सऊदी अरब के मक्का शहर में पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच बीते 7 अगस्त को जिस मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन हुए थे, उस जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट को अब तुर्किए ने अपने संसद की मंजूरी के लिए पेश किया है. इस घटनाक्रम के बाद पहली बार पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए इस साझा रक्षा समझौते का मसौदा दुनिया के सामने आया है.
पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किए के बीच हस्ताक्षरित साझा डिफेंस पैक्ट की धारा 1 के मुताबिक, तीनों देश एक दूसरे की स्वतंत्रता, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सीमाओं की सुरक्षा करने में मदद करेगी. अगर किसी देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सीमाओं पर कोई खतरा आता है, तो अन्य दो देश हरसंभव साधन का उपयोग करेंगे.
PoK को लेकर हुआ भारत-पाकिस्तान युद्ध, तो नहीं आएंगे सहयोगी
यहां गौर करने वाली बात है कि समझौते में ‘अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सीमाओं’ को धारा 1 में लिखा है और क्योंकि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) और गिलगिट-बाल्टिस्तान अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सीमा के दायरे में नहीं आता है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसे विवादित की श्रेणी में रखती है. ऐसे में माना जा रहा है कि भविष्य में अगर कभी भी भारत-पाकिस्तान के बीच PoK और गिलगिट-बाल्टिस्तान को लेकर युद्ध होता है, तो मक्का रक्षा समझौता उस पर नहीं लागू होगा.
मसौदे में धाराओं में किन-किन शर्तों का जिक्र?
समझौते की धारा 2 में लिखा है कि एक देश पर हमला, बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और बाकी दोनों देश तय करेंगे कि जिस देश पर हमला हुआ है, उसकी कैसे मदद करें. इस मदद में सैन्य सहायता भी शामिल हो सकती है.

धारा 3 के मुताबिक, तीनों देश एक-दूसरे के साथ रक्षा इंडस्ट्री और अन्य रक्षा से जुड़े क्षेत्र में साथ में काम करेंगे. धारा 4 के मुताबिक, अंतराष्ट्रीय विषयों पर तीनों देश साथ मिलकर काम करेंगे. जबकि धारा 5 के मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर तीनों देश एक-दूसरे का सहयोग करेंगे.
समझौते में साझा युद्धाभ्यास और रक्षा क्षेत्र के विकास में मदद की शर्त
वहीं, धारा 6 के मुताबिक, तीनों देश साथ में युद्ध अभ्यास करेंगे और एक दूसरे की रक्षा क्षमताओं को विकसित करने में मदद करेंगे. मक्का जॉइंट रक्षा समझौते की धारा 7 के मुताबिक, तीनों देश रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देंगे और प्रशिक्षित भी करेंगे. साथ ही धारा 8 के मुताबिक, एक रणनीतिक, राजनीतिक और रक्षा समिति बनेगी, जो समझौते के कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करेगी.
खुफिया जानकारी और हथियार साझा करने पर भी सहमति
समझौते की धारा 9 के मुताबिक, तीनों देश एक-दूसरे के साथ खुफिया जानकारियां साझा करेंगे और धारा 10 के मुताबिक, शांतिकाल या फिर युद्ध होने पर किसी देश की आपात स्थितियों में हथियारों, गोला-बारूद, ईंधन, स्पेयर पार्ट्स और अन्य उपकरणों से लॉजिस्टिक सहायता करेंगे. यानी जिस तरह से पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए ने पाकिस्तान की ड्रोन से मदद की थी, ऐसे में भविष्य में भारत के साथ पाकिस्तान के युद्ध के दौरान तुर्किए समझौते के हवाला देकर पाकिस्तान की ड्रोन या फिर अन्य हथियार और गोला बारूद से मदद कर सकता है.
इसके अलावा, मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की धारा 16 के मुताबिक, कोई भी देश 10 साल के बाद समझौते से खुद को अलग कर सकता है और उसे बस 3 महीने पहले बाकी दोनों देशों को इसके बारे में जानकारी देनी होगी.
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