- आईआईटी दिल्ली छात्र मौत पर अधिकारियों-छात्रों की अहम बैठक हुई।
- आईआईटी ने छात्रों की ₹1 करोड़ मुआवजा, डीन इस्तीफा मांगें ठुकराईं।
- मानसिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल, प्रदर्शनकारी छात्रों की सुरक्षा पर बनी सहमति।
- आवास और प्रोफेसरों के असंवेदनशील टिप्पणी जैसे मुद्दे भी उठे।
आईआईटी दिल्ली के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत को लेकर मंगलवार (25 अगस्त, 2026) को संस्थान के डायरेक्टर, डीडीओ, डीडीएसपी और छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक हुई. यह अहम बैठक मुआवजे, मानसिक स्वास्थ्य, अकोमोडेशन प्रोटोकॉल्स, डीन के इस्तीफे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सुरक्षा पर केंद्रित थी.
इस पूरी बैठक में कुछ मुद्दों पर IIT ने आगे बढ़ने की कमिटमेंट दी है, लेकिन छात्रों की कई कोर डिमांडें अभी भी पूरे नहीं हुए हैं. मीटिंग में IIT ने मुआवजा, प्रदर्शन, स्वास्थ्य प्रोटोकॉल्स, आवास पॉलिसी और जांच जैसे मुद्दों पर कुछ कदम उठाने का भरोसा दिया, लेकिन 1 करोड़ रुपये मुआवजा और ADSW के इस्तीफे जैसी छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं किया गया.
बैठक में किन मुद्दों पर बनी सहमति, किस पर हुई चर्चा
- कमेटी बनाने पर सहमति, लेकिन नामों पर मतभेद
छात्रों ने कहा कि मौजूदा कमेटी में ऐसे लोग हैं, जिन पर उन्हें भरोसा नहीं है. कमेटी में छात्रों की तरफ से नॉमिनेटेड सदस्य होने चाहिए. इस पर आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर ने कहा कि कमेटी की कंपोजिशन बदली जाएगी. इसके बाद छात्रों से कहा गया कि वे सर्वसम्मति बनाकर नाम दें, जिसमें दो छात्र प्रतिनिधि हों और इसमें कम से कम 1 महिला हो. अगर जरूरत हुई तो अन्य नाम भी दिए जाएंगे. डायरेक्टर ने शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) तक नामों पर आगे बढ़ने की बात कही. वहीं, छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र प्रतिनिधियों पर प्रशासन का प्रभाव नहीं होना चाहिए.
- 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग, लेकिन IIT ने कोई निश्चित रकम नहीं बताई
इस बैठक में मुआवजा एक बहुत बड़ा मुद्दा था. मुआवजे की कोई रकम तय नहीं की गई थी, इसलिए छात्रों ने 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी. इस पर डायरेक्टर ने साफ तौर पर जवाब दिया, ‘IIT 1 करोड़ रुपये की कमिटमेंट नहीं कर सकता हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा कि परिवार को समर्थन करने लायक पर्याप्त राशि जुटाने की कोशिश की जाएगी. DDO ने बताया कि 6 लाख रुपये स्टैंडर्ड वेनोवोलेंट फंड (Standard Benevolent Fund) के तहत दिए जाने की बात है. इसके अलावा, स्टाफ मेंबर्स से भी फंड जुटाने की कोशिश होगी. डायरेक्टर ने कहा कि इसके लिए क्राउडफंडिग/फंडरेजर शुरू किया जा सकता है.
क्या तय हुआ?
छात्रों ने बताया है कि डायरेक्टर ने कहा कि रिवाइज्ड मेल में 6 लाख रुपये वेनेवोलेंट फंड की रकम स्पष्ट रूप से बताई जाएगी. फंडरेजर शुक्रवार (28 अगस्त) तक IITDA अध्यक्ष से चर्चा के बाद शुरू करने की बात कही गई. इसके अलावा 6 लाख रुपये के साथ मेडिकल बिल की अदायगी और फंडरेजर से जुटाई गई रकम परिवार को देने की बात हुई. छात्रों ने मांग की कि पैसा सीधे छात्र की मां के अकाउंट में जाए, जिस पर डायरेक्टर ने भी अपनी सहमति दी. यानि 1 करोड़ मुआवजा पर IIT ने हामी नहीं भरी है.
- मानसिक स्वास्थ्य और आवास के पुराने प्रोटोकॉल्स जारी करने की मांग
छात्रों ने मांग की कि IIT के पास पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य और आवास से जुड़े प्रोटोकॉल्स तुरंत सार्वजनिक किए जाएं. इस पर डायरेक्टर ने प्रोटोकॉल्स को गुरुवार (27 अगस्त) तक जारी करने की बात कही. उन्होंने बताया कि ये प्रोटोकॉल्स काउंसेलर्स और मनोचिकित्सकों से कंसल्टेशन के बाद बनाए गए हैं. इसमें एक फुल-टाइम मनोचिकित्सक, 2 पार्ट-टाइम मनोचिकित्सक और 15 काउंसेलर्स की कंसल्टेशन का उल्लेख है.
