Rythu Bandhu Scheme: देश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत को कम करने के लिए केंद्र सरकार और अलग-अलग राज्यों में सरकार कई योजनाएं चल रही है. इन्हीं में से एक तेलंगाना सरकार की रायथु बंधु योजना भी है, जिसे किसानों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जाता है. खेती की शुरुआत से पहले ही आर्थिक मदद मिलने से किसान बीज खाद और दूसरी चीजें समय पर खरीद पाते हैं. जिससे उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि रायथु बंधु योजना है क्या और किन किसानों को इसका लाभ मिलता है?
क्या है रायथु बंधु योजना?
रायथु बंधु योजना की शुरुआत 2018 में तेलंगाना सरकार ने की थी, इसे किसान निवेश सहायता योजना भी कहा जाता है. इस योजना के तहत राज्य सरकार किसानों को हर फसल सीजन चाहे वह रबी हो या खरीफ का, सीजन पहले प्रति एकड़ 5000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है. यानी साल में दो बार यह राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना की खास बात यह है कि यह किसी तरह का कर्ज नहीं है, बल्कि पूरी तरह अनुदान है. किसानों को इस पैसे को लौटाने की जरूरत नहीं होती है. यह राशि सीधे डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में जाती है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और तेज बनी रहती है.
किसानों को क्या-क्या मिलता है फायदा?
इस योजना के जरिए किसानों को खेती करने से पहले ही पैसा मिल जाता है. इससे वह बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी जैसी जरूरत को समय पर पूरा कर सकते हैं. समय पर निवेश होने से फसल की बुवाई में देरी नहीं होती और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ती है. इसके अलावा इस योजना से किसानों को साहूकारों या महंगे कर्ज पर निर्भर रहने की जरूरत कम पड़ती है. सीधे खाते में पैसा आने से बीच के किसी भी बिचौलिये की भूमिका भी खत्म हो जाती है.
कौन से किसान ले सकते हैं इस योजना का लाभ?
रायथु बंधु योजना का लाभ सिर्फ तेलंगाना के उन किसानों को मिलता है, जिनके नाम पर खेती की जमीन दर्ज है. इसके लिए किसान के नाम सरकारी भूमि रिकॉर्ड में होना जरूरी है. साथ ही जमीन खेती योग्य होनी चाहिए और उस पर खेती की जा रही हो. वहीं बटाईदार किसान शेयरक्रॉपर और कृषि मजदूर इस योजना के दायरे में नहीं आते. यानी जिन किसानों के नाम पर जमीन नहीं है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता है.
कैसे किया जाता है आवेदन?
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे आधार कार्ड, बैंक खाता डिटेल, जमीन से जुड़े कागजात और पट्टेदार पासबुक तैयार रखनी होती है. आवेदन ऑनलाइन पोर्टल या स्थानीय राजस्व कार्यालय के माध्यम से किया जा सकता है. आवेदन के बाद संबंधित विभाग की ओर से जानकारी का वेरिफिकेशन किया जाता है और सब कुछ सही पाए जाने पर राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
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