द्रास में स्थित कारगिल युद्ध स्मारक भारतीय सेना ने 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों और अधिकारियों की याद में बनवाया था. इसे विजयपथ के नाम से भी जाना जाता है. गुलाबी बलुआ पत्थर से बने इस स्मारक पर देश के लिए शहीद हुए जवानों के नाम अंकित हैं. यहां मनोज पांडे गैलरी भी है, जिसमें युद्ध के दौरान की तस्वीरें, हथियार और तोपखाने से जुड़ी चीजें प्रदर्शित की गई हैं. हर साल 26 जुलाई को यहीं कारगिल विजय दिवस का मुख्य समारोह आयोजित किया जाता है.

अगर आपको प्राकृतिक सुंदरता पसंद है तो सुरू घाटी जरूर जाएं. यह घाटी अपनी हरी भरी वादियों और नुन कुन पर्वतों के शानदार नजारों के लिए जानी जाती है. यहां का शांत वातावरण पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है.

कारगिल से करीब 36 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 1डी पर स्थित मुलबेक मठ अपनी 9 मीटर ऊंची चट्टान पर उकेरी गई मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा के लिए फेमस है. माना जाता है कि यह प्रतिमा 8वीं शताब्दी की है, जबकि एक अन्य मत के अनुसार इसका निर्माण कुषाण काल में हुआ था. प्रतिमा के पास खरोष्ठी लिपि में एक प्राचीन शिलालेख भी मौजूद है.

मुशकोह घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जंगली ट्यूलिप फूलों और ट्रैकिंग के लिए जानी जाती है. यहां आने वाले पर्यटक घाटी के खूबसूरत नजारों का आनंद लेने के साथ ट्रैकिंग का भी एक्सपीरियंस लेते हैं.

अगर आप बर्फीले नजारों के शौकीन हैं तो पारकाचिक ग्लेशियर आपके लिए बेहतरीन जगह हो सकती है. यह स्थान रोमांचक गतिविधियों और पिकनिक के लिए भी जाना जाता है.

शारगोल मठ चट्टान के ऊपर बना एक अनोखा गुफा मठ है, जो अपनी अलग बनावट के लिए फेमस है. वहीं आर्यन घाटी अपनी अनूठी संस्कृति और परंपराओं के लिए जानी जाती है. यहां द्रोग्पा समुदाय की जीवनशैली और संस्कृति को करीब से देखा जा सकता है.

LoC के पास स्थित हुंडरमन गांव एक पुराना वीरान गांव है. यहां बना Hunderman Museum of Memories इस क्षेत्र के पुराने इतिहास और बीते समय की झलक दिखाता है.

द्रास घाटी को लद्दाख का प्रवेश द्वार कहा जाता है. 1999 के कारगिल युद्ध में इस क्षेत्र की जरूरी भूमिका रही थी. यह घाटी बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच स्थित है और भारत के सबसे ठंडे इलाकों में गिनी जाती है. सर्दियों में यहां औसत तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.
Published at : 26 Jul 2026 08:31 AM (IST)
