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Breast Cancer: जांच में देरी बन रही खतरा! देश में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले, स्टडी में अहम खुलासा


Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर आज के समय में महिलाओं में होने वाली सबसे आम बीमारियों में से एक है. यह तब शुरू होता है जब स्तन की कुछ कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा तेजी से बढ़ने लग जाती हैं और एक गांठ बना लेती हैं. अगर इसे शुरुआती समय में पहचान लिया जाए, तो इसका इलाज काफी हद तक संभव होता है. लेकिन समस्या तब गंभीर हो जाती है, जब यह कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है. इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहा जाता है. इसमें कैंसर की कोशिकाएं खून के जरिए शरीर के अन्य अंगों जैसे हड्डियों, फेफड़ों या लिवर तक पहुंच सकती हैं.

जब तक महिलाएं इसे दिखाने अस्पताल तक पहुंचती हैं, तब तक यह उनके पूरे शरीर में फैल चुका होता है, जिसे डॉक्टर’डी नोवो मेटास्टेटिक डिजीज’ (De Novo Metastatic Disease) कहते हैं. एक बड़ी हॉस्पिटल आधारित स्टडी में यह बात सामने आई है, जो न केवल हमें कैंसर के बारे में बल्कि पूरे भारतीय हेल्थकेयर सिस्टम की स्थिति के बारे में भी बताती है.

क्या है स्टडी?

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री के हॉस्पिटल बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री के 76 हजार ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के डेटा के आधार पर इस रिसर्च को किया गया है. इसमें यह सामने आया कि लगभग 13 प्रतिशत महिलाएं मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 6 प्रतिशत है. इसके अलावा, स्टडी में यह भी पाया गया कि भारत में कई महिलाएं स्टेज 3 या स्टेज 4 पर जाकर ही इलाज करवाती हैं, जिससे इलाज जटिल और महंगा हो जाता है. देर से जांच, जागरूकता की कमी और नियमित स्क्रीनिंग का अभाव इसके बड़े कारण माने गए हैं.

क्या होता है कारण?

इस स्टडी से यह बात स्पष्ट हुई है कि उम्र का मेटास्टेटिक बीमारी से सीधा संबंध नहीं होता और न ही पहले से मौजूद बीमारियां जैसे डायबिटीज या हाइपरटेंशन इसके मुख्य कारण हैं. असली कारण ट्यूमर की प्रकृति होती है. ट्यूमर कितना बड़ा है, कितना आक्रामक है और शरीर में कितनी दूर तक फैल चुका है, यही सब बातें बीमारी की गंभीरता तय करती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

अपोलो एथेना वुमन कैंसर सेंटर की लीड डॉ. गीता कडायप्रथ बताती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर मुख्य रूप से दो तरीकों से फैलता है. पहला, लिम्फ नोड्स के जरिए, जो ब्रेस्ट से होते हुए बगल, गर्दन और छाती तक संक्रमण फैलाते हैं. दूसरा, ब्लडस्ट्रीम के जरिए. ब्रेस्ट में ब्लड वेसल्स का बड़ा नेटवर्क होता है, जो कैंसर कोशिकाओं को हड्डियों, स्पाइन और पेल्विस तक पहुंचा देता है. उन्होंने आगे बताया कि कैंसर का फैलाव उसके प्रकार पर भी निर्भर करता है. हार्मोन सेंसिटिव कैंसर आमतौर पर हड्डियों में तेजी से फैलता है, जबकि ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर ज्यादा आक्रामक होता है और अक्सर दिमाग और फेफड़ों तक फैल सकता है, साथ ही लीवर को भी प्रभावित कर सकता है.

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अस्पताल का चुनाव

स्टडी के इस पहलू ने एक गंभीर तस्वीर सामने रखी है. जिन महिलाओं का इलाज प्राइवेट NGO द्वारा संचालित अस्पतालों में हुआ, उनमें मेटास्टेसिस का खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया. वहीं, सरकारी या पब्लिक कैंसर सेंटर में इलाज कराने वाली महिलाओं में यह खतरा ज्यादा देखा गया. यह अंतर कई कारणों से हो सकता है, जैसे जांच में देरी, सुविधाओं की कमी, लंबी कतारें और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक समय पर पहुंच न होना. यह भारत के हेल्थकेयर सिस्टम की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां समय पर इलाज और जागरूकता की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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