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सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई कब? 22 और 28 अक्टूबर पर टिकी नजरें


दीपके के बाहर आने के बाद अब सबकी निगाहें सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर टिकी हैं. निचली अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है. कानूनी टीम मामले की जल्द सुनवाई की कोशिश में है, लेकिन अब तक रिहाई का नया आदेश पुष्ट नहीं हुआ है.

इस बीच CJP की कुंडली, मौजूदा ग्रह दशा और चंद्र गोचर के तालमेल को देखें तो 22 अक्टूबर और फिर 28 अक्टूबर की दोपहर बाद संगठन के प्रयासों को सकारात्मक सहयोग मिलने के ज्योतिषीय संकेत उभरते हैं.

रिहाई में पेच कहां फंसा है और क्यों बढ़ी मुश्किलें?

दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को दो दिन बढ़ाकर 21 अक्टूबर तक की गई थी. यह मामला केवल सामान्य मुचलका या बॉन्ड भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी और प्रक्रियागत स्तर पर कई पेच फंसे हुए हैं. एक तरफ जहां पहले दिए गए बॉन्ड के कथित उल्लंघन, इलाके में शांति भंग होने की आशंका और पेश किए गए जमानतदारों की स्वीकार्यता पर विवाद बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष ने इन आधारों को चुनौती दी है.

बचाव पक्ष का तर्क है कि बिना किसी निष्पक्ष व स्वतंत्र आकलन के हिरासत बढ़ाई गई है और जमानतदारों को स्वीकार न करने की प्रक्रिया अनुचित है. अब उच्च न्यायालय के सामने इन आपत्तियों और प्रक्रियागत वैधता पर फैसला होना बाकी है, जिससे रिहाई की दिशा तय होगी.

22 अक्टूबर का संकेत क्यों अहम माना जा रहा है?

CJP की कुंडली (16 मई 2026, रात 11:37 बजे, नई दिल्ली) में जन्म का चंद्रमा वृषभ राशि के कृत्तिका नक्षत्र में स्थित है. लाहिड़ी अयनांश के आधार पर 22 अक्टूबर को चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में गोचर करेगा, जो जन्म नक्षत्र कृत्तिका से ‘क्षेम तारा’ बनाता है.

वैदिक ज्योतिष में क्षेम तारा को सुरक्षा, अनुकूलता और संकट टलने का सूचक माना गया है. इसके अलावा जन्म राशि से चंद्रमा का दसवें भाव में गोचर चंद्रबल को भी मजबूती देता है.

यह स्थिति दर्शाती है कि संगठन की कानूनी पैरवी और समर्थन जुटाने की कोशिशों को इस दिन बेहतर अनुकूलता मिल सकती है, जिससे कानूनी बाधाएं दूर होने की राह आसान हो सकती है.

शनि का प्रभाव: राहत के साथ कड़ी प्रक्रिया का दबाव

दशा गणना के अनुसार 18 अक्टूबर के आसपास ‘सूर्य-गुरु-शनि’ का प्रत्यंतर शुरू हुआ है. शनि मकर लग्न का स्वामी होकर तीसरे भाव में बैठा है, जो सीधे तौर पर पराक्रम, संवाद और निरंतर प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है.

इसका अर्थ यह है कि शनि यहां केवल बाधा नहीं डाल रहा, बल्कि हर कानूनी बिंदु पर ठोस तैयारी, जिम्मेदारी और सघन पैरवी की मांग कर रहा है. वहीं, गोचर में कर्क राशि का गुरु सहायता का पक्ष मजबूत करता है.

इन दोनों का संयुक्त प्रभाव यह दिखाता है कि बाहरी सहयोग और राहत की गुंजाइश तो बन रही है, लेकिन पूरी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी किए बिना बात आगे नहीं बढ़ेगी.

28 अक्टूबर को क्या बदलेगा और आगे की राह

गोचर के आधार पर दूसरा अनुकूल समय 28 अक्टूबर को दोपहर लगभग 1:30 बजे के बाद बनता है, जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा. यह कृत्तिका से ‘संपत तारा’ की श्रेणी में आता है और चंद्रमा के अपनी उच्च राशि वृषभ में होने से चंद्रबल भी काफी मजबूत रहेगा.

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह समय संसाधनों और सहयोग को प्रभावी ढंग से जुटाने के लिए मददगार माना जाता है, जबकि इसके उलट 24 अक्टूबर को साधक तारा होने के बावजूद चंद्रमा का शनि से निकट संपर्क संकेतों को मिला-जुला बना देता है.

22 और 28 अक्टूबर मुख्य रूप से संगठन के स्तर पर मिलने वाले समर्थन की ओर इशारा करते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति की रिहाई का अंतिम और प्रामाणिक फैसला केवल उच्च न्यायालय के अगले आदेश पर ही निर्भर करेगा.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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