सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि वह तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद पर अंतिम फैसला कब तक करेगा. पार्टी के नाम और चिन्ह ‘जोड़ा फूल और घास’ को फ्रीज किए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह सवाल किया है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 28 सितंबर को होगी.
तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर विवाद है. एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, दूसरे का नेतृत्व पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं. ऋतब्रत गुट का कहना है कि पार्टी की पुराने संगठन का कार्यकाल खत्म हो चुका है. उसे जारी रखना अवैध है.
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश
इस मामले में चुनाव आयोग का अंतिम फैसला आना बाकी है. फिलहाल आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को देखते हुए एक अंतरिम आदेश जारी किया है. इसके तहत दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया. अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और चुनाव चिन्ह के तौर पर ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ आवंटित किया गया है. दूसरी तरफ ऋतब्रत गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया है.
ममता की दलील
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच के सामने ममता बनर्जी की तरफ वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए. उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके खेमे ने जुलाई में ही जवाब दाखिल कर दिया गया था. इसके बावजूद चुनाव आयोग ने मामले को आगे नहीं बढ़ाया. अब चुनाव की घोषणा के बीच अंतरिम आदेश जारी कर दिया.
सिब्बल ने कहा कि वह चुनाव को रोकने की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन आयोग से कहना चाहिए कि वह अक्टूबर में इस मामले का फैसला कर दे. ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले नगर निगम चुनाव समेत दूसरे चुनावों पर इसका असर पड़ेगा.
#WATCH | मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोपों का सच क्या है? पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने क्या बताया सुनिए@MeghaSPrasad | https://t.co/SMm0dUypVm#SIR #ElectionCommissionRow #GyaneshKumar #CEC #AshokLavasa #ABPNews pic.twitter.com/H7YhGg60dx
— ABP News (@ABPNews) September 24, 2026
ऋतब्रत गुट और चुनाव आयोग का जवाब
ऋतब्रत गुट के लिए पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह भी मामले का जल्दी समाधान चाहते हैं, लेकिन इस तरह के मामलों में चुनाव आयोग को दोनों पक्षों के साक्ष्यों को बारीकी से देखना होता है. मामले पर अंतिम फैसला अक्टूबर में ही करने की मांग अव्यावहारिक है. चुनाव आयोग के लिए पेश वरिष्ठ वकील ने भी कहा कि आयोग पूरे मामले पर जल्द निर्णय लेगा, पर इसके लिए 10 दिन या 20 दिन की समय सीमा तय कर देना सही नहीं होगा.
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव में दोनों पक्षों की तरफ से नामांकन भरा गया है. ऐसे में इस चुनाव के लिए एक अंतरिम व्यवस्था तय करना जरूरी था. चुनाव आयोग ने वही किया है. कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले का जल्द निपटारा होना चाहिए. दोनों पक्षों को अपने सबूत पेश करने का उचित मौका मिले, लेकिन मामला अनिश्चित समय तक लंबित भी नहीं रह सकता.
यह भी पढ़ें : धुआं-धुआं कंधार, पाक का अफगानिस्तान पर घातक हमला, 10 जगहों को बनाया टारेगट
