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मसूद पेजेश्कियान की ट्रंप से होगी भेंट? US राष्ट्रपति ने क्या दिया संकेत


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  • दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंधों में यह मुलाकात अहम होगी।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस हफ्ते ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात करने के लिए तैयार हो सकते हैं. दरअसल, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र की महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राज्य न्यूयॉर्क में रहेंगे. इस दौरान दोनों देशों के राष्ट्रपतियों की मुलाकात होने को लेकर संभावनाएं जताई जा रही हैं.

इस संबंध में जब फॉक्स न्यूज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सवाल किया कि क्या वो UNGA के दौरान ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए तैयार हैं? तब उन्होंने इशारों में जवाब दिया कि वह शायद इस हफ्ते न्यूयॉर्क में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात के लिए तैयार हो सकते हैं. उन्होंने यह संकेत ऐसे समय पर दिया है, जब वाशिंगटन ईरान के खिलाफ अपनी अगली सैन्य कार्रवाई की प्लानिंग कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ तेहरान अमेरिका करीब 7 महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए अपनी कई शर्तें सामने रख रहा है.

इसके अलावा, ईरानी सेना ने यह धमकी भी दी है कि अमेरिका की तरफ से किसी भी नए हमले का जवाब इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और हितों पर कार्रवाई के तौर पर दिया जाएगा.

US ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को दी न्यूयॉर्क आने की मंजूरी

न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्च स्तरीय बैठक की मुख्य बहस इस हफ्ते मंगलवार (22 सितंबर) से अगले हफ्ते सोमवार (28 सितंबर) तक होने वाली है और पेजेश्कियान के इसमें शामिल होने की उम्मीद है. ट्रंप प्रशासन ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को इस बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी है, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं. 

अगर दोनों देशों के नेताओं की भेंट इस बैठक के दौरान हो जाती है, तो आगे चलकर दोनों की मुलाकात के लिए अलग से किसी समिट के आयोजन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दोनों देशों के राष्ट्रपति यूएन की बैठक के लिए एक ही शहर में मौजूद होंगे, जिससे आमने-सामने बातचीत करने का मौका मिल सकता है. उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच बातचीत मुख्य रूप से मध्यस्थों के जरिए हो रहा है. 

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