भारत में दो दिवसीय ब्रिक्स समिट का आज आखिरी दिन है. इस समिट में दुनिया के कई बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए. समिट के दौरान भारत ने अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने पर जोर दिया. पीएम मोदी ने कई बड़े नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी की. इन बैठकों में आर्थिक रिश्तों, सहयोग और आपसी हितों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई. समिट के अंत में साझा घोषणापत्र भी जारि किया गया. जिसमें कई मुद्दों का जिक्र किया गया है.
ब्रिक्स समिट की हर कोई तारीफ कर रहा है. सरकार से लेकर विपक्ष तक हर कोई पीएम मोदी की तारीफ कर रहा है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने पीएम मोदी को बधाई दी.
ब्रिक्स में भारत आज ब्राइट स्पॉट
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से उठाए गए सवालों पर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ब्रिक्स में भारत की स्थिति कमजोर हुई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज ब्रिक्स में एक चमकता सितारा बनकर उभरा है. उन्होंने कहा, आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट जारी की और भारत की ग्रोथ के बारे में एक बहुत जरूरी बात कही है. आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की तारीफ की है और सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड और दूसरे एरिया में भारत की तरक्की को माना है.
सलमान खुर्शीद ने की तारीफ
कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी. खुर्शीद ने कहा कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें अलग-अलग देश साझा मुद्दों पर एक साथ आ सकें. उनके मुताबिक आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर वैश्विक स्तर पर सहमति बनाने की जरूरत है.
मायावती ने की मोदी सरकार की तारीफ
बसपा की अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि करार देते हुए रविवार को कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की इच्छा भी उम्मीद जगाने वाली है. रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के कारण बढ़े तनाव तथा शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे ब्रिक्स देशों द्वारा अपने 18वें शिखर सम्मेलन में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से जारी किया जाना आपसी सूझबूझ और कूटनीतिक उपलब्धि से कम नहीं है.
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