इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गोंडा में लंबे समय से लंबित भूमि विवाद की सुनवाई कर रही सिविल जज शबीना खान को कथित तौर पर प्रभावित करने के प्रयास को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट ने गोंडा की कमिश्नर और चर्चित वरिष्ठ आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा जज को फोन करके प्रभावित करने के मामले को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया.
हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी के फ़ोन करने की हरकत को आपराधिक अवमानना के लिए संदर्भित किया और कहा कि ये न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है और न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न करता है.
ज़मीन विवाद से जुड़ा हुआ है मामला
पूरा विवाद देवीपाटन मंडल के कमिश्नर के नाम से दर्ज नजूल भूमि से जुड़ा हुआ है. हाईकोर्ट ने ज्योति विद्या मंदिर की ओर से नगर पालिका परिषद गोंडा के खिलाफ 1997 से लंबित नियमित मुकदमे को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया.
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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया जिसमें न्यायिक कार्रवाई से जुड़े मामलों में जजों को धमकी या दबाव में लेने को गंभीरता से लिया गया है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आपराधिक अवमानना के तहत विचार करने की जरूरत है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि चीफ जस्टिस अथवा सीनियर जस्टिस से आवश्यक दिशा निर्देश प्राप्त करने के बाद मामले को उपयुक्त कोर्ट के समक्ष रखा जाए.
आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल पर फ़ोन का आरोप
कमिश्नर की ओर से कोर्ट के सामने रखे गए पक्ष के मुताबिक उक्त जमीन कार्यालय भवन और अन्य सरकारी प्रयोजनों के लिए आरक्षित थी. राज्य की ओर से आरोप लगाया गया कि उस भूमि पर स्कूल भवन का निर्माण कर लिया गया और विवाद करीब तीन दशक से सिविल कोर्ट में लंबित है. मुकदमा साक्ष्य के चरण में लंबित था और उसमें यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश भी जारी था.
स्कूल ने आरोप लगाया था कि राज्य के अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर कोर्ट पर अनुचित दबाव बना रहे हैं. इसी आधार पर मुकदमे को देवी पाटन मंडल से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की गई थी. विवाद तब और गंभीर हो गया जब गोंडा की सिविल जज सीनियर डिवीजन शबीना खान ने कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के साथ 15 जुलाई को हुई कथित टेलीफोन बातचीत की जानकारी दी.
जज के अनुसार बातचीत में उनकी छुट्टी के साथ-साथ उनकी अदालत में लंबित एक मामले का भी संदर्भ था. इसके बाद जज ने 4 अगस्त 2026 को जिला जज गोंडा से मामले को उनकी कोर्ट से ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था. बाद में जिला जज ने मुकदमे को समान क्षेत्राधिकार वाली गोंडा की दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया. इससे स्कूल की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल ट्रांसफर याचिका निष्प्रभावी हो गई.
हाईकोर्ट ने इस घटना पर जताई चिंता
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि मामले को समाप्त करने से पहले कमिश्नर द्वारा सिविल जज को किए गए फोन कॉल से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जज शबीना द्वारा बताए गए बातचीत के लहजे और भाषा से प्रथम दृष्टया सीधा आभास मिलता है कि उन्हें बतौर पीठासीन अधिकारी प्रभावित करने का प्रयास किया गया.
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हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कमिश्नर ने फोन किए जाने से इनकार नहीं किया है. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि लंबित मुकदमे के संदर्भ में कोई पक्षकार फोन करके अदालत से कैसे संपर्क कर सकता है. भूमि विवाद मामले में राज्य सरकार तथा नगर पालिका परिषद गोंडा पक्षकार है. न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ अदालतों को अपमान और दबाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों को बिना किसी भय के अपनी न्यायिक जिम्मेदारियां का निर्वहन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए. किसी व्यक्ति ,पक्षकार या अधिवक्ता द्वारा कोर्ट पर दबाव बनाने का कोई भी प्रयास न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है.
