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सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD का एक्शन, फिर भी क्यों उठ रहे सवाल?


सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद सरकार और एमसीडी ने जर्जर और बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी करने वाले पीजी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी. एमसीडी ने कहा था कि छात्रों की सुरक्षा पहले बाकी सब बाद में है. तत्काल ऐसे पीजी पर कार्रवाई की जाएगी, जिनके पास फायर एनओसी नहीं है या फिर वो एमसीडी के बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी कर पीजी चला रहे हैं. 

एमसीडी द्वारा यह भी कहा गया था कि ऐसे पीजी व बिल्डिंग्स पर तत्काल एक्शन होगा जो जर्जर हालत में हैं, जिसको लेकर एमसीडी ने सेफ्टी ऑडिट यानी सर्वे भी शुरू करने का दावा किया. लेकिन अभी तक एमसीडी का जो भी एक्शन है वो सिर्फ अधिकांश उन बिल्डिंग्स के खिलाफ है, जिनकी शिकायत पहले से एमसीडी में की गई है या फिर उन पर एमसीडी का एक्शन विचाराधीन था. 

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विपक्ष ने उठाए कार्रवाई पर सवाल

इनमें से अधिकांश बिल्डिंग का पीजी से कोई दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि एमसीडी की कार्रवाई महज खानापूर्ति है और कुछ नहीं. क्योंकि कुछ हादसे इसी तरफ इशारा करते हैं. जैसे जुलाई 2024 में राव आईएएस स्टडी सर्किल की बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भर जाने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन स्टूडेंट्स की डूबने से मौत हो गई थी.

इसके बाद छात्र सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया. इस पर एमसीडी और सरकार ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि नियमों की अनदेखी और बिल्डिंग्स बायलॉज को न मानने वाले कोचिंग सेंटर्स पर कार्रवाई होगी, लेकिन आज भी सवाल बरकरार है. क्या हुआ कितने कोचिंग सेंटर सील किए गए? कितने कोचिंग भवनों पर कार्रवाई हुई? जैसे ही मामला शांत हुआ, फिर से नियमों की अनदेखी, बिना फायर एनओसी और बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी करते कई कोचिंग सेंटर चलते नजर आ रहे हैं. 

मालवीय नगर हादसे पर भी कही थी कार्रवाई की बात

इतना ही नहीं 3 जून 2026 को मालवीय नगर के एक होटल में हुए अग्निकांड में 23 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद दिल्ली सरकार और एमसीडी ने पूरी दिल्ली में ऐसे होटल और होम स्टे को चिन्हित कर कार्रवाई की बात कही थी. इसके बाद बिना फायर एनओसी और नियमों की अनदेखी कर चल रहे होटल और होम स्टे बंद होने की कगार पर आ गए थे. 

लोगों ने कार्रवाई के डर से बोर्ड तक हटा दिया था, लेकिन जैसे ही मामला शांत हुआ, फिर से वही होटल और होम स्टे बिना फायर एनओसी और नियमों की अनदेखी करते हुए संचालित होने शुरू हो गए. यही वजह है कि लोग एमसीडी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं.

स्थानीय निवासी ने क्या कहा?

स्थानीय निवासी नरेंद्र मदान का कहना है कि उस समय भी एमसीडी ने ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई की, लेकिन उस समय भी अधिकांश भवन वही थे जिनका होम स्टे और होटल से कोई लेना-देना नहीं था. उस समय सैनिक फार्म हाउस समेत दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण के खिलाफ एक्शन हुआ था, लेकिन वो एक्शन होम स्टे और होटलों पर न के बराबर थे. 

उन्होंने कहा कि दरअसल जब भी कोई हादसा होता है और एमसीडी पर सवाल खड़े होते हैं तो एमसीडी तत्काल उन बिल्डिंग्स पर एक्शन शुरू कर देती है जो उसके पास एक्शन के लिए विचाराधीन होते हैं. ऐसे में एमसीडी की तरफ से ये बताने की कोशिश की जाती है कि एमसीडी अवैध निर्माण और बिना नक्शे के बनी बिल्डिंग्स पर एक्शन शुरू कर दिया है. जबकि उस एक्शन का हादसे से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता. 

