CJP कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल राहत मिलने की उम्मीद को झटका लगा है. दोनों की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और शांति व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों कार्यकर्ताओं के वकील को याचिका वापस लेकर एसईएम (कार्यकारी मजिस्ट्रेट) की अदालत में होने वाली सुनवाई का इंतजार करने का सुझाव दिया. इसके बाद दोनों के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
इस मामले में CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने पहले सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली है. उन्होंने दोनों की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट से इसे खत्म करने की अपील की थी.
Delhi High Court must end this illegal arrest.
— Ratna Singh (@whattalawyer) October 21, 2026
हाईकोर्ट ने कहा- आपने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रंका की ओर से दायर याचिका पर बॉन्ड की शर्तों को लेकर सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बॉन्ड का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने पूछा कि क्या बॉन्ड की शर्तों पर जोर देना इतना गैरकानूनी हो सकता है?
अदालत ने यह भी कहा कि डीनोटिफिकेशन के बाद दोनों जंतर-मंतर गए थे. कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि डीनोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उस पर कोई रोक नहीं लगी है. अदालत ने सवाल उठाया कि यदि दूसरी बार बॉन्ड का उल्लंघन हुआ है, तो क्या अधिकारियों को सख्त शर्तें लगाने का अधिकार नहीं है?
