी दोहरी पहचान- ब्रिटिश और हिंदू पर जोर दिया है. सुनक ने संडे टाइम्स में लिखे अपने एक कॉलम में इसपर जोर दिया है. साथ लॉर्ड्स में दी अपनी स्पीच का भी जिक्र किया. 

सुनक ने अपने कॉलम में लिखा है कि मुझे चिंता है कि ब्रिटेन की महान लोकतांत्रिक उपलब्धि दबाव में आ रही है. कुछ चुनौतियों का हमें मिलकर सामना करना होगा. उन्होंने अपने कॉलम में जिन चुनौतियों का जिक्र किया है, उनमें इस्लाम से जुड़ी चुनौतियां, इमिग्रेशन को कंट्रोल न कर पाने से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं. 

सबसे बड़ी समस्या स्कीन कलर को राष्ट्रीयता से जोड़ना: सुनक

सुनक ने कहा है कि एक जो सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है, वो स्कीन के कलर को नेशनलिज्म से जोड़ना. या हम ब्रिटेन के लोगों के अलग-अलग वर्ग बना दें. हाल ही में आए लोगों को कभी भी उतने ही ब्रिटिश न मानें जितने कि वे लोग थे, जो 1707 में यहां थे. चाहे वे समाज में कितनी भी अच्छी तरह से घुल मिल गए हों. कितने भी देशभक्त क्यों न हों. 

इसके अलावा उन्होंने टेबिट टेस्ट का भी जिक्र किया. इसे 1990 में टोरी सांसद नॉर्मन टेबिट ने शुरू किया था. उनका मानना था कि अगर प्रवासी इंग्लैड की क्रिकेट टीम की बजाय अपने मूल देश का समर्थन करते हैं, तो यह ब्रिटिश समाज में घुलने मिलने की कमी का प्रतीक है.

सुनक ने आगे कहा कि यह एक ऐसा टेस्ट था, जिसे कोई भी पास नहीं कर सकता था. अगर आप इंग्लैंड का समर्थन करते थे, क्योंकि आप इसे अपना घर मानते थे, तो आप टीम का हिस्सा थे. चाहे आपकी त्वचा का रंग कुछ भी हो. 10 साल की उम्र में मैंने बिना जाने यह टेस्ट पास कर लिया था. 

सुनक ने कहा, ‘साउथम्प्टन में जन्मे होने के कारण मेरे लिए इंग्लैंड, हैम्पशायर और सेंट्स (फुटबॉल टीम) का समर्थन न करना अजीब बात होती, ब्रिटेन में हमने दुनिया का सबसे बहु धार्मिक और बहु जातीय लोकतंत्र बनाया है. मैं उसी का फायदा उठाने वाला व्यक्ति रहा हूं. पीएम के तौर पर मुझसे जो शिकायतें थीं, और उनकी कोई कमी नहीं थी, उनमें न तो मेरी नस्ल और न ही मेरा धर्म शामिल था.’

सुनक ने कहा कि चर्च ऑफ इंग्लैंड के बिशप की नियुक्ति में मेरी भूमिका से कोई नाराज नहीं हुआ. मैं बिना किसी विवाद के राजा  के राज्यभिषेक में पाठ पढ़ सकता था. या अपनी बेटियों के साथ डाउनिंग स्ट्रीट में दिवाली के दीये जला सकता था. 



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