भारत में खेती करना अब पहले के मुकाबले काफी खर्चीला होता जा रहा है. फसल की बुवाई से लेकर खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई और कटाई तक किसानों को कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं. कई बार किसानों के पास खेती के जरूरी कामों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं होता. ऐसे में उन्हें दूसरे लोगों या संस्थानों से कर्ज लेना पड़ता है, जहां ब्याज की दर काफी ज्यादा होती है.
ऐसे में किसानों को इस परेशानी से बचाने के लिए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC योजना चलाती है. इसके जरिए किसान बैंक से कम ब्याज पर खेती के लिए कर्ज ले सकते हैं. ऐसे मे कई किसानों के मन में सवाल होता है कि KCC से खेती के लिए कितना कर्ज मिल सकता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी पूरी जानकारी.
किसान क्रेडिट कार्ड से मिलने वाला लोन
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसानों को उनकी खेती की जरूरत के हिसाब से लोन दिया जाता है. बजट 2025-26 में सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड के तहत मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (MISS) की ऋण सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसान को सीधे 5 लाख रुपये मिलेंगे. बैंक किसान की जमीन, बोई जाने वाली फसल, खेती के क्षेत्रफल और आर्थिक जरूरतों का आकलन करने के बाद लोन की सीमा तय करता है. इसलिए किसी किसान को कम तो किसी को ज्यादा कर्ज मिलता है.
इतने ब्याज दर पर मिलता है कर्ज
किसान क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी खासियत इस पर मिलने वाली ब्याज में छूट है. मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम के तहत पात्र किसानों को 3 लाख रुपये तक के अल्पकालिक कृषि ऋण पर 7 प्रतिशत सालाना की ब्याज दर का प्रावधान है. इसके अलावा अगर किसान तय समय पर कर्ज चुका देता है तो उसे 3 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रॉम्प्ट रिपेमेंट इंसेंटिव (PRI) मिलता है. इससे प्रभावी ब्याज दर घटकर 4 प्रतिशत सालाना रह जाती है. इस बात पर ध्यान दें कि ब्याज में सरकारी छूट की पात्रता और सीमा लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होती है.
इन किसानों को मिलता है किसान क्रेडिट कार्ड
KCC योजना का लाभ सिर्फ उन किसानों तक सीमित नहीं है, जिनके नाम पर खेती की जमीन है. इसके तहत कई श्रेणियों के किसान आवेदन कर सकते हैं. इसमें संयुक्त रूप से खेती करने वाले किसान, बटाईदार और किराये पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान, मौखिक पट्टेदार किसान भी शामिल हैं.
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बिना गारंटी भी मिल सकता है कर्ज
किसान क्रेडिट कार्ड के तहत किसानों को बिना किसी गारंटी के भी कर्ज मिल सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक ने कृषि ऋण के लिए बिना गारंटी वाली सीमा को 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया है. यह नियम 1 जनवरी 2025 से लागू है. इसका मतलब है कि पात्र किसान 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण बिना जमीन या अन्य संपत्ति गिरवी रखे ले सकते हैं. हालांकि 2 लाख रुपये से अधिक के कर्ज पर बैंक अपनी निर्धारित शर्तों के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा या गारंटी मांग सकता है.
बैंक रखता है जानकारी
KCC के तहत मिलने वाली रकम तय करने के लिए बैंक कई बातों का ध्यान रखता है. इसमें किसान के पास कितनी जमीन है, वह कौन-सी फसल उगा रहा है और उस फसल की खेती में कितना खर्च आएगा, यह देखा जाता है. इसके लिए जिला स्तरीय तकनीकी समिति (DLTC) की ओर से तय स्केल ऑफ फाइनेंस का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा फसल कटाई के बाद होने वाले खर्च, घरेलू जरूरतों और खेती के उपकरणों के रखरखाव के लिए भी निर्धारित अतिरिक्त राशि जोड़ी जाती है. आमतौर पर किसान क्रेडिट कार्ड की वैधता पांच साल होती है. इस दौरान बैंक हर साल किसान की जरूरत और फसल के हिसाब से क्रेडिट लिमिट की समीक्षा करता है.
KCC के लिए ऐसे करें आवेदन
किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए किसान अपने नजदीकी सरकारी बैंक, ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक या पात्र निजी बैंक की शाखा में संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा कुछ बैंक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी देते हैं. आवेदन के लिए आमतौर पर आधार कार्ड, पहचान पत्र, जमीन से जुड़े दस्तावेज, पासपोर्ट साइज फोटो और फसल संबंधी जानकारी की जरूरत पड़ती है. किराये या बटाई पर खेती करने वाले किसानों को खेती से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी देने पड़ सकते हैं. आवेदन मिलने के बाद बैंक दस्तावेजों और खेती से जुड़ी जानकारी की जांच करता है. पात्रता पूरी होने पर किसान को क्रेडिट कार्ड जारी किया जाता है.
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