भारत और अमेरिका के बीच एक साल से अधिक समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं. वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उम्मीद जताई है कि यह समझौता कुछ हफ्तों में पूरा हो सकता है.
उनके मुताबिक, बातचीत अब तकनीकी बारीकियों पर केंद्रित है और समझौते की प्रत्येक शर्त की भाषा पर दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है. दोनों देशों के अधिकारियों के हालिया बयानों से लंबे समय से जारी व्यापार गतिरोध दूर होने की उम्मीद बढ़ी है.
ट्रंप बोले- भारत के साथ समझौता करीब
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से भारत के साथ व्यापार समझौते की संभावनाओं के बारे में पूछा गया. इस पर उन्होंने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं. हम समझौता करेंगे. हां, हम काफी करीब हैं.”
ट्रंप ने यह भी कहा कि यह समझौता पहले की अपेक्षा काफी अलग तरह का हो सकता है. हालांकि, उन्होंने इसके स्वरूप या संभावित बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी.
Watch: When asked whether a trade deal with India was close, US President Donald Trump says, “…We’re going to make a deal…It’s going to be a much different kind of a deal…” (Source: White House/YT) https://t.co/MEdQWAZWVC
— IANS (@ians_india) October 20, 2026
भारत में अमेरिकी राजदूत ने भी दिए सकारात्मक संकेत
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा था कि समझौते के बड़े मुद्दों पर काम पूरा हो चुका है. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं.
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष जताया है. उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
इन बयानों से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष लंबे समय से अटके व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए प्रयास तेज कर रहे हैं.
रुबियो बोले- कुछ हफ्तों में हो सकता है समझौता
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नेटवर्क18 के प्रधान संपादक राहुल जोशी को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को कुछ हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है. भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए रुबियो ने भरोसा जताया कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं.
उन्होंने कहा कि समझौते की घोषणा से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसकी प्रत्येक शर्त की भाषा को दोनों पक्ष एक ही अर्थ में समझें और उस पर सहमत हों.
रुबियो ने कहा, “यह समझौता बेहद करीब है. मेरे विचार से अब कुछ तकनीकी बारीकियां हैं, जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है.”
उन्होंने आगे कहा कि तकनीकी विवरण भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच सहमति होना जरूरी है. समझौते में इस्तेमाल की गई भाषा का अर्थ भारत और अमेरिका, दोनों के लिए समान होना चाहिए. उनके मुताबिक, बातचीत अब इसी स्तर पर पहुंच गई है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कर रहे बातचीत
रुबियो ने स्पष्ट किया कि वह खुद सीधे तौर पर व्यापार समझौते पर बातचीत नहीं कर रहे हैं. इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि के पास है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह समझौते की प्रगति पर लगातार नजर रख रहे हैं और इस प्रक्रिया से करीबी तौर पर जुड़े हुए हैं.
उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता महीनों में नहीं, बल्कि कुछ ही हफ्तों में पूरा हो सकता है. इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच अब लंबी बातचीत के बजाय शेष तकनीकी मुद्दों को सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है.
भारत को मिल सकती हैं बेहतर टैरिफ दरें
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत को दूसरे देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ दरें मिल सकती हैं, रुबियो ने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल करना होता है.
उन्होंने कहा, “जाहिर है, समझौता करने का उद्देश्य मौजूदा दरों से बेहतर दरें हासिल करना है.” हालांकि, उन्होंने भारत के लिए प्रस्तावित टैरिफ दरों या किसी विशेष छूट का खुलासा नहीं किया.
दोनों देशों के हितों का ध्यान रखना जरूरी
रुबियो ने कहा कि व्यापार समझौता तभी लंबे समय तक सफल रह सकता है, जब उससे भारत और अमेरिका, दोनों के आर्थिक हित पूरे हों. उन्होंने माना कि भारत सहित हर देश बातचीत के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है.
लेकिन उनके मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच मित्रता, सहयोग और कई साझा हित ऐसे हैं, जो मतभेदों को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि जब दो देश मित्र और सहयोगी हों तथा उनके बीच कई समानताएं हों, तो वे मतभेदों को दूर कर ऐसा समझौता कर सकते हैं, जिससे दोनों को फायदा मिले.
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