चीन पर ITBP DG के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुणाचल के मंत्री बालो ने अजीबो-गरीब बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आप एक DIG है तो इस तरह के बयान क्यों देते हैं. खुद को कमजोर क्यों समझते हैं. भारत बहुत मजबूत है. आपने धुरंधर फिल्म तो देखी ही होगी. उसे देखिए तो पता चलेगा कि भारत की खुफिया क्षमताएं कितनी बढ़ गई हैं.
भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के DG शत्रुजीत कपूर ने बयान दिया था कि हम चीन से परंपरागत युद्ध में सामना नहीं कर सकते हैं. वे हमसे काफी आगे है. इसके लिए हमें ड्रोन तकनीक पर काम करना पड़ेगा, जिसकी मदद से हम उनका सामना कर सके.
इसके अलावा उन्होंने कहा था कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है और स्थिति अभी भी जारी है. इस बयान के सामने आने के बाद काफी विवाद भी मच गया था. विपक्षी दल केंद्र सरकार को लगातार घेरने की कोशिश कर रहा था.
#WATCH | Itanagar, Arunachal Pradesh: On ITBP DG’s statement, State Minister (Urban Affairs, Land Management & Civil Aviation), Balo Raja says, “Why make statements like that when you are a DIG? Why perceive yourself as weak? India is very strong. You must have seen the ‘Dhurandhar’ movie; watch it, and you will see how much India’s intelligence capabilities have grown.” (27.10)
— ANI (@ANI) October 28, 2026
ITBP सरकार की नीतियों पर काम करती है
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक ITBP के DG शत्रुजीत कपूर की हालिया टिप्पणी को लेकर उठे सवालों के बीच मामले से संबंधित अधिकारियों ने कहा कि उनका बयान सीमा पर नियमित परिचालन तैयारियों और बलों की तैनाती के संदर्भ में था. इसका किसी विशेष घटना से संबंध नहीं है.सूत्रों के अनुसार, चीन के साथ भारत की सीमा की सुरक्षा करने वाली ITBP सरकार की नीतियों, विभिन्न परिस्थितियों में जारी निर्देशों और स्थापित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुरूप काम करती है.
अरुणाचल प्रदेश को लेकर शत्रुजीत कपूर का बयान
ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान इन कमांडो ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है. उन्होंने बताया कि शौर्य कमांडो को प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनात किया जाएगा. इससे बल की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और उसे एक अलग पहचान मिलेगी. गौरतलब है कि वर्ष 1962 में स्थापित आईटीबीपी भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सुरक्षा करती है.
