25 जुलाई को छात्रों के आंदोलन के दौरान सीवान में हुई पुलिस फायरिंग और कथित AK-47 गोलीबारी मामले को लेकर कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम शनिवार (01 अगस्त) को सीवान पहुंची. टीम में राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सासाराम के सांसद मनोज राम, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक विक्रम भूरिया, अल्पसंख्यक विभाग के स्टेट चेयरपर्सन हुमेर खान समेत अन्य नेता शामिल रहे.
टीम सबसे पहले शेख मोहल्ला पहुंची, जहां गोलीकांड में घायल छात्र मोहम्मद आरिफ और आकाश यादव से उनके घर पर मुलाकात की. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल जेपी चौक और गांधी मैदान पहुंचा, जहां घटना की जानकारी ली. बाद में टीम ने जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन भी सौंपा.
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‘दोनों छात्र हैं, दोनों इस देश के नौजवान हैं’
घायलों से मुलाकात के बाद राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, “फैक्ट फाइंडिंग टीम के सभी सदस्यों के साथ आज मैं यहां सीवान के इस मोहल्ले में बैठा हूं. हमारे दोनों पीड़ित यहां मौजूद हैं, जिन्हें गोली लगी है. दोनों छात्र हैं, दोनों इस देश के नौजवान हैं. एक तरफ आकाश है और दूसरी तरफ आरिफ है.”
इमरान प्रतापगढ़ी ने दावा किया कि घटना सिर्फ AK-47 तक सीमित नहीं थी. उन्होंने कहा, “मैंने घटना के बारे में सुना था कि सीवान में AK-47 चली, लेकिन सिर्फ AK-47 ही नहीं चली थी. बाकायदा पिस्टल से जानबूझकर इस तरह गोली मारी गई कि जरा सी किस्मत से इन दोनों की जिंदगी बच गई, वरना शायद आज ये दोनों बच्चे हमारे बीच नहीं होते.”
उन्होंने बताया कि एक छात्र के गले में और दूसरे के शरीर के बाईं ओर गोली लगी है. उनके मुताबिक अगर गोली का निशाना थोड़ा भी बदल जाता तो दोनों की जान बचना मुश्किल था.
‘सीवान पुलिस छात्रों का आंदोलन कुचलना चाहती थी’
राज्यसभा सांसद ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “सीवान पुलिस कितनी बर्बरता के साथ छात्रों के इस आंदोलन को कुचलना चाहती थी. मुझे हैरत है कि सीवान के पुलिस अधीक्षक महोदय ने अपनी टीम में किस तरह के बर्बर लोग पाल रखे हैं, जो न सिर्फ AK-47 चलाते हैं बल्कि पिस्टल से सीधे 15-20 साल के नौजवान छात्रों को गोली मारते हैं.”
इमरान प्रतापगढ़ी ने आगे कहा, “पुलिस यह समझ ही नहीं रही थी कि ये छात्र हैं. पुलिस इन्हें अपना दुश्मन मानकर गोली चला रही थी. इससे शर्मनाक किसी राज्य या किसी देश के लिए और क्या हो सकता है कि जो छात्र अपना अधिकार मांगने के लिए, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने के लिए सड़कों पर उतरे, उनके साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार हमारी राज्य की पुलिस ने किया.”
राहुल गांधी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
कांग्रेस सांसद ने कहा कि पूरी रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपी जाएगी. उन्होंने कहा, “आज राहुल गांधी के निर्देश पर और कांग्रेस पार्टी के निर्देश पर हम सभी साथी यहां आए हैं. इन दोनों परिवारों से मिलने के बाद, इनकी हालत देखने के बाद और इनकी आर्थिक स्थिति देखने के बाद यह समझ में आता है कि इस सरकार को गरीबों से कोई लेना-देना नहीं है, छात्रों से कोई लेना-देना नहीं है और युवाओं से भी कोई लेना-देना नहीं है.” उन्होंने कहा कि संसद सत्र शुरू होने पर यह मुद्दा संसद में भी उठाया जाएगा.
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस प्रशासन से जवाब मांगेगी. उन्होंने कहा, “हम लोग अभी प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिलेंगे और उनसे जवाब तलब करेंगे कि आखिर किसके आदेश पर AK-47 चलाई गई. क्या दिल्ली से आदेश था? क्या पटना से आदेश था? किसके आदेश पर सीवान पुलिस के उस अधिकारी, कांस्टेबल या इंस्पेक्टर ने इन दोनों बच्चों को सीधे गोली मारी?” उन्होंने यह भी पूछा कि संबंधित पुलिसकर्मी की पहचान होने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई.
राज्यसभा सांसद ने कहा, “आज जो लोग यहां यह कह रहे हैं कि पुलिस ने AK-47 नहीं चलाई, मैं उनसे कहूंगा कि वे आरिफ और आकाश से मिलकर देखें. इनके गले पर, इनके कंधे पर जो गोलियों के निशान हैं, वे पुलिस की गोलियों के निशान हैं.”
उनके मुताबिक, “अगर जिला प्रशासन वीडियो को झुठलाना चाहता है, तो वह झुठला नहीं पाएगा. वीडियो में साफ दिखाई देता है कि एक पुलिसकर्मी लगातार AK-47 से सीधे लोगों पर फायर कर रहा है. यह हवाई फायरिंग भी नहीं थी, बल्कि सीधे भीड़ पर फायरिंग की जा रही थी.”
SP पर भी उठाए सवाल
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि सिर्फ निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई काफी नहीं होगी. उन्होंने कहा, “सिर्फ हटाने की नहीं, बल्कि उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. विभागीय जांच होनी चाहिए और अगर पुलिस अधीक्षक दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. छोटे-छोटे कांस्टेबलों और निचले अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करके जिले के पुलिस कप्तान बच नहीं सकते.”
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गृह मंत्री और प्रधानमंत्री पर भी साधा निशाना
इमरान प्रतापगढ़ी ने बोले, “उनमें इतनी हिम्मत नहीं है कि छात्रों के सवाल पर देश की संसद का सामना कर सकें. इसलिए न गृह मंत्री वहां आने का साहस जुटा पाए और न ही प्रधानमंत्री.”
घायल छात्रों के परिवारों की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, “सिर्फ आरिफ ही नहीं, आकाश का परिवार भी गरीब है. हम आश्वस्त करते हैं कि अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से दोनों परिवारों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. कल या परसों तक दोनों परिवारों तक यह मदद पहुंच जाएगी.” उन्होंने कहा कि दोनों छात्रों के बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने का भी प्रयास किया जाएगा.
