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राजस्थान निकाय चुनाव: पार्षदों की बाड़ेबंदी, BJP-कांग्रेस ने कहां भेजा?


राजस्थान में नगर निकायों के पार्षदों का चुनाव हो चुका है. निर्वाचित पार्षद अब अपने निकायों में मेयर-डिप्टी मेयर और चेयरमैन व वाइस चेयरमैन को चुनेंगे. कुल 309 में से 305 नगर निकायों के बोर्ड के लिए नामांकन दाखिल करने की समय सीमा खत्म हो चुकी है. 

ऐसे में अब जोड़ तोड़, खरीद फरोख्त और क्रॉस वोटिंग कराने का खेल शुरू हो चुका है. इससे बचने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने तमाम जगहों पर अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी कर दी है. पार्षदों को सैकड़ों किलोमीटर दूर रिसॉर्ट और होटलों में ठहराया गया है.

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महंगे रिसॉर्ट और हिल स्टेशन पर बीजेपी ने ठहराए पार्षद

बीजेपी ने पार्षदों को हिल स्टेशन, धार्मिक स्थलों और महंगे रिसॉर्ट में ठहराया है तो कांग्रेस ने कई निकायों के पार्षदों को हवाई यात्रा कराते हुए इन्हें कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश भेज दिया है. इस मामले में दोनों ही पार्टियां इतनी सतर्कता बरत रही हैं कि वह पार्षदों को किसी भी जगह दो दिन से ज्यादा रुकने नहीं दे रही हैं.

बाड़ेबंदी के दौरान परिवार के सदस्यों तक से मिलने की इजाजत नहीं है. बाड़ेबंदी को लेकर जमकर सियासत भी हो रही है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही एक-दूसरे पर निशाना साध रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों को ही अपने चुने हुए पार्षदों पर भरोसा नहीं है और क्रॉस वोटिंग का खतरा भी है. 

कांग्रेस सरकार में हुआ था बाड़ेबंदी का खेल

वैसे राजस्थान की सियासत में पार्षदों की बाड़ेबंदी का यह खेल नया नहीं है. यहां निकाय और पंचायत चुनाव में आमतौर पर ऐसा किए जाने की पुरानी परंपरा रही है. कांग्रेस की पिछली सरकार में जब सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच वर्चस्व की जंग चल रही थी, तब भी विधायकों को बिना चुनाव के ही महीने भर तक होटल में ठहराकर रखा गया था. 

यही वजह है कि पार्षदों की बाड़ेबंदी पर यहां किसी को कोई हैरानी नहीं है. बस चर्चा इस बात पर हो रही है कि किस पार्टी ने किस निकाय के पार्षदों को किस जगह पर बाड़ेबंदी के लिए भेजा है. बाड़ेबंदी के दौरान पार्षद किस तरह से मौज-मस्ती कर रहे हैं. उनके खाने का मेन्यू क्या है. बाड़ेबंदी वाली जगह पर किस तरह से पुलिस का पहरा है. 

बाड़ेबंदी के दौरान सामने आईं अलग-अलग तस्वीरें

वैसे पार्षदों को अलग-अलग जगह पर जिन रिसॉर्ट और होटल में ठहराया गया है, वहां से अंदर की कुछ मोबाइल से ली गई तस्वीरें और वीडियो जरूर सामने आ रही है. इन तस्वीरों से साफ तौर पर समझ आता है कि पार्षदों के मनोरंजन का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है. उनके लिए स्विमिंग पूल का इंतजाम है.

इस दौरान पार्षदों को अलग-अलग तरह के व्यंजन परोसे जा रहे हैं. जिसका बर्थडे या शादी की सालगिरह है, उसके लिए वहीं पर पार्टी का इंतजाम किया जा रहा है. कुछ जगहों पर यह भी देखा जा रहा है कि पार्षदों की पार्टी में कुछ पुलिस वाले भी वर्दी में मौजूद हैं.

यानी बाड़ेबंदी के बावजूद बाड़ेबंदी में भी उन पर नजर रखी जा रही है. जोधपुर के बीजेपी पार्षदों को जिस जगह रखा गया है, वहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत खुद भी कुछ देर के लिए पहुंचे हुए थे. उन्होंने पार्षदों के लिए गाना भी गाया.

लग्जरियस बसों से ले जाए जा रहे हैं पार्षद

पार्षदों को एक से दूसरी जगह ले जाने में लग्जरियस बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है. जयपुर में शनिवार को काउंटिंग से पहले ही नगर निगम के अपनी उम्मीदवारों को बीजेपी जिन बसों से ले जा रही थी, ABP News की टीम भी वहां पहुंच गई. हमारी टीम ने Exclusive तौर पर पार्षदों को ले जाने की तस्वीर अपने कैमरे पर कैद की थी. 

कांग्रेस पार्टी ने अजमेर समेत कुछ जगहों के पार्षदों को हवाई यात्रा के जरिए बेंगलुरु समेत कर्नाटक के दूसरे जिलों में भेजा है. कुछ जगहों के पार्षदों को हिमाचल प्रदेश भी भेजे जाने की खबर है. जिन जगहों पर उसे सेंधमारी का ज्यादा खतरा लग रहा है, वहां के पार्षदों को अब तेलंगाना भेजने की भी तैयारी है. यानी उन्हें ऐसे राज्यों में भेजा जा रहा है जहां कांग्रेस का शासन है. 

21 सितंबर को होगा नगरीय निकायों के प्रमुखों का चुनाव

राजस्थान में नगरीय निकायों के प्रमुखों का चुनाव 21 सितंबर को है, जबकि उप प्रमुखों के लिए 22 सितंबर को वोट डाले जाएंगे और नतीजे भी आएंगे. इन पार्षदों को अब 21 सितंबर को सीधे पोलिंग सेंटर पर ही लाए जाने की तैयारी है. अब देखना यह होगा कि बाड़ेबंदी की यह जुगत बीजेपी और कांग्रेस के कितने काम आती है. 

वैसे बाड़ेबंदी के काम में भले ही बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही एक्टिव नजर आ रही हों, लेकिन दोनों एक-दूसरे पर सियासी निशाना साधने में कतई पीछे नहीं है. बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा का कहना है कि बिना चुनाव के अपने विधायकों को महीने भर तक होटल में कैद रखने वाली कांग्रेस को इस पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है. 

बीजेपी विधायक ने क्या कहा?

विधायक गोपाल शर्मा का कहना है कि कांग्रेस के पार्षद पार्टी शासित राज्यों में मौज-मस्ती कर रहे हैं, जबकि बीजेपी के पार्षद चुनाव की थकान को मिटाकर पार्टी को और मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं. दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर और मुख्य प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि बीजेपी जिस तरह से पूरे देश में वोटों की लूट-खसोट कर रही है. 

सत्ता का दुरुपयोग करते हुए पार्षदों के परिवार वालों को डरा धमका कर उन पर बीजेपी के पाले में आने का दबाव बनाया जा रहा है, ऐसे में उन्हें एकजुट रखना जरूरी हो गया है. उनका कहना है कि बीजेपी को सत्ता में होने के बावजूद उसे अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं है इसलिए वह अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी कर रही है. 

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