Why Tile Grout Turns Black In Bathroom: घर की सफाई करते समय फर्श की टाइलें तो अक्सर चमक जाती हैं, लेकिन उनके बीच की पतली लाइनें धीरे-धीरे काली पड़ने लगती हैं. शुरुआत में ऐसा लगता है कि शायद वहां मिट्टी या गंदगी ज्यादा जमा हो गई है. इसलिए कई लोग ब्रश या स्क्रबर से उन जगहों को बार-बार रगड़ते हैं. लेकिन अगर टाइलों के बीच की ग्राउट लाइन लगातार काली होती जा रही है, तो इसे सिर्फ गंदगी समझना सही नहीं है. इसके पीछे नमी, फफूंद, साबुन की परत या ग्राउट की खराब हालत जैसी वजहें हो सकती हैं.
टाइल और उसके बीच की जगह एक जैसी नहीं होती. ज्यादातर सिरेमिक या पोर्सिलेन टाइलों की सतह पानी को आसानी से अंदर नहीं जाने देती, लेकिन टाइलों के बीच इस्तेमाल होने वाला सामान्य सीमेंट ग्राउट काफी छिद्रदार होता है. इसमें छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिनके जरिए पानी, धूल और दूसरी चीजें धीरे-धीरे अंदर पहुंच सकती हैं. समय के साथ यही जमा हुआ पदार्थ ग्राउट का रंग बदल देता है.
नमी सबसे बड़ी वजहों में से एक है
बाथरूम जैसे हिस्सों में टाइलों के बीच की लाइनें जल्दी काली पड़ने का सबसे आम कारण लगातार नमी हो सकती है. पानी के छींटे, भाप और गीली सतह ग्राउट के संपर्क में बार-बार आते हैं. अगर ग्राउट पानी को आसानी से सोखता है, तो उसके अंदर नमी बनी रह सकती है. यही नम वातावरण फफूंद और मिल्ड्यू के लिए अनुकूल बन जाता है. अगर काले या गहरे हरे धब्बे खासकर बाथरूम के कोनों, दीवार के निचले हिस्से या ऐसी जगहों पर दिखाई देते हैं जहां हवा का वेंटिलेशन कम है, तो मामला सिर्फ धूल का नहीं हो सकता.
साबुन और शैंपू की परत भी जमती रहती है
बाथरूम में साबुन, शैंपू और दूसरे प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के बाद उनकी बहुत पतली परत टाइलों के बीच रह सकती है. शुरुआत में यह दिखाई नहीं देती, लेकिन लगातार जमा होने के बाद यह धूल और गंदगी को अपनी तरफ खींचने लगती है. नतीजा यह होता है कि ग्राउट लाइन बाकी फर्श की तुलना में जल्दी गहरी और गंदी दिखने लगती है.
ग्राउट की क्वालिटी भी मायने रखती है
अगर टाइलों के बीच सामान्य सीमेंट आधारित ग्राउट इस्तेमाल हुई है, तो उसमें पानी सोखने की क्षमता अधिक हो सकती है. समय के साथ यह दाग पकड़ सकती है और नमी के कारण कमजोर भी हो सकती है. कुछ मामलों में ग्राउट में हल्की दरारें या सिकुड़न भी दिखाई देने लगती है, जिससे पानी के अंदर जाने की संभावना और बढ़ जाती है. यही कारण है कि सिर्फ अच्छी क्वालिटी की टाइल या टाइल चिपकाने वाले मटेरियल का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है. टाइलों के बीच की ग्राउट भी ऐसी होनी चाहिए जो नमी और रोजमर्रा की गंदगी का सामना कर सके.

हर काली लाइन सिर्फ गंदगी नहीं होती
फर्श पर काली पड़ चुकी ग्राउट लाइन देखकर तुरंत यह मान लेना आसान है कि उसे और जोर से रगड़ने की जरूरत है. लेकिन ऐसा करना हमेशा सही तरीका नहीं है. अगर गंदगी ग्राउट के अंदर तक पहुंच चुकी है, तो सामान्य पोछे या सतह पर की गई हल्की सफाई से वह पूरी तरह नहीं निकलती. बार-बार डिटर्जेंट वाले पानी से पोछा लगाने पर भी समस्या बनी रह सकती है. दरअसल, पोछा टाइल की ऊपरी सतह को तो साफ कर देता है, लेकिन ग्राउट के छोटे छिद्रों के अंदर जमा पदार्थ को बाहर निकालना मुश्किल होता है. कई बार सफाई के दौरान गंदगी और नमी ग्राउट के अंदर ही चली जाती है.
सफाई के बाद ग्राउट की सुरक्षा भी जरूरी है
अगर ग्राउट की गहराई तक जमा गंदगी और नमी को ठीक से हटाया जाए, तो उसके बाद उसे दोबारा सुरक्षित करना भी जरूरी है. ग्राउट को सील करने से पानी, तेल और गंदगी के अंदर जाने की संभावना कम हो जाती है. इससे आगे चलकर टाइलों के बीच की लाइनें जल्दी गंदी नहीं होतीं और रोज की सफाई भी ज्यादा असरदार रहती है. बहुत ज्यादा नमी वाली जगहों में पानी को रोकने वाली और दाग से बचाने वाली ग्राउट ज्यादा उपयोगी हो सकती है. ऐसी ग्राउट टाइलों के बीच के जोड़ को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ नमी के असर को भी कम करने में मदद करती है.
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फर्श को साफ रखने के लिए कुछ आदतें भी काम आती हैं
बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद फर्श और दीवारों पर जमा पानी को जल्द से जल्द सुखाने की कोशिश करें. जहां संभव हो, कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें ताकि नमी लंबे समय तक बनी न रहे. सफाई के लिए बहुत तेज केमिकल या लगातार कठोर स्क्रबर का इस्तेमाल करने से भी बचें, क्योंकि इससे ग्राउट की सतह खराब हो सकती है. अगर टाइलों के बीच की लाइनें सिर्फ ऊपर से गंदी हैं, तो अच्छी तरह सफाई से फर्क पड़ सकता है. लेकिन अगर ग्राउट लगातार काली हो रही है, उसमें फफूंद के निशान हैं, दरारें आ गई हैं या सफाई के बाद भी रंग वापस नहीं आता, तो सिर्फ रगड़ने के बजाय इसकी असली वजह पर ध्यान देना जरूरी है.
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