Car HUD Technology: ऑटोमोबाइल सेक्टर में इन दिनों सेफ्टी और एडवांस फीचर्स को लेकर कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. पहले जो फीचर्स केवल करोड़ों रुपये की लग्जरी और सुपरकारों में मिलते थे, वे अब बजट सेगमेंट की गाड़ियों में भी आने लगे हैं. ऐसा ही एक बेहद आधुनिक और प्रीमियम फीचर है HUD यानी हेड्स-अप डिस्प्ले टेक्नोलॉजी.
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मारुति सुजुकी से लेकर किआ और हुंडई जैसी कंपनियां अपनी गाड़ियों के टॉप वेरिएंट्स में यह फीचर धड़ल्ले से दे रही हैं. लेकिन आखिर यह HUD टेक्नोलॉजी क्या है, इसे कारों में क्यों दिया जाता है और यह गाड़ी चलाते समय कैसे काम करती है.
क्या है हेड्स-अप डिस्प्ले टेक्नोलॉजी?
हेड्स-अप डिस्प्ले एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है जो कार की जरूरी जानकारियों को सीधे ड्राइवर के ठीक सामने विंडशील्ड पर या एक छोटी पारदर्शी स्क्रीन पर प्रोजेक्ट करता है. इसका नाम हेड्स-अप इसलिए रखा गया है क्योंकि इसे देखने के लिए ड्राइवर को अपना सिर नीचे करने या सड़क से नजर हटाने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती.
ड्राइवर सीधे सामने सड़क को देखते हुए भी गाड़ी की रफ्तार और दिशा की जानकारी पा सकता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह तकनीक मूल रूप से लड़ाकू विमानों के लिए बनाई गई थी, ताकि पायलटों का ध्यान युद्ध के समय न भटके. अब इसी एयरक्राफ्ट तकनीक का इस्तेमाल कारों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जा रहा है.
कार में यह तकनीक कैसे काम करती है?
कारों में मिलने वाली HUD टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से तीन हिस्सों से मिलकर काम करती है- एक कंप्यूटर, एक प्रोजेक्टर और एक रिफ्लेक्टर शीशा. गाड़ी के डैशबोर्ड के अंदर स्टेयरिंग व्हील के ठीक सामने एक छोटा सा हाई-टेक LCD या प्रोजेक्टर छुपा होता है.
जब गाड़ी स्टार्ट होती है और सड़क पर चलती है, तो कार का कंप्यूटर रीयल-टाइम डेटा इस प्रोजेक्टर को भेजता है. प्रोजेक्टर से निकलने वाली रोशनी और इमेज सीधे सामने लगे एक खास रिफ्लेक्टर ग्लास या सीधे विंडशील्ड पर गिरती है. यह शीशा इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि ड्राइवर को वह जानकारी हवा में तैरती हुई यानी एक वर्चुअल इमेज की तरह दिखाई देती है. ड्राइवर को ऐसा महसूस होता है कि स्पीडोमीटर उसकी कार के बोनट से भी 5-6 फीट आगे सड़क पर दिखाई दे रहा है.
स्क्रीन पर ड्राइवर को क्या-क्या दिखाई देता है?
एक बेसिक हेड्स-अप डिस्प्ले स्क्रीन पर मुख्य रूप से गाड़ी की मौजूदा रफ्तार दिखाई देती है. लेकिन आधुनिक गाड़ियों के एडवांस HUD में इसके अलावा भी बहुत कुछ देखने को मिलता है. इसमें टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, फ्यूल इंडिकेटर, गियर पोजीशन और क्रूज कंट्रोल की सेटिंग्स भी नजर आती हैं. कुछ महंगी कारों में तो अगर कोई सुरक्षा चेतावनी हो, तो वह भी लाल रंग से इसी स्क्रीन पर चमकने लगती है.
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सुरक्षा के लिहाज से क्यों है यह बेहद जरूरी?
सामान्य गाड़ियों में स्पीड देखने या मैप चेक करने के लिए ड्राइवर को बार-बार नीचे इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर या साइड में लगी इंफोटेनमेंट स्क्रीन की तरफ देखना पड़ता है. जब गाड़ी 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर हो, तो महज 2 सेकंड के लिए नजर हटने का मतलब है कि गाड़ी बिना देखे करीब 50 मीटर आगे निकल जाती है. HUD टेक्नोलॉजी इसी खतरे को पूरी तरह खत्म कर देती है. चूंकि सारी जरूरी जानकारी ड्राइवर की आंखों के ठीक सामने होती है, इसलिए ड्राइवर की नजरें हर सेकंड सड़क पर बनी रहती हैं, जिससे हादसों की आशंका बेहद कम हो जाती है.
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