उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों अंशुल मिश्रा, मोहम्मद शोएब और कपिल रावत को गिरफ्तार किया है. पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के अनुसार यह गिरोह मासूम लोगों को सरकारी योजना और सस्ते लोन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था. आरोपियों के पास से 4 एंड्रॉइड मोबाइल बरामद हुए हैं, जिनमें 200 से अधिक बैंक खातों का डेटा मिला है. इन खातों के विरुद्ध देशभर में 500 से अधिक NCRP शिकायतें दर्ज हैं और 10 करोड़ रूपये से अधिक का फ्रॉड किया है.
सोशल मीडिया के जरिए करते थे ठगी
ज्ञानपुर पुलिस लाइन के सभागार में पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने प्रेसवार्ता कर बड़ा खुलासा किया है. एसपी त्यागी ने कहा कि यह गिरोह पीड़ितों के पासबुक, ATM कार्ड और सिम कार्ड अपने कब्जे में लेकर उन्हें दिल्ली, राजस्थान और लखनऊ जैसे शहरों में सहयोगियों को भेजता था. WhatsApp, Telegram और Instagram के जरिए निवेश और मालवेयर फाइल भेजकर ठगी की जाती थी.
POS मशीन के जरिए कैश निकालते थे
भदोही पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि ठगी की रकम को लखनऊ के एक पेट्रोल पंप की POS मशीन के जरिए कैश कराया जाता था, जहां आरोपी कपिल रावत कार्यरत था. उन्होंने कहा कि इस गिरोह ने अब तक 10 करोड़ से अधिक का फ्रॉड किया है. पीड़ित अमन कुमार बिंद की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस गिरोह को दबोचा.
जनता से सावधानी बरतने की अपील
एसपी ने जनता से अपील की है कि वे अपना बैंक विवरण और सिम कार्ड किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें. उनके मुताबिक ये अपराधी आम लोगों की गलती का फायदा उठाते हैं. फिलहाल इससे निपटने का सिर्फ बचाव ही उपाय है. इसके साथ ही इस तरह की ठगी का शिकार होने पर तुंरत पुलिस या साइबर क्राइम पुलिस टीम से संपर्क करें, देरी से पैसा मिलने की उम्मीद और कम हो जाती है.
