NEET पेपर लीक समेत देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करने वाले एक नए ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. सूत्रों के मुताबिक, इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किया जा सकता है. प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि कड़ी सजा से प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और परीक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत होगा.
NEET पेपर लीक मामले में पुराने कानूनों की बात करें तो साल 2024 में नया कानून लागू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक, नकल और परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों में मुख्य रूप से भारतीय दंड संहिता IPC, IT Act और अलग-अलग राज्यों के नकल विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती थी. पुरानी व्यवस्था में पूरे देश के लिए ऐसा कोई अलग केंद्रीय कानून नहीं था, जो केवल पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों से निपटने के लिए बनाया गया हो. ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं का इस्तेमाल करती थीं.
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भारतीय दंड संहिता की किन धाराओं में क्या है सजा?
इन मामलों में आमतौर पर IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी, धारा 406 और 409 के तहत आपराधिक विश्वासघात, धारा 120B के तहत आपराधिक साजिश और धारा 201 के तहत सबूत मिटाने जैसी धाराएं लगाई जाती थीं. मामले की प्रकृति के अनुसार अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती थीं. अगर प्रश्नपत्र या परीक्षा से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से लीक की गई हो, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराएं भी लागू की जाती थीं. इसके अलावा कुछ राज्यों में अपने अलग नकल विरोधी कानून भी मौजूद थे, जिनके तहत कार्रवाई की जा सकती थी. NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में भी शुरुआत में जांच एजेंसियों ने भारतीय दंड संहिता की इन्हीं धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी. उस समय तक नया केंद्रीय कानून लागू नहीं हुआ था, इसलिए जांच पुराने कानूनी प्रावधानों के आधार पर शुरू की गई थी.
परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर कानून
केंद्र सरकार ने PUMA Act, 2024 लागू किया. यह कानून विशेष रूप से सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक, प्रश्नपत्र चोरी, नकल और संगठित परीक्षा अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया है. यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA), रेलवे भर्ती बोर्ड और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है. नए कानून के तहत पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी को गैर-जमानती अपराध माना गया है. इसके अनुसार दोषियों को 3 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की जेल हो सकती है. साथ ही उन पर 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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