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Cheapest Oil India: दुनिया का कौन-सा देश भारत को बेचता है सबसे सस्ता तेल? समझ लें पूरा हिसाब-किताब


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  • रूस भारत का सबसे सस्ता और बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
  • भारत वेनेजुएला और ईरान जैसे नए कम लागत वाले स्रोतों की तलाश में है।
  • रूस से तेल की कीमत अन्य देशों की तुलना में काफी कम है।
  • लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत भी तेल की कुल लागत को प्रभावित करती है।

Cheapest Oil India: बढ़ते वैश्विक तनाव और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की कच्चे तेल की खरीद की रणनीति पहले से काफी ज्यादा जरूरी हो गई है. आपूर्ति में रुकावट और प्रतिबंध की वजह से वैश्विक व्यापार मार्ग बदल रहे हैं. ऐसे में भारत कई देशों से सक्रिय रूप से तेल इंपोर्ट कर रहा है. आइए जानते हैं कि वह कौन सा देश है जो सबसे सस्ते स्रोत के मामले में सबसे आगे है.

भारत का सबसे किफायती तेल आपूर्तिकर्ता

फिलहाल रूस भारत का कच्चे तेल का सबसे बड़ा और सबसे सस्ता आपूर्तिकर्ता है. भारत रूस से लगभग $94 प्रति बैरल की दर से तेल आयात कर रहा है. यह बाकी वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में काफी कम है. भारत के कुल इंपोर्ट में रूस की  हिस्सेदारी 31% से 41% के बीच रही है. 

हालांकि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने शुरू में प्रति बैरल 35 डॉलर तक की भारी छूट की पेशकश की थी. हालांकि भू राजनीतिक दबाव और प्रतिबंध की वजह से अब यह छूट घटकर सिर्फ $2 से $3 प्रति बैरल रह गई है.

वेनेजुएला और ईरान 

भारत वेनेजुएला और ईरान जैसे नए कम लागत वाले विकल्पों की तलाश कर रहा है. अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद वेनेजुएला एक आपूर्तिकर्ता के रूप में फिर से उभरा है. इसी तरह ईरान ने लगभग 7 सालों के बाद भारत को तेल की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी है. 

पारंपरिक आपूर्तिकर्ता 

रियायती तेल स्रोतों के अलावा भारत अमेरिका, सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से भी तेल इंपोर्ट करना जारी रखे हुए है.  इनमें से अमेरिका सबसे महंगा आपूर्तिकर्ता है. सऊदी अरब, इराक और यूएई अपनी विश्वसनीयता की वजह से प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं. लेकिन रूस के तुलना में उनकी कीमत आमतौर पर ज्यादा होती है. 

लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत 

कुल लागत में परिवहन की भूमिका काफी ज्यादा जरूरी होती है. सऊदी अरब से तेल भारत तक पहुंचने में सिर्फ तीन दिन लगते हैं. इसी के साथ इसकी माल ढुलाई लागत भी कम होती है. इस वजह से आधार कीमत ज्यादा होने के बावजूद यह एक ठीक-ठाक विकल्प बन जाता है. इसकी तुलना में रूसी तेल को पहुंचने में लगभग 15 दिन लगते हैं. इसी के साथ यूएसए से आने वाली खेप को 45 से 50 दिन लग सकते हैं.

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