एक बार फिर एमसीडी का सेम एक्शन

यही एक्शन एक बार फिर एमसीडी का देखने को मिल रहा है, जहां कार्रवाई जर्जर इमारतों में चल रहे पीजी पर होनी थी. साथ ही उन पीजी पर भी होनी थी जो बिना फायर एनओसी और नियमों की अनदेखी कर चलाए जा रहे हैं, लेकिन एक्शन बिना नक्शा पास कराए गए भवनों और अवैध निर्माण पर हो रहा है. ताकि असल मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके. 

एमसीडी बिना नक्शे के बनी इमारतों, दुकानों को गिराए या सील करे, यह कार्रवाई अच्छी बात है, लेकिन सवाल इस बात का है कि जब कोई हादसा होता है और एमसीडी पर सवाल उठते हैं तभी एमसीडी को अवैध निर्माण और बिना नक्शे के निर्माण ही क्यों याद आते हैं. एमसीडी द्वारा उन भवनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती, जिनसे संबंधित भवनों में हादसे होते हैं. 

सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन पर सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद जिन भवनों पर एक्शन हुआ, उसमे से अधिकांश भवनों का पीजी से कोई लेना-देना नहीं है. एमसीडी का उन भवनों को लेकर कहना है कि इनके पास नक्शा नहीं है, ये अवैध निर्माण हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब ये बिल्डिंग्स बन रही थीं तब एमसीडी के अधिकारी कहां थे और जब कोई हादसा हो जाता है तभी ये इमारतें एमसीडी को क्यों याद आती हैं? 

बता दें दिल्ली सरकार ने मालवीय नगर अग्निकांड के बाद पुरानी बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को बंद कर दिया और नई पॉलिसी लेकर आई. ताकि नियमों को और मजबूत किया जा सके. वहीं छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी दिल्ली सरकार ने हाई पावर्ड कमेटी बनाई है, ताकि सरकार छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Paying Guest Accommodation Regulation and Welfare Bill लाकर पीजी संचालकों पर शिकंजा कसा जा सके. 

सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी की टीम जब पीजी का सर्वे यानी सेफ्टी ऑडिट करने पहुंची तो एबीपी न्यूज की टीम भी मौजूद थी. लेकिन एमसीडी के जेई को पीजी संचालकों ने पेपर देने से मना कर दिया और बिना फायर एनओसी और दस्तावेज के पीजी चलता हुआ पाया गया. सबसे हैरानी की बात ये थी कि संचालकों ने कहा कि नोटिस भेज दो हम जवाब के साथ पेपर दिखा देंगे. 

पीजी में रह रहे छात्रों ने क्या बताया?

वहीं पीजी में रह रहे छात्रों से जब एबीपी न्यूज ने बात की तो उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता था कि फायर एनओसी नहीं है, लेकिन एनओसी नहीं है तो डर लगता है क्या करें कम पैसे में यहां रहना मजबूरी है.” एबीपी न्यूज ने दिल्ली के लोगों और RWA के अध्यक्ष से एमसीडी की कार्रवाई को लेकर बात की तो लोग इतने गुस्से में दिखे कि एमसीडी को भ्रष्ट तक कह डाला.

उन्होंने कहा कि एमसीडी सिर्फ यह देखती है कि पैसा कहां मिलेगा. एक शख्स ने कहा, “मैं कहता हूं मुझे एक साल के लिए एमसीडी दे दें तो आधे पैसे में बेहतर दिल्ली बना कर दिखा दूंगा.” उन्होंने कहा कि हादसे के बाद एमसीडी AI से लिखी स्क्रिप्ट लेकर आती है और दिखाने के लिए कार्रवाई करती है. 

वहीं आवासीय सेक्टरों में कॉमर्शियल एक्टिविटी का भी आरोप लगाते हुए कहा कि पैसे लेकर एमसीडी आंखें बंद कर लेती है. इसीलिए एमसीडी की कार्यशैली पर लोग सवाल उठाते हुए कह रहे हैं कि अगर सही समय पर सही जगह एमसीडी का हथौड़ा चलता तो शायद इस तरह के हादसे रोके जा सकते हैं.

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