छात्रों ने कहा कि प्रोटोकॉल्स घंटों के अंदर जारी होने चाहिए. डायरेक्टर ने कहा कि वे उसी दिन जारी करने की कोशिश करेंगे, लेकिन गुरुवार (27 अगस्त) तक जारी करने के लिए कमिटेड हैं. साथ ही, छात्रों को शामिल करके प्रोटोकॉल्स की रिव्यू कमेटी बनाने की बात हुई.
- हॉस्टल/अपार्टमेंट आवास को लेकर अहम सवाल
छात्रों का कहना है कि सिर्फ इसलिए हॉस्टल आवास से इनकार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि छात्र को पैरेंटल सपोर्ट मिल सकता है. छात्रों को अपने पीयर्स (Peers) तक एक्सेस मिलना चाहिए. डायरेक्टर ने कहा कि आवास प्रोटोकॉल को मेडिकल असेसमेंट के आधार पर रिव्यू किया जाएगा. प्रोटोकॉल्स जारी होने के बाद छात्रों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को शामिल करके एक बड़ी कमेटी बनाकर इसकी समीक्षा की जाएगी.
ऋषिकेश के मामले में छात्रों ने सवाल उठाया कि उसे अपार्टमेंट देने के लिए एक्ससेपशन क्यों नहीं बनाया गया. डायरेक्टर ने जवाब दिया कि प्रशासन के अनुसार रिक्वेस्ट हॉस्टल की थी, अपार्टमेंट की नहीं. छात्रों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि छात्र की मां ने बताया था कि उन्होंने अपार्टमेंट आवास के लिए सक्रिय रूप से रिक्वेस्ट की थी. इस मामले को डायरेक्टर ने जांच कमेटी के सामने देखने की बात कही.
- ADSW/Dean के इस्तीफे की मांग, IIT ने नहीं मानी
छात्रों ने श्रीदेवी/ADSW के इस्तीफे की मांग रखी. छात्रों का तर्क था कि यह मांग सिर्फ ऋषिकेश incident की वजह से नहीं है. उनके अनुसार ADSW के खिलाफ पहले भी मोरल पुलिसिंग और इनटेंसिव रिमार्क्स से जुड़े आरोप रहे हैं. छात्रों का कहना था कि ऐसे रिमार्क्स और पुरानी घटनाओं को देखते हुए वह ADSW के पद के लिए उचित नहीं हैं. छात्रों ने कहा कि वे इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति रखते हैं.
इस पर डायरेक्टर का जवाब काफी स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि वे ADSW के कुछ टिप्पणियों को समर्थन नहीं करते, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ADSW ने ऑफिस में काफी समय दिया है और उनके काम को केवल टिप्पणियों की वजह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इसलिए डायरेक्टर ने इस्तीफे की मांग मानने से इनकार कर दिया.
वहीं, DDO ने कहा कि डीन्स की अपॉइंटमेंट के लिए एक प्रक्रिया है और इस्तीफे की जगह शॉर्टकमिंग्स को ठीक करने की दिशा में काम होना चाहिए. DDSP ने कहा कि छात्रों अपनी समस्याएं किसी और अधिकारी, जैसे DOSA के पास भी ले जा सकते हैं. इस पर छात्रों ने सवाल किया कि अगर छात्रों को किसी दूसरे व्यक्ति के पास ही जाना है, तो ADSW के पद का क्या मतलब है? यानि इस्तीफे पर IIT प्रशासन और छात्रों के बीच कोई सहमति नहीं हुई.
- प्रदर्शनकारी छात्रों की सुरक्षा पर क्या हुआ?
छात्रों ने मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले IIT दिल्ली के छात्रों के खिलाफ कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होना चाहिए. इस पर डायरेक्टर ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन कुछ गाइडलाइन्स के भीतर. क्लासेज में बाधा डालने की अनुमति नहीं होगी. बाहरी लोगों को कैंपस में आकर प्रदर्शन में शामिल नहीं होने चाहिए. छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं किया जा रहा है. जब छात्रों ने पूछा कि फिर दंडात्मक कार्रवाई क्या होगी, तो DDO ने कहा कि वह इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं.
- गार्ड्स और प्रोफेस्सर्स के संवेदनहीन टिप्पणियां का मुद्दा
छात्रों ने दो और गंभीर मुद्दे उठाए, जिसमें प्रदर्शन के दौरान गार्ड्स का व्यवहार सहयोग करने वाला नहीं था. कुछ प्रोफेसर्स की तरफ से सुसाइड को लेकर अपमानजनक और असंवेदनशील टिप्पणियां की गई. DDO ने कहा कि ऐसे असंवेदनशील टिप्पणियां के घटनाओं की लिस्ट तैयार की जाए. फिर उनकी जांच होनी चाहिए. आगे ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एक्शन प्लान बनाने की बात भी हुई.
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