उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में शुक्रवार, 10 जुलाई को दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई गई. अब उनके इस दावे पर उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद बृजलाल ने प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया.
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2003 में मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान तत्कालीन आईजी लॉ एंड ऑर्डर वीएन राय की मौजूदगी में हनुमानगढ़ी के पास रोजा इफ्तार का आयोजन प्रस्तावित था और सीढ़ियों के पास चटाई बिछाकर नमाज की तैयारी भी की गई थी.
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बृजलाल के अनुसार, उस समय फैजाबाद के तत्कालीन एसएसपी राजीव सबरवाल ने उन्हें इसकी सूचना दी और विरोध के बाद यह प्रयास सफल नहीं हो सका. उनका कहना है कि बाद में महंत के आवास पर नमाज और रोजा इफ्तार का आयोजन हुआ, जबकि आवास के बाहर सीढ़ियों पर बिछाई गई चटाई पुलिस ने हटवा दी थी.
हालांकि, बृजलाल के इन आरोपों को खारिज करते हुए पूर्व आईपीएस वीएन राय ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि बृजलाल झूठ बोल रहे हैं और उनका दावा पूरी तरह गलत है.
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सीएम योगी के बयान और बृजलाल के दावे पर सियासत भी तेज हो गई है. विपक्षियों का दावा है कि अब जबकि चुनाव करीब है तो सत्तारूढ़ दल समाज के धार्मिक बंटवारे की कोशिश कर रहा है. एआईएमआईएम प्रवक्ता वारिस पठान ने सीएम योगी के बयान पर कहा कि सबसे आसान है मुस्लिमों के खिलाफ अनाप शनाप बोलना.
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में कहा था कि क्या जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कराया जा सकता है? वहीं सीएम के इस बयान पर अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी. सपा चीफ ने बिना किसी बायन और नाम का जिक्र करते हुए कहा- पराजय काल, विपरीत बुद्धि.
