प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक गुरु, कथाकार और सामाजिक कार्यकर्ता जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य ने खुद को फिल्म अभिनेता आमिर खान का फैन यानी प्रशंसक बताया है. उन्होंने कहा कि आमिर के आगे सिर्फ खान नहीं देखना चाहिए. आमिर ने अपने जीवन में जो किया है, वो देश भूल नहीं सकता है. उन्होंने हर बार अपनी फिल्मों के जरिए समाज को एक नई सोच और एक नया विचार दिया है.
उन्होंने कहा कि आमिर खान अभी मुझसे वेदांत पढ़ रहे हैं, वो गीता सीख रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हेंं अब अद्वैत में रुचि आ रही है. अब वो मेडिटेशन करते हैं, अब वो ध्यान करते हैं. अब वो ग्रंथ पढ़ते हैं, जिन ग्रंथों में गहरी बातें लिखी गई हैं.
आमिर का व्यक्तित्व समुचा देश जानता है- गुरु सतीशाचार्य
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— ABP News (@ABPNews) October 3, 2026
एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में जगद्गुरु सतीशाचार्य ने कहा, ‘मुझे लगता है कि आमिर का व्यक्तित्व समुचा देश जानता है. उनकी सहजता, उनकी सरलता, उनकी ईमानदारी और उनका देशप्रेम. उनके दादा जी पूरे देश के लिए लड़ते रहे. तो ये ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको देश पर पूरी तरह से न्योछावर किया है.’
आमिर अपनी नीतियों के लिए जाना जाने वाला नाम है- गुरु सतीशाचार्य
उन्होंने कहा, ‘आमिर खान अपनी नीतियों के लिए जाना जाने वाला एक नाम है. जब उन्होंने अपनी बातें बताई तो मैं बहुत ही प्रभावित हुआ. उन्होंने बताया कि उनकी कोई फिल्म थी, जिसके लिए उन्हें ओटीटी पर बहुत पैसे मिल रहे थे, लेकिन उन्होंने ओटीटी को न देकर यूट्यूब को दे दिया. एक नई नीति चलाई कि जो नए कलाकार है, उनका क्या होगा. तो ऐसा कौन है जो सैकड़ों करोड़ रुपये दांव पर लगाकर नए कलाकारों को लेकर विचार करेगा.’
आमिर खान की तीन हिंदू पत्नियों के जिक्र पर बोले गुरु सतीशाचार्य
इस दौरान जब जगद्गुरु सतीशाचार्य से आमिर खान की तीन हिंदू महिलाओं से शादी और उन पर लगाए गए लव जिहाद के आरोपों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘आप जहां से देखते हैं, आप जिस तरह से देखते हैं, आपका नजरिया ही आपको छोटा या बड़ा बनाता है. व्यक्तिगत रूप से जब हम किसी का ऑडिट करते हैं, तो हम उसमें अच्छाई और बुराई दोनों देखते हैं और जिसकी बहुतायतता हो, जो बहुत ज्यादा हो, उसे ही ग्रहण कर लेते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘कमी किसमें नहीं है. जो उनके अपने निजी जीवन की बातें हैं, वो हम नहीं जानते हैं, हम उन परिस्थितियों को नहीं जानते हैं, हम उन स्थितियों को नहीं जानते हैं, तो हम उस विषय पर कैसे कोई टिका-टिप्पणी कर सकते हैं. हम तो उसपर टिका-टिप्पणी करेंगे, जो हमारे देश के काम आ रहा है. हमें विकसित भारत 2047 में ऐसे लोगों की जरूरत है.’
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