मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तमिलनाडु विधानसभा में एसआईआर के असर को नकारा है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु चुनाव में टीवीके की जीत या डीएमके की हार के लिए एसआईआर जिम्मेदार नहीं था. चिदंबरम ने कहा, ‘वोटर्स को नाम हटाना गलत है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसका असर चुनाव रिजल्ट पड़ा है.’
पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने वोटर्स का नाम हटा दिया. ये गलत है, उन नामों को शामिल किया जाना चाहिए था, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता कि TVK की जीत और DMK की हार सिर्फ इसी वजह से हुई. विपक्षी पार्टी को वोट में हेरफेर के पैमाने के बारे में अपने दावों को साबित करना होगा.’ उन्होंने ये बात तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कहा. हालांकि चिदंबरम ने ये भी कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा वोट चोरी और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिवगंगा जिले के कराईकुडी में विरोध प्रदर्शन किया.
दोबारा चुनाव कराने को लेकर बोले चिदंबरम
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उस पुरानी मांग को भी दोहराया, जिसमें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, FIR दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की बात कही गई थी. नए सिरे से चुनाव कराने की संभावना को भी खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान पूरे हो चुके चुनावों के लिए दोबारा चुनाव कराने की इजाजत नहीं देता.
उन्होंने स्थिति को सुधारने के लिए कुछ मुख्य मांगें रखीं. पहला- दूसरे राज्यों में SIR को तुरंत रोकें. दूसरा- 20 राज्यों (खासकर बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल) में कथित तौर पर हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नामों को फिर से सूची में शामिल करना. तीसरा- सालाना रिविजन के सामान्य नियमों को फिर से लागू करना.
SIR को तुरंत रोकना जाना चाहिए: चिदंबरम
पी चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘लोगों में चुनाव आयोग के प्रति काफी गुस्सा है. वोटर लिस्ट से 13,30,00,000 लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. पश्चिम बंगाल और पहले के एसआईआर को देखें तो अगर ये लोग ट्रिब्यूनल में अपील करते हैं तो 91 फीसदी अपीलें मंज़ूर होने और नाम वोटर लिस्ट में वापस जुड़ने की संभावना है. बड़े पैमाने पर लोगों को वोट देने के अधिकार से गैर-कानूनी तरीके से वंचित करने की पूरी जिम्मेदारी ECI का है. SIR को तुरंत रोकना जाना चाहिए और बड़े पैमाने पर वोट देने के अधिकार से वंचित किए गए लोगों को राहत देने के उपाय तलाशे जाने चाहिए.’
